होटल में बुझा दी बुआ की प्यास – 1

मैं राज शर्मा अपनी बुआ की चुदाई की एक सच्ची गांड मारी कहानी लेकर आया हूं। जैसा कि आप जानते हैं मैं अपनी विधवा बुआ को पहले भी बहुत बार चोद चुका हूं। आप ये भी बोल सकते हैं कि मेरी बुआ अब मेरी रखैल बन चुकी हैं। 

मेरा लंड चुदाई में काफी देर तक चलता है इसलिए बुआ को मेरे साथ चुदाई में काफी मजा आता है। साथ ही मैं एक बार में मानता नहीं हूँ। मैंने जब भी चुदाई की है, तब भी चुदने वाली को कम से कम चार बार से कम नहीं चोदा होगा। 

इस वजह से बुआ मेरे लंड से बड़ी खुश रहती हैं। दोस्तो, मैं गुड़गांव में रहता हूँ और मेरी विधवा बबली बुआ मानेसर में रहती हैं। जब से पापा ने मुझे उनकी मदद का बोला, तब से मैं उनको बराबर चोद रहा हूं और अब बुआ भी मेरे साथ इस रिश्ते में बहुत खुश हैं। 

एक बार मेरी छोटी बुआ, जिनकी शादी जयपुर के पास एक गांव में हुई थी, उनकी ससुराल में उनकी ननद की शादी का निमंत्रण आया था। चचेरी बहन होने के नाते छोटी बुआ ने बबली बुआ को भी शादी में बुलाया था। 

गुड़गांव से सीधी बस होने के कारण पिता जी ने मुझे ही जाने को बोल दिया और कहा कि बबली को भी ले जाना। वो चार रिश्तेदारों से मिलेगी तो उसे भी अच्छा लगेगा। मैंने कहा- ठीक है। फिर मैं अपने काम में लग गया। 

गांव में मिली हवस से भरी लड़की

बुआ को ले जाना ही पड़ा

शाम को फ्री होकर मैंने बुआ को फोन किया तो बुआ बोलीं- हां, छोटी का फोन आया था। मैं बोला- ठीक है, फिर मैं बस की टिकट बुक कर लूंगा। बच्चों की ऑनलाईन पढ़ाई के कारण उनको जाने में दिक्कत थी। बुआ बोलीं- राज तू चला जा, मैं अभी नहीं जा पाऊंगी। 

मैंने छोटी बुआ को फोन पर बता दिया तो उन्होंने बबली बुआ को लाइन में लेने को कहा। छोटी बुआ बोलने लगीं- मैं कुछ नहीं सुनूंगी जीजी, आपको आना ही होगा। मेरे मायके से कोई नहीं आएगा, तो सब मुझे ताने मारेंगे। 

फिर छोटी बुआ मुझसे बोलने लगीं- राज, जीजी को लाना तेरी जिम्मेदारी है। ये कह कर उन्होंने फोन काट दिया। मैंने बबली बुआ से कहा- एक रास्ता है … अगर आप अपनी सहेली रश्मि भाभी से बात करो तो काम बन सकता है। 

वो पहले भी तो बच्चों को सम्भाल चुकी हैं। आप उनसे बात करो और बोलो कि दो दिन की बात है, वो पक्का मान जाएंगी। दूसरे दिन वही हुआ, जिसकी मुझे उम्मीद थी। बबली बुआ का फोन आया कि राज मेरी सहेली रश्मि मान गई है। 

मैंने कहा- ठीक है, हमें 3 दिन बाद निकलना है। आप तैयारी रखना। तीसरे दिन हम दोनों दिन की बस से जयपुर के लिए निकल गए। रात को दस बजे हम जयपुर बस स्टैंड पर पहुंच गए।

हवसी लड़की और उसकी चुदाई की कहानी

बुआ खुश थी मेरी चुदाई के मजे से 

फिर हमने उस गांव के लिए बस का पता किया तो पता चला कि बस सुबह सात बजे मिलेगी। अब हम दोनों ने पास में एक होटल में रूम बुक किया और होटल के वेटर को खाना लाने का बोल दिया। 

मैंने बुआ से पूछा- कुछ ड्रिंक करोगी? बुआ ने हामी भर दी। मैं और बुआ पहले भी दारू लेते रहे हैं। मैंने एक हाफ भी मंगवा लिया। दिन भर के सफर से थककर दोनों फ्रेश हुए, जब तक खाना आ गया। 

हम दोनों ने हाफ खाली किया और खाना खा लिया। मैंने एक सिगरेट सुलगाई और और बिस्तर पर आ गया। तभी छोटी बुआ का फोन आ गया- राज कहां हो? मैंने झूठ कह दिया- बुआ बस में बैठ गया हूँ, सुबह 6 बजे जयपुर पहुंच जाऊंगा। 

बुआ बोलीं- जीजी भी आ रही हैं न! मैंने कहा- हां वो भी साथ में हैं। फोन कट गया। अब हम दोनों आराम कर रहे थे। बबली बुआ सिगरेट फूँकती हुई बोलीं- राज, जब मैं तेरे साथ होती हूं, तो ऐसा लगता है कि जमाने की सारी खुशियां मेरे पास हैं। 

मैंने भी बुआ को अपनी तरफ खींचते हुए कहा- हां मेरी बबली रानी, तुमने भी मेरी जिन्दगी में खुशियां भर दी हैं। हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। धीरे धीरे हम दोनों ने अपने अपने कपड़े उतार दिए और नंगे हो गए। 

दूधिया रोशनी में बुआ का गदराया बदन ऐसा लग रहा था जैसे कोई पोर्न मूवी की हीरोइन मेरे सामने बैठी हो। मैं बुआ की दोनों चूचियों को बारी बारी से चूसने लगा। 

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