बाजार में मिली भाभी को घर पे रगड़ा – 2 

मैंने ब्लाउज खोला और उसकी रसीली चूचियों को पीने लगा। मैं बीच बीच में उसके निप्पलों को दांतों से काट भी रहा था जिससे वो बुरी तरह से तड़प उठी थी। फिर मैंने पास की दीवार के साथ सटाकर उसकी एक टांग उठा दी और लंड का सुपारा उसकी चूत पर सटा दिया। 

एक धक्के के साथ मैंने फिर से लंड को उसकी चूत में चढ़ा दिया। उसके मुंह से आह्ह … निकल गई। मैं लगातार उसकी चूत में लंड को पेलने लगा। पारुल अब कामुक सिसकारियां ले रही थी- आह्ह … आराम से … आईई … आह्ह … अम्म … ओह्ह … अम्म … ऊईई … आह्ह! 

वो मेरे बालों को सहला रही थी और बीच बीच में मेरे चेहरे को पकड़ कर मेरे होंठों को चूसने लगती थी। उसकी चूत से लगातार रस निकल रहा था जिससे चूत पूरी चिकनी हो गई थी और उससे पच-पच की आवाज होने लगी थी। 

फिर मैंने उसे पास पड़े सोफे पर गिरा लिया और उसके ऊपर लेटकर चूत चोदने लगा। पांच मिनट तक सोफे पर चुदाई करते हुए मैंने उसकी चूत में ही अपना माल गिरा दिया। हम दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे। 

फिर वो मुझे हटाकर बाथरूम में चली गई। उसके बाद वो फ्रेश होकर वापस आई। उसके घर में कोई भी नहीं था; शायद वो अकेली रहती थी। फिर उसने मेरे लिए चाय बनाई और मैं चाय पीकर वहां से चला गया। उसके बाद से मेरी उससे बातें होने लगीं। 

दो-तीन दिन के बाद फिर से मुझे चुदाई की ललक उठी तो मैंने उसको मिलने के लिए कहा। वो कहने लगी कि कहीं बाहर चलेंगे, घर में बार बार किसी का आना ठीक नहीं है, लोगों को शक होगा। मुझे भी उसकी बात ठीक लगी। 

इलाके की रंडी की चुत चुदाई – 1

दूसरा लड़का भी था भाभी का दीवाना

मैं उसको लेने के लिए चला गया। वो बाहर आ गई और थोड़ी दूरी पर आकर मेरी बाइक पर बैठ गई। सब लोग उसको ऐसे घूर रहे थे जैसे वो बहुत बड़ी रंडी हो। हम शहर के बाहर आ गए जहां से जंगल शुरू हो जाता था। 

मैंने देखा कि एक लड़का लगातार पीछे बाइक लिये आ रहा था। बीच जंगल में जाकर मैंने बाइक धीमी की तो उस लड़के ने भी बाइक धीमी कर ली। मैं समझ गया कि ये इसका दूसरा आशिक होगा। फिर भी मैं उसको लेकर अंदर चला गया। 

अंदर जाकर मैंने एक बड़े से पेड़ के नीचे भाभी को पकड़ कर चूमना शुरू कर दिया। उसके होंठों को चूसते हुए मैं कपड़ों के ऊपर से ही उसकी चूत और चूचियों को सहलाने लगा। वो भी मेरे लंड को कपड़ों के ऊपर से ही सहलाने लगी। 

कुछ ही देर में हम दोनों नीचे से नंगे हो गए और मैंने उसे पेड़ के सहारे झुकाकर पीछे से उसकी चूत में लंड दे दिया और उसे चोदने लगा। साथ ही मुझे ये भी ख्याल था कि वो लड़का हमारा पीछा कर रहा है इसलिए मैं बार बार पीछे भी देख भी रहा था। 

फिर कुछ देर बाद मुझे वो लड़का मेरे पीछे ही कुछ दूरी पर खड़ा मिला। वो अपने लंड को हाथ में लेकर सहला रहा था जो कि पूरा तना हुआ था। इससे पहले कि मैं कुछ कहता उसने अपने होंठों पर उंगली रखते हुए मुझे चुप रहने का इशारा किया। 

वो धीरे धीरे हमारे पास आ गया और उसने पीछे से पारुल की चूचियों को भींचना शुरू कर दिया। जब उसे लगा कि दो की जगह अब उसके बदन पर चार हाथ आ चुके हैं तो वो एकदम से घूमी और उसने लड़के को उसकी गांड पर लंड सटाए हुए पाया। 

उसने मेरी तरफ देखा और फिर लड़के की तरफ देखा। वो शायद उसको जानती थी। वो लड़का भी शायद भाभी को पहले से जानता था। पारुल बोली- तू यहां क्या गांड मरवा रहा है अपनी? वो लड़का बोला- मरवा तो तू रही है रानी … मुझे भी मारने दे। 

इलाके की रंडी की चुत चुदाई – 2 

पारुल की गांड में दिआ अपना भी लंड

ये बोलकर वो उसकी तरफ बढ़ा तो पारुल उसको हटाने लगी। लेकिन लड़का भी पक्का चोदू था। उसने पारुल को पेड़ की ओर धकेल दिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए उसकी चूत को सहलाने लगा। भाभी की चूत को लंड का स्वाद मिल चुका था। 

वो मस्ती में चुदना चाहती थी इसलिए बनावटी विरोध ज्यादा देर न चला। उसने लड़के के होंठों को चूसना शुरू कर दिया और लड़के की उंगली भाभी की चूत में अंदर बाहर होने लगी। 

पारुल अब सिसकारियां लेते हुए उसके लंड की मुठ मारने लगी। अब माहौल और ज्यादा गर्म हो गया था। हमने पारुल को नीचे घास पर घोड़ी बना लिया और उस पर चढ़ाई कर दी। नीचे से मैंने उसकी चूत में लंड दे दिया और ऊपर से लड़के ने उसकी गांड में लौड़ा फंसा दिया। 

पारुल भाभी की चूत और गांड चुदाई अब एक साथ होने लगी। हम दोनों उसे बुरी तरह से चोदने लगे और वो भी पूरे जोश में आह्ह … चोदो … और चोदो … आह्ह चोदो … करते हुए दो-दो लौड़ों का मजा लेने लगी। 

हमने 10 मिनट तक पारुल भाभी की चूत और गांड चुदाई की। फिर दोनों ही उसकी चूत और गांड में झड़ गए। कुछ देर सांसें संभालने के बाद हम वहां से निकले और अपने अपने घर के लिए चल दिए। 

वो लड़का तो अपने रास्ते निकल गया लेकिन मैं पारुल के साथ उसके घर आ गया। मुझे उसकी गांड चुदाई करनी थी। आज उसकी गांड चुदाई दूसरे मर्द के साथ देखकर मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था। 

घर आने के बाद मैंने उसको समझा बुझाकर गांड चुदवाने के लिए मना लिया। वो भी तैयार हो गई और फिर मैंने उसको नंगी करके बाथरूम में साबुन लगाकर उसकी गांड मारी। चालू भाभी की गीली गांड चोदकर मुझे ऐसा मजा आया कि मैं क्या बताऊं। 

उसके बाद मैंने कई बार उस भाभी की चुदाई की। वो भी मुझे कई बार अपनी चूत की आग मिटाने के लिए बुला लेती थी। शायद वो उस एरिया की चुदक्कड़ भाभी थी क्योंकि कई लोग उसको वासनाभरी नजरों से देखकर मुस्कराते थे।  

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