चुदासी किरायेदारनी और किराया देने का तरीका – पैसे के बदले चूत

मेरा नाम मोहन है और हमारा मकान बहुत बड़ा था जिसमे कई किरायेदार भी रहते थे। उन्ही में से एक औरत का नाम रूपा था जिसका पति दारुबाज और हरामी था। उसका पति कभी भी किराया सही समय पर नहीं देता था और अपनी पत्नी को मरता भी रहता था। 

यह बात गर्मिओ के मौसम की है। पापा जमीन खरीदने के लिए गांव गए थे और मुझे इस महीने का किराया इकट्ठा करने की जिम्मेदारी भी देके गए थे। मैने सभी से किराया सही समय पर देने के लिए कह दिआ। 2 तारीख हो चुकी थी और अभी भी कई लोगो का किराया नहीं आया था जिनमे से रूपा भी एक थी। रूपा दौलत से तो गरीब थी पर उसका शरीर किसी भी आदमी को कामुक करने के लिए काफी था। 

अब 5 तारीख आ गयी और मैने सभी को किराया चुकाने के लिए कहा। रूपा वही कड़ी हुई थी जिसपे मेरी निगाहें गड़ी हुई थी। रूपा भी मुझे देखे जा रही थी और मेरी दोनों निगाहे रूपा की छाती पर अटक गयी थी। 

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रूपा ने नहीं दिआ किराया और अपना जिस्म किआ मेरे हवाले 

अब 10 तारीख हो गयी और मैने वापस से रूपा के पति से किराया माँगा। उस दिन वह दारू पीकर घर आया था जिससे मेरी उसकी लड़ाई हो गयी।  मैने उसे कमरा खाली करने के लिए कह दिआ। अगले दिन सुबह होने के बाद रूपा का पति मुझसे बात करने आया। 

मै बहुत गुस्से में बैठा था जिसे देखकर रूपा के पति ने मुझसे माफ़ी मांगी। रूपा भी वही खड़ी होकर आंखे निचे किये हुई थी। मैने रूपा के पति को 3 दिन की और मोहलत दे दी और किराया भरने के लिए कह दिआ। 

अब दो दिनों तक रूपा बहुत परेशान सी दिखती रही और तीसरे दिन उसका पति फिर से दारू पीकर आया जिससे मेने बात नहीं की। अब चौथा दिन आया और रूपा मुझसे बात करने के लिए निचे आयी। रूपा मुझसे पैसे ना होने की वजह से और मोहलत मांगने लगी। पर मेने उसे समझाया की उसका पति दारू पिता है जिसकी वजह से वह मेरा किराया नहीं दे पायेगी इसलिए वह मेरा कमरा खली कर दे। 

रूपा मुझसे भीख मांगने लगी और मुझे कहने लगी की अभी उसके पास मुझे देने के लिए कुछ भी नहीं है और वह पहले ही अपने सरे गहने बेच चुकी है।  रूपा से बाते करते हुए मेरा ध्यान उसके बूब्स पर ही था जो उसके ब्लाउज से बहार आने को हो रहे थे। 

रूपा ने शायद मेरा मन पढ़ लिआ और मुझसे कहने लगी की अभी उसके पास अपना जिस्म है जो वह किराये के रूप में दे सकती है। यह सुनकर मेरे मन में लालच आ गया और पर मैने रूपा को ऐसा करने के लिए मन कर दिआ। रूपा ने रोते हुए अपना पल्लू हटाया और बूब्स दिखते हुए  कहने लगी की यह लो अपन किराया और जो करना है कर लो। 

रूपा का रूप देखकर हुआ हवस से पागल और रूपा की फाड़ दी चूत 

रूपा को रोता देख मेने रूपा से पल्लू ठीक करने को कहा। अब रात हो चुकी थी और रूपा का पति अबतक घर नहीं आया था। मेरे मन में बस रूपा की चुदाई के ख्याल ही आये जा रहे थे। मैने ऊपर जाकर रूपा से कहा की अब 12 बज चुके है और अगर उसका पति नहीं आया तो मै अंदर से दरवाजा बंद कर लूंगा। 

रूपा ने मुझे कहा से शायद उसका पति कही दारू पाइक सो गया होगा और ऐ अब दरवाजा भी बंद कर लू। कुछ समय बाद मैने वापस रूपा के पास जाने की सोची। मैने रूपा का दरवाजा आराम से बजाय और अंदर आने की अनुमति मांगी। रूपा साड़ी में खड़ी थी और मै अंदर जाकर बैठ गया। 

मैने रूपा से किराये की बात करना शुरू की और कहा की अगर वह चाहे तो अपना किराया जैसे वह चाहती है चूका सकती है। रूपा मेरा इशारा समझ गयी थी और हामी भरते हुए मुझसे कहा की मै किराया आज ही ले लू। अब मैने अंदर से दरवाजा बंद कर किआ और कमरे की लाइट बंद कर दी। पर चाँद की रौशनी से कमरे में थोड़ा सा उजाला अभी भी था। 

मैने रूपा के होठो पे चुम्बन करना शुरू कर दिआ और बिस्तर पर लिटा दिआ। रूपा अपना पूरा जिस्म मुझे सौप चुकी थी आंखे बंद करके बस लेटी हुई थी। मै रूपा के होठो को तेजी से चूसा जा रहा था और मेने उसके ब्लाउज के बटन खोलकर उसे उतार दिआ। रूपा के बूब्स बहुत नुकीले थे जीने मेने मुह्ह में लेते हुए चूसना शुरू कर दिआ। 

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रूपा वासना से करहाने लगी और मेरे बालो में हाथ फेरने लगी। रूपा के बूब्स हस्ते हुए मे थोड़ा और निचे गया और उसकी साडी उतरना शुरू कर दिआ। अब रूपा मेरे सामने पूरी नंगी लेटी हूई थी। मैने भी अपने सरे कपडे उतर दिए और उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा। 

रूपा भी मुझे अपनी बाहो में लेती हुई कामवासना में खोती जा रही थी। अब मैने आप लंड रूपा के हाथ में दे दिआ और उसे चूसने को बोला। रूपा ने बिना कुछ कहते हुए मेरा लंड गप से मुह्ह में लिआ और चूसना शुरू कर दिआ। कुछ समय बाद मेरा लोडा पूरी तरह खड़ा हो गया। 

मैने रूपा को बिस्तर की किनारी पर लिटा दिआ और उसकी दोनों टंगे खोल दी। रूपा के चूत पर घने बाल थे जिन्हे मेने हाथ से साइड किआ और चूत के छेद पर अपना लंड रख दिआ। एक जोर के झटके के साथ मेने अपना लम्बा लंड रूपा की चूत में घुसा दिआ। 

रूपा की आँखों में आंसू भर आये थे पर वह दर्द सेहती हुई चुपचाप बिस्तर पर लेती रही। मैने अब चुदाई करते हुए धक्के लगाना शुरू कर दिए। रूपा का दर्द अब आनंद में बदल चूका था और वह आहे भरते हुए चुदाई का मजा ले रही थी। मै भी अपना मोटा लंड रूपा की चूत  में आर पार किये जा रहा था। 

कुछ देर बाद मै चुदाई करता हुआ थक गया और मुझे बहुत पसीने भी आने लगे थे। अब मेने रूपा की टाँगे अपने कंधो पर रख ली और अपना लंड उसकी चूत में उतार डाला। इस बार रूपा के मुह्ह से आअह्ह्ह्हह निकल गयी। मैने अपना पूरा लोडा रूपा की चूत में फसाया और चूत चोदना शुरू कर दिआ। रूपा अह्ह्ह अह्ह्ह करती हुई आहे हर रही थी और मै बस उसकी चूत फाड़ने में लगा हुआ था। 

रूपा की चूत पूरी तरह लाल हो गयी थी जिसमे मै अभी भी अपना लंड अंदर बाहर करने में लगा हुआ था। रूपा को किस करते हुए में उसकी चुदाई पुरे जोरो से कर रहा था की इतने में मेरा लोडा अकड़ने लगा और मैने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा दी और कुछ ही देर में मेरे लंड से वीर्य की एक तेज धार निकली जो मैने रूपा की चूत में ही छोड़ दी। 

उस रात मैने रूपा की चूत 3 बार मारी जिसमे मैने उसे कभी घोड़ी बनके और कभी गोदी में बिठाकर चोदा। यह किराये लेने का तरीका मुझे बहुत पसंद आया और उस दिन के बाद रूपा के पति ने मुझे किराया भी दे दिआ। पर अभी भी रूपा मुझे किराया चुकाने के लिए अपनी चूत चुदवाती और किराये की मोहलत बढ़वाती रहती है। 

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