बीवी की चुदाई की प्यास – 2

अभी मैं बैठा ये सब होते देख ही रहा था कि दरवाजे पर फिर से घंटी बजी। मेरा दिमाग गर्म हो ही गया था, सो जो भी दरवाजे पर होगा, उसको खरी खोटी सुनाऊंगा, ये सोच कर मैंने दरवाजा खोला। 

दरवाजे पर गुरबचन जी खड़े थे, वो दरवाजे को धक्का देते हुए जल्दी से अन्दर आए और बोले- शमशुद्दीन कहां है? मैं कुछ जवाब नहीं दे पाया, तो उन्होंने खींच कर मेरे गाल पर एक थप्पड़ लगा दिया। 

मुझे उनसे ऐसे व्यवहार की कतई उम्मीद नहीं थी। मैं गाल सहलाते हुए बोला- वो अन्दर अरुणिमा के साथ … इतना बोल कर मैं रुक गया और आगे नहीं बोला। गुरबचन जी बोले- तो ऐसा बोल न भड़वे कि अन्दर शमशुद्दीन तेरी रंडी बीवी को चोद रहा है। 

जब रंडी से शादी की है, तो भड़वा जितना बेशर्म भी बन जा न! वो कपड़े उतार कर मेरे सामने ही नंगे हो गए और अन्दर जाने लगे। थप्पड़ का दर्द अभी भी गाल पर हो रहा था तो मैं उनको मना ही नहीं कर सका। 

पांच मिनट बाद जब थोड़ी हिम्मत हुई तो मैंने बेडरूम में झांक कर देखा। अरुणिमा को शमशुद्दीन जी कुतिया बना कर पीछे से चोद रहे थे। वो उसकी चूत मार रहे थे या गांड, ये कहना मुश्किल था।

मरीज लड़की की चुदाई का मजा – 1

बीवी को चोदने आया दूसरा

 गुरबचन जी उसके चेहरे को पकड़ कर उसका मुँह चोद रहे थे। वो मुँह चोद रहे थे, ये इसलिए कह रहा क्योंकि वो लंड चूस नहीं रही थी बल्कि गुरबचन जी अपना लंड अन्दर धकेल रहे थे, जितना उनका मन हो रहा था। 

अरुणिमा को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी क्योंकि उनका लम्बा लंड उसके गले के अन्दर तक छू जा रहा था। मेरे रोकने से वो दोनों रुकने वाले तो थे नहीं, तो मैं बाहर आकर बैठ गया। 

अभी दो मिनट भी नहीं हुए थे कि मुझे औ औ … की आवाज आई और मैंने अन्दर जाकर देखा। अन्दर अरुणिमा ने गुरबचन जी के लंड पर उलटी कर दी थी और बाकी उलटी चादर पर फ़ैल गई थी। 

गुरबचन जी ने पहले मुझे देखा, फिर अरुणिमा का बाल पकड़ कर खींच कर कहा- साली रंडी! प्रेग्नेंट हो गई क्या? अरुणिमा मादक आवाज में कराहती हुई बोली- सर आपका लंड बहुत लम्बा है और गले में छू रहा था … तो उबकाई आ रही थी। 

गुरबचन जी मुझसे बोले- देख क्या रहा है भड़वे … साफ़ कर इधर, पूरा मूड ख़राब हो गया। मैंने धीरे धीरे करके उनके नीचे से चादर निकाली और उसको वाशिंग मशीन में डाल दिया।

मरीज लड़की की चुदाई का मजा – 2

बीवी पर चुदाई का अत्याचार

चादर धोने डालने के बाद मैंने एक छोटी बाल्टी में अरुणिमा को कुल्ला करवाया और गीले कपड़े से उसका मुँह और चेहरा पौंछा। इतना कुछ चल रहा था, लेकिन शमशुद्दीन जी रुके नहीं थे। 

अरुणिमा अभी भी कुतिया स्टाइल में ही थी और शमशुद्दीन जी मजे से उसे चोदने में जुटे थे। सामने क्या हो रहा है, उससे उन्हें मानो कोई मतलब ही नहीं था। इसके बाद अरुणिमा गुरबचन जी से बोली- अब आप मुझे चूसने दो, मैं अच्छे से चूस दूंगी। 

गुरबचन जी कुछ नहीं बोले और अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया। अरुणिमा लंड चूस ही रही थी कि शमशुद्दीन जी ने अपना लंड पूरा अन्दर डाला और उसकी चूत या शायद गांड में पूरा झड़ गए। 

शमशुद्दीन जी उठ कर बाथरूम चले गए और अरुणिमा अपनी कमर नीचे करके पूरी तन्मयता से गुरबचन जी का लंड चूसने लगी। लंड पर उसके जीभ और मुँह का जादू चलते ही उनका गुस्सा थोड़ा कम हुआ और वो आंखें बंद करके लंड चुसवाने का मजा लेने लगे। 

थोड़ी देर बाद गुरबचन जी बोले- बस कर रंडी … मैं समझ रहा हूँ, साली अपने मुँह में ही निकलवा देना चाहती है और सोच रही है कि गांड मराने से बच जाएगी। वो मुझे देख कर बोले- अबे भड़वे! क्रीम या तेल लेकर आ, मुझे इस रंडी की गांड मारनी है। 

मैंने ड्रेसिंग टेबल से क्रीम निकाल कर उनको दे दी और उन्होंने अरुणिमा को दे दी- चल लगा साली! अरुणिमा ने उनका लंड अपने मुँह से निकाला और लंड पर क्रीम लगाने लगी। जब क्रीम लग गई तो उसने खुद ही उनकी तरफ अपनी गांड पलटा दी।

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