आंटी की चुदाई करी भीगने के बाद – घोड़ी बनाके खूब चोदा

सभी  को मेरा नमस्कार, जैसा की आप जानते है हम यहाँ रोज एक से एक नयी चुदाई की कहानिआ लाते रहते है। तो यह कहानी भी आपको पूरा गरम कर देगी और लंड  मजबूर कर देगी। 

तो यह बात तब की है जब मै अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था। हमारे आस पड़ोस में बहुत ही अच्छा माहौल था। सभी लोग एक दूसरे को परिवार की तरह समझते थे और अच्छे से बाते किआ करते थे। मै सभी के साथ प्यार से बाते करता था और सम्मान देता था। हमारे पड़ोस की औरते भी मुझसे बहुत मजाक किआ करती थी और मै भी उन्हें कई बार मजाक में ही जवाब दिआ करता था। हमारे इलाके में एक आंटी थी जिनकी शादी कुछ ही साल पहले हुई थी। आंटी का नाम रेखा था जो दिखने में किसी  लड़की से कम नहीं थी। रेखा आंटी के बूब्स एकदम उठे हुए और गांड भी बड़ी और गोल थी। आंटी बहुत ही हसमुख थी और सभी से बहुत मजाक किआ करती थी। 

आंटी और मेरी कई बार बेहेस भी होती थी जिससे हम एक दूसरे से काफी मजाक किआ करते थे।  एक दिन की बात है सभी लोग गली में बाते कर रहे थे। तभी रेखा आंटी भी वही आकर बैठ गयी और सभी से मजाक करने लगी। 

कुछ देर बीतने के बाद रेखा आंटी ने मुझे पुकारा और कहा की उनसे मुझसे एक काम है जो वह मुझे बाद में बताएंगी। अब मेहफिल ख़तम होने के बाद सभी अपने घर चले गए। मै कुछ समय बाद गली में निकला तो रेखा आंटी ने मुझे इशारा करते हुए अपने घर बुलाया। मै बिना कुछ सोचे अंदर चला गया और अंदर जाते ही आंटी ने मेरे ऊपर  सारा पानी फेक दिआ। 

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भीगने के बाद आंटी लगी और सेक्सी और कामुक 

मेरे सरे कपडे गीले हो चुके थे और चौका हुआ वही खड़ा हुआ था। आंटी ने मुझे कहा की यह उनका बदला है मेरा उनका मजाक बनाने के लिए। कुछ देर तक रेखा आंटी ऐसे ही हस्ती रही और अब मुझे बहुत गुस्सा आने लगा था। अब मैने भी पानी लेते हुए एक बाल्टी पूरी आंटी के ऊपर फेकि और उन्हें पूरा भीगा दिआ। आंटी का सूट उनके बदन से पूरा चिपक गया था और उनके बूब्स अब पूरी तरह देखने लगे थे। आंटी अब अपने बालो को अलग करने लगी और भीगने से बचाने लगी। 

अब आंटी मुझपे गुस्सा होने लगी की मैने उन्हें पूरा भीगा दिआ है और अब उन्हें कपडे बदलने पड़ेंगे। ऐसा बोलते हुए आंटी अंदर कमरे में चली गयी और मुझे बाहर रुकने के लिए कहा। मै अभी भी अपने गीले कपड़ो के साथ वह खड़ा था और आंटी का इन्तजार करने लगा। कुछ समय बाद आंटी ने मुझे मदद करने के लिए अंदर बुलाया।  आंटी का गिला सूट उनके बालो में उलझ गया था जिसके लिए उन्हें मेरी मदद चाहिए थी। अब मेने सूट के सारे हुक उनके बालो से अलग कर दिए और रेखा आंटी मेरे सामने ब्रा में खड़ी हो गयी। 

आंटी ऊपर से लेकर निचे तक पूरी भीगी हुई थी जिससे उनका शरीर और भी मादक लग रहा था।  आंटी ने मुझे तोलिआ देते हुए मुझसे उनकी पीठ पोछने के लिए कहा और मैने भी बिना कुछ कहे वैसा करना  शुरू कर दिआ। रेखा आंटी की पीठ पोछते हुए उनकी ब्रा बार बार बिच में आ रही थी। जिसे मै बार बार हाथो से पकड़के उनकी पीठ पोछ रहा था।  अब आंटी ने अपने हाथ पीछे करते हुए अपनी ब्रा के हुक खोल दिए। और आगे से उसे थाम लिआ। 

मेरा लंड भी अब खड़ा होने लगा था और आंटी की सलवार पर टक्कर खा रहा था। अब आंटी ने मुड़ते हुए कहा की मै उनका भीगा हुआ गला भी पोछ दू कुकी उनके दोनों हाथ भरे हुए है। अब मैने तोलीअ और उनके गले पर रख दिआ और पोछने लगा। आंटी ने मुझे डाटते हुए अपनी हाथ ब्रा से हटाए और तोलिआ लेते  हुए खुद पोछने लगी। 

आंटी की ब्रा निचे गिर गयी थी और उनके बूब्स मेरे सामने थे। मेरा लंड बहुत ही टाइट हो गया था जिसे शायद आंटी ने भाप लिआ था। अब आंटी ने अपना पेट पोछते हुए अपनी कमर भी पोछ ली। कुछ समय बाद रेखा आंटी ने अपनी सलवार का नाडा खोला और मेरे सामने ही अपनी टाँगे पोछने लगी। अब आंटी मेरे सामने बस पैंटी में थी जो भीगी हुई थी। 

आंटी ने मुझे अब तोलीअ देते हुए कहा: शर्माओ मत और तुम भी अपने कपडे देदो में सूखा के तुम्हे लोटा दूंगी। आंटी की थोड़ी जिद्द के बाद मेने भी अपने कपडे उतारे और बदन पोछने लगा। मै भी बाद अब अपने गीले कच्छे में खड़ा था। रेखा आंटी ने मुझे उसे भी उतरने को कहा। मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था। इतने में आंटी ने मुझे कहा की मुझसे शर्माओ मत में भी तुम्हरी माँ जैसी हु और अपने सरे कपडे मुझे देदो। ऐसे कहते हुए रेखा आंटी ने भी अपनी पैंटी उतार दी और उसे कोने में फेक दिआ। अब आंटी पूरी नंगी हो चुकी थी और मेरे लोढ़ा बुरी तरह अकड़ में आ गया था। अब आंटी ने मुझसे भी मेरा कच्छा भी माँगा और मैने जैसे ही अपना कच्छा उतारा मेरा लम्बा लंड भी आंटी को सलामी देने लगा। 

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आंटी को चोदा घोड़ी बनाके 

मेरा लम्बा लंड देख रेखा आंटी के हाथो से सरे कपडे निचे गिर गए। मै भी अब अपने दोनों हाथो से अपना लंड छुपा रहा था ,इतने में आंटी मेरे पास आयी और बोली की तुम तो बहुत ही बड़े हो गए हो। आंटी की कामवासना उनकी आँखों में पूरी तरह दिख रही थी। ऐसा कहने के बाद आंटी ने मेरा लोडा अपने हाथो में लिआ और जोर जोर से हिलना शुरू कर दिए। आंटी ने मेरे होठो पर होठ रखते हुए उन्हें चूसे जा रही थी और मेरे बदन पर हाथ फेर रही थी। 

मैने भी अब आंटी के बूब्स पर हाथ बढ़ते हुए उन्हें दबाना शुरू कर दिआ। पूरा कमरा हम दोनों की हवस से गरम हो गया था और हम दोनों नंगे एक दूसरे को चाटे जा रहे थे। आंटी ने बैठते हुए अब मेरा लंड अपने मुह्ह में ले लिआ और चूसने लगी। मेरा हाल किसी पानी बिना मछली जैसा हो गया था और आंटी का सर पकड़ते हुए मेने अपना पूरा लंड आंटी के मुह्ह में उतारना चालू कर दिआ। आंटी भी मेरा लंड गपागप चूसे जा रही थी जिससे हम दोनों को ही मजा आ रहा था। 

 मैने अब रेखा आंटी को बिस्तर पर लिटा दिआ और उनकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिआ। साथ ही साथ मै उन्हें किस भी किये जा रहा था जिससे वह बहुत कामुक हो गयी थी।  अब मेने रेखा आंटी की चूत पर अपना लोडा रखा और घुसाना शुरू कर दिआ। आंटी को मेरा लंड लेते हुए मजा आ रहा था। मैने एकदम से अपना पूरा लंड आंटी की चूत में उतार दिआ जिससे आंटी की सास भर गयी। अब मैने आंटी की चुदाई जोरो से शुरू कर दी। आंटी और में दोनों आगे पीछे होते हुए चुदाई का मजा उठा रहे थे। 

रेखा आंटी की चीखे भी निकलने लगी थी और वह उईईईईई नाहीई ओह्ह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी। ऐसे ही थोड़ी देर की चुदाई के बाद मैने रेखा आंटी को घोड़ी बनने के लिए कहा। और आंटी के घोड़ी बनने के बाद मेने अपना लंड पीछे से उनकी चूत में घुसा डाला। अब मैने आंटी की छूट में अपना लंड तेजी से अंदर बहार करना शुरू कर दिआ। आंटी को इससे अभूत मजा आ रहा था और वह मुझसे चुदाई की मांग करे जा रही थी। 

में पूरी तरह पसीने से भीग चूका था और दूसरी तरह आंटी भी हवस से भरी हुई आहे अपने मुह्ह से निकाल रही थी। आंटी की चूत अब पूरी तरह पानी से लतपथ हो गयी थी और मेरा लंड भी अकड़ खाने लगा था। और कुछ 20 मिनट की और चुदाई के बाद मेरे लंड ने पानी छोर्ड दिआ। मैने झटके से अपना लंड रेखा आंटी से चूत से निकालके उनके मुह्ह में दे दिआ और भी मेरा सारा वीर्य पी गयी।

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