छुपन छुपाई का खेल और चुदाई का कीड़ा – घपाघप का मजा जवानी में

हमारा इलाका शहर के एक छोटे से हिस्से में थे जहा लोगो का आना जाना बहुत ही काम था। हमारी गली में लगभग हम सब एक ही उम्र के बच्चे थे जो साथ में ही बड़े हुए थे। बचपन में हम सभी लोग छुपन छुपाई बहुत खेला करते थे जोकि अब सब बंद हो चूका था। 

आप भी शायद इस खेल से वाकिफ होंगे जिसमे सभी बच्चे छुप जाते है और एक बच्चा एक एक करके सभी लोगो को ढूंढता है। यह मेरा सबसे प्रिय खेल था जो अब कोई भी नहीं खेलता था। हमारी गली में कुछ लड़किआ भी थी जो की अब बहुत बड़ी हो गयी थी और हम लड़को से दोस्ती भी नहीं रखती थी। पर उन सभी में एक लड़की का नाम था कनिका। 

कनिका सभी लड़कीओ से अलग और खुले विचारो वाली लड़की थी। कनिका ज्यादातर टीशर्ट ही पहनती थी जिससे उसके बूब्स बहुत ही सुन्दर दीखते थे। उसके घरवालों के मन करने के बाद भी वह हम लड़को से बाते किआ करती थी और दोस्ती रखती थी। वही एक लड़की थी जो मुझे बचपन से जानती थी और अभी भी मेरी दोस्त थी। 

एक दिन की बात है में और कनिका गली में बैठे बाते कर रहे थे की तभी मेरे मुह्ह से खेलो की बात निकल गयी। और कब यह बात हम लोगो के बचपन तक पहुंच गयी मुझे पता भी ना चला। हम दोनों बचपन की यादो को याद करते हुए आंनद ले रहे थे। अब कुछ देर बाद हमारे प्रिय खेल छुपन छुपाई का जिक्र कनिका ने शुरू कर दिआ। 

यह सुनते ही मुझे थोड़ा बुरा सा लगने लगा क्युकी यह खेल मै कभी भी नहीं छोड़ना चाहता था पर बड़े होने के कारण अब हम सभी ऐसे खेल नहीं खेलते थे। कनिका भी मेरी ऐसी बाते सुनकर थोड़ी दुखी सी हो गयी और कुछ देर बाद कनिका ने मुझसे कहा की क्यू न हम सभी लोगो को बुलाकर वापस से यह खेल खेले। 

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छुपन छुपाई का खेल बना हवस का खेल 

कनिका की बात को मै इंकार न कर पाया और मेने कनिका की बात में हामी भी भर दी। अब हम दोनों ने सभी दोस्तों को गली में बुलाया और खेल खेलने की बात की। बहुत दिन के बाद सभी दोस्त इकठा हुए थे इसलिए किसी ने खेल के लिए मनाई नहीं की और सभी लोग राजी हो गए। 

सभी चीजे करने के बाद हममे से एक लड़के की ढूंढने की बारी आयी और अब हम सभी को छुपना था। पर अब हमारी गली में ज्यादातर घर का निर्माण हो चूका था इसलिए छुपने के लिए बहुत ही काम जगहे थी। अब बहुत देर के बाद मेने एक अछि छुपने की जगह ढूंढ ली पर जैसे ही मेने देखा तो कनिका भी मेरे पीछे पीछे छिपने के लिए आ गयी। 

वहा छुपने के लिए बहुत ही काम जगह बाकी थी पर हम दोनों कैसे भी वह छुप गए। अब वह लड़का सभी को ढूंढने के लिए आया। और जैसे ही वह हमारी जगह के बाहर आया, कनिका मुझसे पूरी तरह चिपक गयी और छुपने की कोशिश करने लगी। कनिका मुझसे पूरी तरह चिपकी हुई थी जिससे मेरा लंड खड़ा हो गया और कनिका की गांड पर लग रह था। 

कनिका को मेरा लंड महसूस भी हो रहा था और कुछ ही देर बाद वह लड़का बाकि लोगो को देखने के लिए आगे चला गया। पर कनिका अभी भी मेरे लंड से चुपकी हुई थी और हम दोनों को छुपने के बहाने एक दूसरे से मजे ले रहे थे। और तभी मेरे एक दोस्त ने उस लड़के को आउट कर दिआ और दुबारा ढूंढने के बारी उसी की आ गयी। 

मै और कनिका अभी भी उसी जगह पर छुपे हुए थे और यह बात किसी को पता भी नहीं थी। अब जैसे ही वह लड़का धीरे धीरे हमारे पास आया कनिका अपनी गांड मेरे लंड पर धसाये जा रही थी और मेरा लंड भी और तनाव में अत जा रहा था। मैने भी अब कनिका की कमर पर अपने दोनों हाथ रख दिए और उसे सँभालने लगा। 

कनिका ने मेरी इस हरकत का कोई विरोध नहीं किआ। पर अब वह लड़का शायद जान चूका था की हम दोनों अंदर छुपे है। वह हमें ढूंढता हुआ अँधेरे में थोड़ा अंदर आया और कनिका मुड़ती हुई मेरी बाहो में छुपने लगी। अँधेरा होने के कारण उस लड़के को कुछ भी ना दिखा और वह हमें अनदेखा करते हुए आगे चला गया। 

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कनिका की कर दी अँधेरे में ही चुदाई 

अब कनिका के बूब्स मुझे पूरे पूरे महसूस हो रहे थे और उसका मुह्ह ठीक मेरे चेहरे से कुछ ही दूर था। उस लड़के के जाने के बाद भी कनिका मुझसे चिपकी हुई थी जिसका मतलब मुझे अब समझ आ गया था। कनिका की साँसे भी गरम होने लगी थी जो मेरे गले पर कनिका छोड़े जा रही थी। 

अब जैसे ही कनिका ने मेरी तरह देखते हुए अपना चेहरा ऊपर किआ मेरे अपने हाथ उसकी पीठ पर रख दिए। कनिका थोड़ी सी मुस्कुरायी और मुझे देखने लगी। अब कनिका ने मेरे पास आते हुए मुझसे किस कर दिआ। मेने भी जवाब देते हए कनिका के होठो जो चुसना शुरू कर दिआ। 

अँधेरे में हम दोनों गले लगते हुए एक दूसरे को किस करे जा रहे थे और खेल अभी भी चल ही रहा था। अब मेने कनिका की गांड अपने दोनों हाथो से पकड़ी और दबाना शुरू कर दी। कनिका मुझे पूरी हवस से किस किये जा रही थी और मुझे कसकर बाहो में दबाये जा रही थी। 

अब मेने कनिका को उल्टा किआ और अपना लंड वापस उसके पजामे के ऊपर से सहलाना शुरू कर दिआ। अब मैने कनिका के गले चुम्बन देना शुरू कर दिआ और उसके दोनों चुचे अपने हाथो में लेता हुआ दबाने लगा। कनिका मेरी बाहो में पिघलती जा रही थी और पूरी तरह गरम भी हो गयी थी। 

अब मुझे एहसास हुआ की खेल भी ख़तम होने ही वाला था और हम दोनों भी काफी देर से गायब थे। इसलिए मेने झट से अपना लंड अपने पजामे से बहार निकालकर कनिका के हाथ में दे दिआ। कनिका मुझे किस करती हुई मेरे लंड को हिलाये जा रही थी जिससे मै भी बहुत कामुक होने लगा था। कनिका के पजामे में हाथ डालते हुए मेने उसकी चूत पर अपना हाथ फेरना शुरू कर दिआ। 

कनिका की चूत पर थोड़े बाल थे जिन्हे मेने नजरअंदाज कर दिआ और चूत को सहलाने लगा। कनिका की चूत पहले ही गीली हो  और अब मेने कनिका का पजामा भी निचे सरका दिआ। मैने कनिका को थोड़ा झुकाया और अपना लंड पीछे से उसकी चूत में उतार दिआ। पहले कनिका को थोड़ी दिक्कत हुई पर बाद में कनिका को चुदाई का तरीका समझ आ गया। 

कनिका की कमर पकड़ते हुए मेने उसकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिआ। कनिका भी कामवासना में खो चुकी थी और मुझसे चुदाई के पूरे मजे ले रही थी। मैने अपने धक्के तेज करते हुए कनिका की चूत  की बुरी हालत करना शुरू कर दिआ। कनिका अपना मुह्ह दबाते हुए आह आह जैसी आवाजे दबा रही थी। 

कनिका की चूत में मेरा लंड बहुत तेजी से फिसलता हुआ उसकी चुदाई कर रहा था। कनिका भी शायद अब झड़ने ही वाली थी की इतने में मेरे लंड ने पानी छोड़ना शुरू कर दिआ और मेने चुदाई की रफ़्तार और तेज कर दी। कनिका मुझे रोकने लगी पर मेने उसकी गांड पकड़ते हुए चूत की बुरी हालत कर दी और अगले ही पल मेरा सारा माल मेने निचे गिरा दिआ। 

कनिका पूरी पसीने से भीग गयी थी इसलिए मेने उसे दुबारा कुछ देर तक और किस किआ और उसकी चूत को रगड़ता रहा। हम दोनों उस दिन पूरी तरह कामवासना से तृप्त हो गए थे और खेल का मजा भी हमने भरपूर लिआ। 

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