लड़के की गांड में लड़के का लंड – 1

दोस्तो, मेरा नाम मनीष है। मुझे लड़की और लड़का दोनों में रूचि है। अब तक मेरी चार गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं और मैंने कई बार उन गर्लफ्रेंड की चुत को फाड़ा भी है। लेकिन अब मेरा मन अपनी गांड में लंड लेने का है। 

ये गांड फाड़ चुदाई कहानी उस समय की है जब मैं भरपूर जवान हो गया था। उस समय मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था। किस तरह एक जवान लड़के ने ट्रेन में मुझे पेला था, आज आपको मैं वही बताने जा रहा हूं। 

उस समय गर्मी का मौसम था और गर्मियों की छुट्टी भी शुरू हो गयी थीं। मैंने छुट्टी में अपने गांव नानी के घर जाने का प्लान बनाया। मेरे पेरेंट्स भी मेरे साथ जाने वाले थे लेकिन दीदी के कुछ काम की वजह से मम्मी-पापा रूक गए और मुझे अकेले ही पहले भेज दिया। 

गर्मी की वज़ह से मैंने फर्स्ट क्लास एसी के एक एक्स्ट्रा केबिन की टिकट बुक की थी। मम्मी-पापा मुझे स्टेशन छोड़कर घर चले गए। मेरे केबिन में दो ही लोगों के लिए बर्थ थी। मैं बाहर ही खड़ा था। 

मैं दिखने में बहुत ही आकर्षक और चिकना लौंडा था। मुझे देखकर लड़के हों या लड़की, दोनों पागल हो सकते थे। मेरी गोल बड़ी आंखें, गुलाबी होंठ, गोरा बदन और चिकना चेहरा है। मेरी गांड भी एकदम गोल है। गर्मी के पसीने से मेरा चेहरा और भी खिल उठा था। 

मैं थोड़ा पतला सा हूँ और मेरी हाईट करीब 5 फिट है। मेरे शरीर में उभरती हुई जवानी साफ साफ दिखाई दे रही थी। मेरे केबिन में एक लड़का आ गया, उसकी सीट मेरे साथ ही थी। वह लड़का भी काफी हैंडसम और गोरा था। 

उसका कड़ियल जिस्म देख कर साफ़ पता चल रहा था कि वो लड़का जिम जाता था। उसकी हाईट लगभग साढ़े पांच फिट थी। उसका शरीर काफी मस्त था। मैं भी उसको देखता ही रह गया। उसकी आंखों में किसी को पाने की चाहत साफ़ दिखाई दे रही थी। 

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ट्रेन चलने लगी तो मैं अन्दर आ गया और अपनी सीट पर आकर बैठ गया। शुरूआत में तो मेरी उस लड़के से कुछ बात नहीं हुई, लेकिन धीरे धीरे हम दोनों में बातें होने लगीं। उसने अपना नाम रवि बताया और उसकी उम्र 20 साल की बताई। 

वो मेरे से एक साल बड़ा था। वह किसी एजेंसी में काम करता था। हमारी बातें चलती रहीं। बातों ही बातों में वह मेरे शरीर और जांघों के बीच बार बार देखे जा रहा था। कुछ देर बाद उसने मुझे अचानक से पूछा- मनीष, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं? 

मैंने कहा- हां भैया है न! उसने कहा- अरे वाह, तब तो तुमने सेक्स भी किया होगा? उसकी इस बात पर मैं एक बार को तो हैरान रह गया। फिर मैंने भी कहा‌- हां एक बार नहीं … बहुत बार किया है। आपकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या भैया? 

जब मैंने उससे ये पूछा, तो उसने ना बोलते हुए कहा- क्या तुमने कभी किसी का लंड भी लिया है? मैंने कहा- नहीं भैया, कभी नहीं लिया। उसने ये सब बिना शर्माए ही पूछा लिया था तो मैंने भी उसे बिंदास बता दिया। 

शायद वो मेरे करीब आना चाहता था लेकिन नहीं आ पा रहा था। कुछ देर बाद रात होने लगी थी। इसलिए पर्दे लगा दिए गए। अब मैंने मन बना लिया था कि आज तो इसका लंड लेना ही है इसलिए मैंने जानबूझ कर अपना रूमाल सीट के नीचे गिरा दिया और अपनी गांड उसकी तरफ करते हुए रूमाल उठाने लगा। 

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उससे मेरी गोल गांड देख कर रहा नहीं गया और मैंने ध्यान दिया कि उसका लंड झट से खड़ा हो गया था। उसकी पैंट में उसका लंड फूला हुआ दिखने लगा था। उसका लंड बहुत ही लंबा और मोटा था। 

वह अपने लंड को छुपाने लगा और शायद उसे बिठाने के लिए वो मुठ मारने बाथरूम की तरफ चल दिया। उसके मोटे लंड को देख कर मेरे अन्दर भी गर्मी चढ़ने लगी थी। बाथरूम से वापिस आकर वो अपनी एजेंसी के बारे में बताते हुए मेरे करीब आकर बैठ गया और मुझसे चिपकने की कोशिश करने लगा। 

वह काफ़ी गर्म हो चुका था, अब मुझे भी उसकी गर्मी का अहसास होने लगा था। वह धीरे धीरे मेरी जांघों को सहलाने लगा। ये देख कर मैं शर्मा गया और मैंने उसका हाथ अपनी जांघ से हटा दिया। वह फिर से मुझे सहलाने लगा, 

मेरे सर के बालों पर हाथ फेरने लगा। मैं सुन्न हो गया। मेरा लौड़ा भी हरकत में आने लगा था। मैंने उसे रोका नहीं और उसके सहलाने का मजा लेने लगा। उसने देखा कि मेरी तरफ से कोई विरोध नहीं है तो अगले कुछ ही पलों में वह लड़का किसी छिपकली की तरह मुझसे चिपक गया और मुझे चूमने लगा। 

अब मेरा लौड़ा एकदम कड़क हो गया और वह ये देख कर मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरा लौड़ा सहलाने लगा। एक बार को तो मैं थोड़ा घबराया लेकिन उसने मुझे सम्भाल लिया। मैं भी उसको किस करने लगा और मजे लेने लगा। 

तभी उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लौड़े पर रख दिया। उसका लंड बहुत ही लंबा और मोटा था। मैं एक मर्द का लंड सहलाने लगा। अगले दस मिनट तक हम दोनों किस करते रहे। तभी उसने मेरे कान में कहा- आज रात को मेरे इस गर्म लोहे की हवस निकाल देना जानू, बहुत दिन से तड़प रहा है। मैंने कुछ नहीं कहा और उसका लंड हिलाता रहा। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और हम दोनों अलग होकर बैठ गए। 

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