मेरी और दीदी की हवस की दास्तान

सभी मित्रों को मेरा नमस्कार, मेरा नाम दीपक है और आप सभी जान ही गए होंगे यह कहानी मेरी और मेरी बहन की हवस के बारे में होने वाली है । मेरी नाम सुप्रिया था जिसका शरीर दिखने में किसी आम लड़की जैसा ही था। सुप्रिया मुझ से 2 साल बड़ी थी जिसकी वजह से मैं उसे दीदी कहां करता था ।

यू तो मैं दीदी के बारे में बुरा नहीं सोचा करता था पर अब मेरी जवानी मुझ पर असर करने लगी थी। रातों में मेरा लंड करी बार खड़ा हो जाया करता था जिसे मुझे सुबह उठने में कई बार परेशानी होने लगी थी। अब मैं सुप्रिया दीदी को चोदने के बारे में सोचने लगा कई बार मैंने उन्हें अकेला बढ़ने का प्रयास भी किया पर मुझे कुछ हासिल नहीं हुआ।

दिन पे दिन मेरे जिस्म की आग बढ़ती जा रही थी और मुझे दीदी को चोदने के ख्याल दिन रात आने लगे थे। कई बार मैं दीदी को पीछे से पकड़ने के लिए उनके साथ कोई खेल खेला करता था जिसे मेरा लंड उनकी गांड पर छू जाया करता था । अब दीदी को मेरे इरादों के बारे में पता लगने लगा था 

दीदी भी मुझसे कई बार जानबूझकर लिपट जाया करती थी जिससे उनके बूब्स मेरी छाती पर धस जाया करते थे। शायद दीदी को भी मजा आने लगा था और वह मेरे साथ साथ अपनी हवस भी पूरी करने लगी थी। हम दोनों जब भी मौका मिलता था एक दूसरे से लिपटने के बहाने ढूंढा करते थे।

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घरवालों के बाहर जाने के बाद दीदी को अकेले दबोचा

यह किसका धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा था और मैं और दीदी अपनी अपनी हवस एक दूसरे को दिखाने लगे थे। अब हम एक दूसरे से मजाक भी करने लगे थे कई बार दीजिए जब चाय बना रहे हो जी जी मैं उन्हें पीछे से जाकर दबोच लिया करता था। पर अब दीदी ने मुझ पर गुस्सा करना बंद कर दिया था और मुझे पूरी आजादी देना शुरू हो गई थी। कई बार में दीदी की सलवार में अपना लंड भी फंसा दिया करता था जिसे शायद दीदी को भी मज़ा आने लगा था। ऐसे ही मुझे हवस का खेल खेलते हुए बहुत टाइम हो चुका था अब मुझे दीदी को किसी ना किसी तरह चोदने के लिए मनाना था।

अब आगे आते हुए मैंने दीदी से उनकी चूदाई के बारे में पूछा तो दीदी में मुझे जगह का हवाला देते हुए साफ मना कर दिया। यह बात सही भी थी कि हमारे घर में सिर्फ दो ही कमरे थे जिनमें दिन में मम्मी हमेशा रहा करती थी। अब 1 दिन की बात है जब मम्मी को अपनी किसी सहेली से मिलने के लिए बाहर उनके घर जाना था। मम्मी ने मुझ में और दीदी दोनों से साथ चलने के लिए कहा था कि हम दोनों में घर पर रहना ठीक समझा।

 अब यह मौका हमारे लिए एक सुनेहरा अवसर था। अब वह दिन आ गया और मम्मी अपनी सहेली से मिलने के लिए सुबह 11 बजे ही घर से निकल गयी। अब मै और दीदी दोनों घर पर अकेले थे और हम दोनों को ही अपनी हवस की आग बुझानी थी। मम्मी के जाते ही मैने दीदी को ढूँढना शुरू कर दिआ। 

मैने दीदी को कई बार आवाज लगायी पर दीदी ने कोई जवाब नहीं दिआ। अब मेने ऊपर वाले कमरे में जाकर देखा तो वह भी दीदी नहीं तह की तभी बाथरूम से दीदी नहाती हुई निकल। दीदी ने मम्मी की एक मैक्सी पेहेन राखी थी जिसमे वह और भी मादक दिख रही थी। दीदी का आधा शरीर अभी भी भीगा हुआ था जिसकी वजह से उनकी मैक्सी बदन से चिपकी जा रही थी। 

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दीदी और मेरे बिच हुआ जोरदार सेक्स 

अब दीदी मेरे पास आयी और मुझसे निचे का दरवाजा बंद करने के लिए कहा।  मै भागते हुए निचे गया और दरवाजे की कुण्डी मार दी। मेरे ऊपर आने के बाद मैने दीदी की तरह देखा और उनके पास जाते हुए उनको अपनी बहो में भर लिआ। दीदी पहले से ही बहुत गरम हो रखी थी और उनके जिस्म की गर्मी मुझे भी महसूस होने लगी थी। अब मैने दीदी को होठो पर चूमना शुरू कर दिआ और उनके बूब्स भी दबाने लगा। दीदी के होठ किसी गुलाब की तरह कोमल थे जिन्हे चूसते हुए मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। 

अब दीदी के मैक्सी मेने ऊपर करते हुए उतर दी। दीदी ने मैक्सी के निचे कुछ भी नहीं पहना था और वह मेरे सामने अब नंगी अवस्था में खड़ी थी। इससे मेरी हवस और जाग गयी और मेने दीदी के बूब्स चूमने शुरू कर दिए। दीदी के निप्पल खड़े हो गए थे जो की भूरे रंग के थे। मै उन्हें जोरो से चुस्त जा रहा था और दीदी मेरे सर पर अपने हाथ फिराए जा रही थी। अब मेने भी अपनी टीशर्ट उतार दी और फेक दी। अब मेने निचे होते हुए दीदी की चूत पर अपने होठ रख दिए। दीदी की चूत पूरी तरह से गीली हो रखी थी जिसमे से एक अजीब से सुगंध भी आ रही थी। 

अब मैने दीदी की चूत को चूसना शुरू कर दिआ और दीदी हवस में पूरी तरह से खो गयी। दीदी जोरो से अह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह ह्ह्ह्हह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी और में जोरो से उनकी चूत पर अपने होठो से जोर लगाए जा रहा था। दीदी की चूत पूरी तरह से खुल गयी थी और भीग चुकी थी। अब मैने अपना लोडा लेते हुए उससे दीदी की चूत पर रख दिआ और एक ही झटके में मेरा पूरा लंड चूत के अंदर चला गया। 

अब मैने दीदी की चूत चोदना शुरू कर दी। दीदी भी आगे पीछे होते हुए मुझे चुदाई में पूरा सहयोग दे रही थी और मेरे लंड से चुद रही थी। दीदी की चूत अभी तक किसी ने नहीं चोदी थी इसलिए वह बहुत ज्यादा टाइट थी। मै अपना लंड पूरी ताकत से दीदी की चूत में उतारे जा रहा था और दीदी जोर जोर से आहे भर रही थी। ऐसे ही हमर चुदाई का कार्यक्रम कई घंटो तक चला जिसमे मेने दीदी को 4-5 बार लगातार चोदा। दीदी की चूत की हालत भी खराब हो गयी थी और हम दोनों भी बहुत तक गए थे अब हमने अपने कपडे पहने और साथ में किस करते हुए टीवी देखने लगे। कुछ समय बाद ही मम्मी आ गयी और हमने दूसरा मौका देखना भी शुरू कर दिआ जिसमे हम अपनी हवस शांत कर सके। 

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