लाइब्रेरी का प्यार और चुदाई का किस्सा

यह किस्सा हमारे पाठक ने हमारे साथ साझा किआ है जिसमे आपको एक अलग किस्म की गर्मी और हवस देखने को मिलेगी। आप भी हमें अपनी कहाणीआ भेज सकते है हमारी दी गयी ईमेल पर। जिससे आपके सेक्स के किस्से बाकि लोग भी पढ़ सके। 

मेरा नाम किशन है और यह मेरी प्रेमिका और मेरे प्यार का किस्सा है जिसमे हमने एक दूसरे के साथ बेशुमार सेक्स और प्यार किआ। बात उस समय की है जब मै सरकारी नौकरी के पेपर देने के लिए पढता था। मैने एक लाइब्रेरी भी जॉइन करी जिसमे बहुत तरह की किताबे थी जिन्हे मै पढ़ने वहा जाया करता था। एक दिन मै अपने टेबल पर बैठ कर एक किताब पढ़ रहा था की इतने में एक लड़की मेरे बगल में आकर बैठ गयी।

वह लड़की अपनी किताब पढ़ रही थी और उसकी जिस्म की खुशबु से मै उसकी तरह खींचा जा रहा था। काफी देर तक उसे देखने के बाद, वह तरफ मुड़ी और मुझे हेलो कहा। मै बहुत हड़बड़ा गया और उसे नमस्ते करने लगा। 

धीरे धीरे हमारी दोस्ती हो गयी और हम साथ में ही अपनी अपनी किताबे पढ़ने लगे। उसने मुझे अपना नाम प्रीति बताया। मै अब सभी को बता दू की प्रीति दिखने में बहुत ही सुन्दर थी और उसका बदन भी बहुत गठीला और भरा हुआ था। मैने प्रीति से उसका नंबर ले लिआ और हमारी बाते शुरू हो गयी। अब हम लाइब्रेरी में बस बाते करते रहते थे और मुझे प्रीति से अब प्यार भी होने लगा था। 

कुछ दिन इन्तजार करने के बाद मैने यह बात प्रीति को बता दी, शुरू में प्रीति थोड़ा शर्मायी पर बाद में उसने मेरा परपोज़ कबूल लिआ। मै अब प्रीति को नयी नयी जगह देखने अपनी बाइक पर घूमता रहता था। अब एक दिन की बात है, मेरा दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड के साथ सेक्स करके आया और  मुझे सुनाते हुए शेखी बघारने लगा। मैने भी उसे प्रीति का फोटो दिखते हुए बताया की में भी प्रीति के साथ कई बार सेक्स कर चूका हु। हालाकि मैने प्रीति को अभी तक चूमा भी नहीं था। 

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प्रीति को अपने घर बुलाया और प्रेमरस चखाया 

अब यह बात धीरे धीरे मुझे खटकने लगी और मै प्रीति के साथ सेक्स करने के लिए तड़पने लगा। अब मेरे प्यार की जगह हवस ने ले ली थी और मुझे बस प्रीति की चुदाई के ख्याल ही आ रहे थे। एक दिन मौका देखते हुए मैने प्रीति को अपने घर बुला लिआ। प्रीति ठीक समय पर घर भी आ गयी और मुझसे मिलकर वह खुश भी बहुत थी। पर शायद प्रीति को यह नहीं पता था की उससे यहाँ मेने उसकी चुदाई करने के लिए बुलाया था। 

काफी देर तक मै प्रीति से बाते करता रहा और प्रेम भरी बातो से उसका दिल जीतता रहा। कुछ देर होने के बाद मैंने अब प्रीति के गले पर शरारत भरी किस करना शुरू कर दी। और धीरे धीरे हमारा प्यार बढ़ने लगा। प्रीति अब मेरी बाहो में कही खो गयी और खुद को मेरे ऊपर छोर्ड दिआ। अब मैने प्रीति के होठो पर किस करना शुरू कर दिआ। प्रीति के होठ बहुत ही नरम थे जिन्हे चूसकर मुझे अलग सा स्वाद आ रहा था।

प्रीति भी अब कामवासना में खो चुकी थी और मुझे किस किये जा रही थी। मैने  अब प्रीति के टॉप को ऊपर करना शुरू किआ और ब्रा तक ले आया। ब्रा को ऊपर सरकाते हुए मेने प्रीति का एक बूब्स अपने हाथ में भर लिआ और दबाने लगा। 

प्रीति अब मुझे और जोरो से किस किये जा रही थी। अब मैने प्रीति का टॉप उतार दिआ और प्रीति को ऊपर से पूरा नंगा कर दिआ। प्रीति के निप्पल अभी भी बहुत छोटे छोटे और गुलाबी थे जिन्हे मेने चूसना शुरू कर दिआ। प्रीति अब पागल सी होने लगी थी और आहे भरने लगी। मैने उसे फिर से पूरे बदन और गले  पर चूसा और किस करता हुआ पेट पर पहुंच गया। अब मैने उसकी नाभि को चूमते हुए उसकी पेंट उतारना शुरू की। प्रीति ने मुझे रोकते हुए मेरे हाथ पकडे पर प्यार से मैने उसे बिस्तर पर वापस लिटाया और उसकी पेंट उतार दी। 

प्रीति की पैंटी लाल रंग की थी जिसके  निचे प्रीति की चूत गीली हो रखी थी। प्रीति की चूत पर थोड़े थोड़े बाल भी थे जिनको नजर अंदाज करते हुए मेने प्रीति की चूत को चूमना शुरू कर दिआ। प्रीति की चूत में एक अलग ही महक आ रही थी जो मुझे और भी कामुक कर रही थी। मै प्रीति की चूत पर अपनी जीभ फिराए जा रहा था और प्रीति पूरी तरह कामवासना से तड़प रही थी। 

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प्रीति की चूत की सील तोड़नी पड़ी 

कुछ देर तक प्रीति की चूत चाटने के बाद उसकी चूत पूरी तरह गीली हो चुकी थी और लंड लेने को तैयार थी। अब मैने अपनी पेंट से लोडा निकलते हुए उसे प्रीति की चूत पर रख दिआ। प्रीति अपनी आंखे बंद करके लेती हुई थी और मेने एक जोर के धक्के के साथ अपना लंड घुसना शुरू किआ। प्रीति जोर से चीख पड़ी और मुझे पीछे ढकेलने लगी।

प्रीति को बहुत दर्द हो रहा था कुकी उसका यह पहला सेक्स था। प्रीति की चूत से थोड़ा खून भी आ रहा था। अब प्रीति के थोड़ा शांत होने के बाद मैने उसे कुछ देर किस किआ और वापस से अपना लंड उसकी चूत में घुसाना चालू किआ। 

इस बार मेरा आधा लंड प्रीति की चूत में आराम से घुस गया और प्रीति को भी ज्यादा दर्द नहीं हुआ। शुरू में मैने धीरे धीरे धक्के लगाना शुरू किये और प्रीति की चूत चोदने लगा। कुछ समय बाद अब प्रीति भी चुदाई का आनंद लेने लगी थी और धीरे धीरे आहे भर रही थी। अब मैने चुदाई के धक्के तेज कर दिए और प्रीति को चोदने लगा। प्रीति अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह उईईई की आवाजे निकाल रही थी जिससे मुझे मजा आ रहा था। 

मै प्रीति के बूब्स चुस्त हुआ उसकी चूत में अपना लोडा  अंदर बाहर किये जा रहा था। प्रीति भी आंखे बंद करती हुई चुदाई का मजा उठा रही थी और अपनी तरह मुझे खींच रही थी। ऐसे ही आधे घंटे तक मैने प्रीति को चोदा उसे कामवासना का अनुभव कराया। कुछ समय बाद मेरा वीर्य भी निकलने लगा जो मेने प्रीति की चूत से निकालकर जमीन पर गिरा दिआ और हमने भी अपने कपडे पेहेन लिए। उस दिन के बाद मेरा और प्रीति का प्यार और भी बढ़ गया और मैने प्रीति की कई बार जोरदार चुदाई भी करि।

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