कॉलेज की मस्ती और लाइब्रेरी में चुदाई

यह मेरा कॉलेज का आखरी साल था और मै और मेरे दोस्त इस समय तक कॉलेज में बहुत बदनाम हो गए थे। मेरे दोस्त हर दिन कुछ ना कुछ उलटे काम कर ही देते थे जिससे हमारा नाम कॉलेज में सबको पता चल गया था। 

पर अब कुछ महीनो बाद एग्जाम भी आ गए थे और मुझे इस साल फ़ैल होने का डर भी बहुत था। मेने अपने दोस्तों से लाइब्रेरी में जाके पढ़ने के लिए कहा।  पर वह सभी एक से एक हरामी थे और मेरे साथ पढ़ने के लिए मन कर दिआ। 

मेने भी गुस्से में अकेले ही लाइब्रेरी ज्वाइन कर ली और पढाई के लिए बुक्स लेके लाइब्रेरी जाना शुरू कर दिआ। लाइब्रेरी का पहला दिन था और मै अपनी बुक्स लेके एक कोने में बैठ गया की तभी अचानक लाइब्रेरी में चश्मे वाली लड़की आयी जो की दिखने में बहुत ही पढ़ाकू लग रही थी। 

चश्मा होने के बाद भी वह बहुत सुन्दर और आकर्षक  और उसके बूब्स देखने में भी बहुत मोठे और गांड उठी हुई थी। अब मेरा ध्यान पढ़ाई से हटकर उसकी तरफ ही चला गए था और मेरे दिल में बस अब उसकी चुदाई के ख्याल ही आ रहे थे। 

मेने उस लड़की को पटाने के लिए अब एक प्लान सोचा। मेने अपनी बुक लेते हुए एक प्रशन पर अपना हाथ रखा और उस लड़की के पास जाकर उससे उसका जवाब पूछा। पर यह चाल मुझ पर ही उलटी पड़ गयी और उसने मुझे 2 मिनट में ही जवाब दे दिआ। 

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लाइब्रेरी के कोने वाला रास्ता 

पर मुझे किसी भी तरह उस लड़की के बारे में सब जानना था। अब अगले दिन मै फिर से एक अजीब सा प्रशन लेके उस लड़की के पास गया और उससे मदद मांगी। इस बार वह मुझे जल्दी जवाब ना दे पायी और अपनी किताबो में जवाब ढूंढने लगी। 

अब मैने उससे धीरे धीरे बाते करना शुरू करि और उससे उस्का नाम पूछा।  पहले तो उस लड़की ने कुछ नहीं कहा पर बाद में उसने अपना नाम मुझे गीता बताया। उसका नाम उसकी तरह ही सुन्दर था और गीता से मेने उस दिन दोस्ती भी कर ली। 

अब धीरे धीरे मै और गीता साथ में ही पढ़ने लगे। वह मेरी बहुत मदद करती और मै पूरा दिन बस उसे देखत रहता। .ज्यादातर लाइब्रेरी खली ही रहती थी की क्युकी हमारी लाइब्रेरी बहुत बड़ी थी और सभी लोग बहुत दूर दूर भी बैठा करते थे। 

एक दिन मेने गीता से उसके बॉयफ्रैंड के बारे में पूछा और उसने मुझे बताया की उसका कोई भी बॉयफ्रेंड नहीं है क्युकी वह ज्यादातर किताबो से ही प्यार करती है। मै वह बात सुनकर बहुत खुश हुआ और मेने अब अपना दूसरा प्लान चलना शुरू कर दिआ। 

हमारी लाइब्रेरी बहुत बड़ी थी जिसमे हर तरीके की किताबे मौजूद थी और उनमे से एक मेरी पसंदीदा थी जिसका नाम था कामसूत्र। मेने अपने दोस्तों के साथ वह किताब कई बार लाइब्रेरी के कोनो में जाके पढ़ी भी थी। 

अब मेने एक दिन गीता से किसी दूसरी बुक के बारे में पूछा और गीता ने बताया की वह किताब उसके पास नहीं है। गीता ने काउंटर से उस दूसरी किताब के बारे में पता किआ और मुझे लेकर किताब ढूंढने चल पड़ी। 

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गीता को लाइब्रेरी के कोने में लेजाकर करि जोरदार चुदाई 

अब मुझे बहुत अच्छा  मौका मिल गया तह गीता के साथ अकेले रहने का। हमने वह किताब बहुत ढूंढी पर वह नहीं मिली। क्युकी मेने पहले ही वह किताब छुपाकर रख दी थी। अब मेने गीता को उस कोने में चलने को कहा जहा कामसूत्र वाली किताब रखी थी। 

अब जैसे ही मै वह पंहुचा मेने गीता को कामसूत्र किताब दिखाई पर उसने मुझे कहा की उसने वह पहले से ही पढ़ रखी है।  यह सुनते ही मै बहुत चौक गया और मेने गीता की तरफ देखा। गीता ने मुझे कहा की उसे इस किताब का एक एक पन्ना याद भी है। 

अब मेने गीता से 204 पेज नंबर के बारे में पूछा जिसपर चुदाई का एक अच्छा सा चित्र बना हुआ था। अब गीता ने मुझे सेक्स के फायदे बताना शुरू कर दिए और उसे यह सब बताने में मजा भी आ रहा था। कुछ ही देर बाद हम दोनों करीब आने लगे थे और गीता ने अपनी आंखे बंद ली। 

मेने अपना एक हाथ गीता के बूब्स पर रखा और उसके होठो पर किस करना शुरू कर दिआ। गीता भी कामुक हो गयी थी और मेरे होठो को चूसे जा रही थी। हम दोनों को ही पता था की लाइब्रेरी में कोई भी नहीं अत इसलिए हम एक दोनों में मस्त खोये हुए चुम्माचाटी कर रहे थे। 

मै भी गीता के बूब्स जोर जोर से दबा रहा था और मेने अपना हाथ अब उसकी टीशर्ट के अंदर डाल उसके बूब्स के निप्पल को रगड़ने लगा। गीता मेरे होठो से लेकर जीभ तक सब चूस रही थी और अब मेने गीता के गले पर भी चुम्बन लेना चालू कर दिआ। 

गीता पूरी तरह हवस से भर गयी थी और तभी उसने मेरा लंड पकड़ लिआ और कुछ ही देर बाद उसने मेरी पेंट की चैन खोल लंड हिलना शुरू कर दिआ। मै गीता को जितना सीधा समझ रहा था वह उतनी ही मेरे साथ हरकते कर रही थी और अब वह निचे बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी। 

मेने भी अब अपनी सारी शर्म छोड़ दी और उसकी पजामी में हाथ डाल सहलाने लगा। अब गीता ने मुझे उसकी चुदाई करने के लिए कहा। मेने भी उसकी पजामी निचे सरकायी और उसे झुका कर अपना लंड उसकी चूत में पेल दिआ। 

एक ही बार में गीता की चूत मेरा पूरा लंड अंदर ले गयी और मेने उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिआ। आगे पीछे होते हुए मै अपना लंड जोर जोर से गीता की चूत  में घुसाए जा रहा था और वह भी मेरे लंड से पूरा मजा ले रही थी। 

मेने गीता की कुछ देर तक चुदाई करि ही थी की इतने में मुझे मरे दोस्तों की आवाज आयी और मेने और गीता ने अपने अपने कपडे सही कर लिए। उस दिन मेरे दोस्त मेरे साथ पढ़ने आये थे जिनपर मुझ बहुत गुस्सा आया क्युकी मेरी और गीता की चुदाई पूरी भी नहीं हो पायी थी। 

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