लवर ने दिआ बच्चा – 1

मैं एक मिडल क्लास फैमिली से हूँ और मेरे हज़्बेंड सरकारी बैंक में जॉब करते हैं। मैं भी होटल मैनेजमेंट से शिक्षित हूँ और एक होटल में रिसेप्शनिस्ट का जॉब करती हूँ। यह दोस्त Xxx कहानी एकदम सच है। 

जो मेरे ज़िंदगी की कामुक आहों और कराहों का एक हिस्सा है। मेरी शादी को 5 साल हो गए थे लेकिन मैं अब तक बच्चे से महरूम थी। किसी वजह से मुझे गर्भ ठहर ही नहीं पा रहा था। मेरी ससुराल नागपुर है। 

मैं और मेरे हज़्बेंड हैदराबाद में जॉब करते हैं। मैं अपने पति मीहांक से खुश नहीं थी। वो मेरे साथ सही से सेक्स नहीं कर पाते थे और मैं बिस्तर में अपने पति से असंतुष्ट थी। 

वो मेरे चरम पर आने से पहले ही झड़ जाते थे; फिर उनका लंड एकदम मरे हुए चूहे की तरह मुर्दा सा हो जाता था, सब मज़ा किरकिरा हो जाता था। मुझे अपनी चूत में एक मजबूत सरिया सा लंड चाहिए था जो मेरी चूत की लंबी चुदाई कर सके और मुझे पूर्ण संतुष्ट कर सके। 

चुदाई की समस्या के अलावा मुझे बच्चा नहीं हो रहा था तो मैंने और मीहांक ने एक फर्टिलिटी क्लिनिक में अपना टेस्ट करवाया। जांच से पता चला कि मीहांक को लंड खड़ा करने में और देर तक चुदाई करने में समस्या है। 

जिस वजह से उनका वीर्य मेरी चूत के रस से मिल नहीं पाता है और इसी वजह से गर्भ नहीं ठहर रहा है। उनके वीर्य में बच्चा पैदा करने वाले शुक्राणु भी बहुत कम हैं। इसका इलाज भी होने लगा पर नतीजा बेमतलब रहा। 

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बच्चा नहीं हो पा रहा था आसानी से

मैंने समझ लिया कि मुझे मीहांक के वीर्य से बच्चा नहीं ठहर सकता था। किसी वजह से मैंने मीहांक को क्लिनिक की फाइनल रिपोर्ट नहीं दिखाई। उसके बाद क्या हुआ, मैंने बच्चा कैसे पाया, वो सब मैं आज आपको बता रही हूँ। 

मेरे हज़्बेंड और ससुराल वाले मुझे इस बच्चा पैदा ना करने के कारण भला बुरा कहने लगे और मुझे ही कसूरवार ठहराने लगे। वो सब मुझे गालियां देते और कहते तू बांझ है, वगैरह वगैरह। 

इसी बीच मेरे हज़्बेंड की पोस्टिंग करीमनगर हो गयी जो हैदराबाद से 300 किलोमीटर की दूरी पर है। वो वहां शिफ्ट हो गए। अब वो हफ्ते में एक बार शनिवार शाम को आते और रविबार शाम को चले जाते। 

बाकी दिन मैं यहां अकेली रहती। यहां हमारा एक किराए का फ्लैट है। मेरे पति हैदराबाद वापस तबादले के लिए कोशिश कर रहे थे। दो साल बाद उन्हें अपना तबादला वापस हैदराबाद इसलिए मिला क्योंकि मैं हैदराबाद में निजी क्षेत्र में जॉब करती थी और मैं उनकी बीवी थी। 

हमारे होटल में स्टाफ में मैनेजर के पद पर शेख सुलेमान काम करते थे। उनकी भी लाइफ में बहुत समस्याएं थीं। उनकी वाइफ की बच्चेदानी में कोई दिक्कत थी और वो भी बच्चा पैदा करने में असक्षम थी। इसी वजह से सुलेमान अपनी बीवी से हमेशा नाखुश रहते थे। 

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बीवी के जाने के बाद मिलने लगा मौका 

एक ही जगह काम करने से और एक सी समस्या से जूझने के कारण मेरी और सुलेमान की नज़दीकियां बढ़ती गईं। फिर एक समय आया, जब हम दोनों अपनी सारे दुःखदर्द, सुख दुख एक दूसरे से साझा करने लगे। 

अपनी निजी जिन्दगी की हर छोटी बड़ी बात हमारी बातचीत का अहम हिस्सा होने लगी। हम दोनों एक अनजानी डोर में बंधते चले गए। हमारी दोस्ती मजबूत होती चली गयी। हम दोनों एक दूसरे के काफी करीब आते गए। 

हम दोनों ने इस रिश्ते की खबर को अभी तक दुनिया की नजरों से छुपाए रखा हुआ था। सुलेमान हर शाम को मेरे साथ होता, काफ़ी बातें होतीं। बस कुछ दिल में होतीं, पर जुबान पर आ जातीं। मगर असली बात सामने नहीं आ पा रही थी। 

दोनों के मन में कुछ न कुछ ऊहापोह की स्थिति थी। मगर अन्दर ही अन्दर हम दोनों के एक तड़प, एक चाहत थी जो हम दोनों की ज़रूरत बन चुकी थे। हम दोनों को ही लगने लगा था कि शायद हम एक दूसरे के लिए बने थे। 

कोई सबब नहीं बन पा रहा था जिससे हम दोनों के बीच बनी ये रुकावट खत्म हो सके। इसी बीच उसकी बीवी एक महीने के लिए अपने मायके गयी हुई थी। सुलेमान तब ज़्यादातर समय मेरे साथ गुजारने लगा था। 

हम दोनों अपने जॉब से फ्री होकर शॉपिंग करते, सिनेमा देखते, कभी रात का डिनर बाहर किसी रेस्तरां में करते। कभी कभी रात का खाना मेरे फ्लैट में ही होता। लेकिन रात में वो जब अपने फ्लैट में जाता, मैं तड़पती रह जाती।

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