किस्सा मेरी हवसी गर्लफ्रेंड की चुदाई का

तो दोस्तों जैसा की आप जानते है हम रोज रोज नयी व हवस से भरपूर कहानिआ आपको प्रस्तुत करते रहते है। आज की कहानी कुछ ज्यादा ही रंगीन व् नंगी होने वाली है जो हमारे ही एक पाठक ने हमसे साझा करी है। 

हेलो दोस्तों मेरा नाम विवेक है और मै 24 वर्ष का एक छोटे से गांव का रहने वाला हु।  यह कहानी तब की है जब मै अपनी 12वी कक्षा की पढाई कर रहा था। मै शुरू से ही पढ़ाई में बहुत अच्छा था जिससे मुझसे सभी लोग हसकर बाते किया करते थे। मै भी सभी दोस्तों की मदद किआ करता था जिनमे लड़का व् लड़की दोनों थे।  हमारा स्कूल शुरू से ही सिर्फ लड़को के लिए जाना जाता था पर सरकार के नियम अनुसार अब लड़कीआ भी हमारे स्कूल में पढ़ने आने लगी थी। कोर्स पीछे हो जाने की वजह से सभी लड़किआ मुझसे मदद माँगा करती थी जिससे मुझे भी बहुत अच्छा लगता था। मेरी सभी लड़कीओ से अछि दोस्ती हो गयी थी और कुछ मेरी ख़ास दोस्त भी बन गयी थी। 

स्कूल में मुझे एक लड़की बहुत ही पसंद थी पर वह बहुत सुन्दर आकर्षक और काम बोलने वाली थी जिसका नाम अंकिता था। एक दिन की बात है वह मुझसे किसी प्रशन का हल जानने के लिए मेरे पास आयी। मैने प्यार से अंकिता तो वह प्रशन हल करके दे दिआ।  अब बाकि लड़कीओ की तरह अंकिता भी मुझसे बाते करने मेरे पास आने लगी थी जिससे हमारी काफी अछि दोस्ती भी हो गयी थी।  अब एक दिन मौका पाते हुए मैने अंकिता से उसके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछा जिसका उत्तर उसने ना में देते हुए गर्दन हिलायी। मैने बिना रुके उसी समय अंकिता को मेरी गर्लफ्रेंड बनने के लिए परपोज़ भी कर दिआ। अंकिता शरमाते हुए क्लास से बहार चली गयी और कुछ देर बाद हस्ते हुए अंदर आयो और मुझे हां कर दिआ। 

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अंकिता की किआ अपना पहला किस 

अब मेरी और अंकिता की कहानी शुरू हो गयी थी।  हम स्कूल में मिल कर बाते करते पढ़ते और खेलते भी थे। हमारा एक दूसरे के घरो पर आना जाना भी बढ़ गया था। और हर जोड़े की तरह हम भी साथ में घुमना शुरू कर दिआ था।  पर अब गर्लफ्रेंड होने के बाद मेरी हवास भी उठने लगी थी। मै चाहकर भी अंकिता को अपने करीब नहीं ला पा रहा था क्युकी वो बहुत शर्मीली और चुप रहने वाली लड़की थी।  पर एक दिन हिम्मत करते हुए मैने अंकिता को अपनी दिल की बात बोलते हुए किस करने की इच्छा जताई। थोड़ा सोचने के बाद अंकिता ने हां भरी और शाम को मुझे उसके घर आने को कहा।  

शाम को अंकिता के घर जाकर मैने देखा की उसके घर में कोई भी नहीं था।  मेरे पूछने पर अंकिता ने बताया की सभी लोग गांव गए है और 5 दिन बाद वापस आएंगे। 

अब मुझमे और हिम्मत आ गयी थी। मै और अंकिता बिस्तर पर बैठे हुए थे।  मेने अंकिता के पास जाते हुए उसकी तरफ देखा और बिस्तर पर लिटाते हुए मैने उसे किस करना शुरू कर दिआ।  अंकिता भी मुझे जवाब देते हुए मेरे होठो का भरपूर रसपान कर रही थी। हम दोनों ने 15 मिनट किस करने के बाद अपनी आंखे खोली और एक दूसरे को प्यार से देखा।  और दुबारा एक दूसरे के होठ चूसने शुरू कर दिए। ऐसे ही उस दिन हमने दिल भरकर एक दूसरे को चूमा और अपने प्यार को एक नया रूप दिआ।  

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गर्लफ्रेंड अंकिता ने उठा उठा कर चुदवाई अपनी चूत।

अब रात को सोते समय मुझे बस अंकिता के ही ख्याल आ रहे थे। मुझे अंकिता की चुदाई करने का बहुत दिल कर रहा था।  अगले दिन स्कूल ख़तम होने के बाद मैने अंकिता वापस मिलने के लिए बोल दिआ और शाम के समय उसके घर पहुंच गया।  इस बार मै और मेरी गर्लफ्रेंड दोनों ही हवस की आग में झुलस रहे थे।  मैने अंकिता को अपने पास बुलाया और अपनी बाहो में भर लिआ और तेजी से चुम्बन देने लगा। अंकिता भी मेरे गले पर जोर से किस किये जा रही थी जिससे मेरा लंड खड़ा होने लगा था।  

अंकिता का सर पकड़ते हुए मैने उसके होठो को चूसना शुरू कर दिआ और हम एक दूसरे के होठ चूसने लगे। अब मेने बिना रुकते हुए अंकिता का एक बूब्स अपने एक हाथ से दबाना शुरू कर दिआ।  अंकिता अब पूरी तरह से गरम होने लगो थी और मेरे होठो को काटने व् जोर जोर से चूसने लगी थी।  मैने अंकिता को बिस्तर पर लिटाते हुए उसके सूट को उतारकर साइड में फेक दिआ और बूब्स में मुह्ह में लेते हुए चूसना चालू कर दिआ। अंकिता की साँसे अब  खड़ी होने लगी थी और वह  तेजी से सांसे लेने लगी थी।  थोड़ा निचे किस करते हुए मेने उसकी सलवार का नाडा खोलते हुए उसे सलवार से अलग कर दिआ। 

अंकिता की पैंटी ऊपर से पूरी तरह गीली हो चुकी थी जिसे मैने खिसकाते हुए चूत को चाटना शुरू कर दिआ।  अब अंकिता कामवासना में पूरी तरह पागल हो चुकी थी और मेरा सर दबाते हुए अपनी कोमल चूत में घुसा रही थी। अब थोड़ा थकते हुए मै बिस्तर पर लेट गया और अंकिता को अपने ऊपर कर लिआ।  अंकिता ने सीधा निचे जाते हुए मेरा लंड मेरे पजामे से आजाद किआ और किसी जानवर की तरह उसे चूसने लगी।  मै उसका ऐसा रूप देखकर बहुत चकित रह गया था।  अंकिता एक बहुत ही मासूम और भोली सी दिखने वाली लड़की थी जो मेरा लंड किसी लॉलीपोप की तरह चूसे जा रही थी। 

अब मेरा लंड पूरा अकार में आ गया था और बिना देर करते हुए मैने अंकिता को बिस्तर पर लिटा दिआ। अब चूत पर लंड रखते हुए मैने उसे रगड़ना शुरू कर दिआ जिससे अंकिता पागल होने लगी और मुझे उसकी चुदाई करने को कहने लगी। मैने भी एक जोर के धक्के से पूरा लंड अंकिता की चूत में घुसा दिए और उसकी चुदाई शुरू कर दी। मै अपनी पूरी ताकत से अंकिता की चुदाई कर रहा जिसका वह पूरा मजा उठा रही थी। 

15 मिनट की दमदार चुदाई के बाद मेरी सांसे फूल गयी ही और मेरी चुदाई भी धीमी हो गयी थी। अब अंकिता ने मुझे निचे लिटाते हुए ऊपर आयी और मेरा पूरा लंड अपनी चूत में समाकर उसपर बैठ गयी।  अब ऊपर निचे होते हुए अंकिता मेरे लंड पर अपनी चूत बुरी तरह पटक रही थी और अपनी चूत की चुदाई करवा रही थी। ऐसे ही घंटो की चुदाई के बाद मेरा लंड बुरी तरह अकड़ गया और पानी छोर्ड गया।  अंकिता की कामवासना भी अब शांत हो चुकी थी।  पर अब अंकिता के घरवालों को गावो से आने में 3 दिन और बाकी थे जिनमे हमें पलंगतोड़ चुदाई की और अपनी अपनी हवस शांत करि।  

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