माँ और बेटी दोनों मेरे लंड की दीवानी – 1 

मैं पटना का रहने वाला हूँ लेकिन आजकल रोज़ी रोटी के लिए कोलकाता में रहता हूँ। जब मैं यहाँ आया था तब इधर उधर छोटी मोटी नौकरी करता था। लेकिन फिर संयोग से मुझे एक सेठ के यहाँ खाना बनाने का काम मिल गया। 

तब से मैं सेठ के घर में खाना बनाने के काम में लगा हुआ हूँ। आप मुझे महराज़ भी कह सकते हैं। कोलकाता में खाना बनाने वाले को लोग महराज कहते हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि मुझे कोठी के पीछे दो कमरे का मकान भी रहने के लिए मिल गया।

मैं अकेला ही था इसलिए मजे से वहीं रहने लगा। मेरे सेठ का नाम है सेठ माणिक चंद। वह वास्तव में रहने वाले गुजरात के हैं पर पिछले दो पीढ़ी से यहाँ कोलकाता में रह रहे हैं। उनकी बीवी का नाम श्रीमती ललिता है और उनकी एक बेटी है जिसका नाम है वर्तिका। 

श्रीमती ललिता की उम्र लगभग 44 साल की है और उसकी बेटी की उम्र 21 साल। मैं सेठ को साहेब कहता हूँ और उनकी बीवी को मेम साहेब। मुझे मालूम हुआ की सेठ साहेब की उम्र 58 साल की है और ललिता मेम साहेब उसकी दूसरी बीवी है। 

मगर यह सच है कि वर्तिका उसकी अपनी बेटी है। ललिता मेम बहुत ही खूबसूरत, गोरी चिट्टी और लम्बे बालों वाली हैं। उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ तो बहुत ही सेक्सी और सुडौल हैं। मैं जब भी उसे देखता हूँ तो मेरी नज़रें उसकी चूचियों पर ही लगी रहतीं हैं और मेरा लण्ड बहन चोद कुलबुलाने लगता है। 

मकानमालकिन का जोश और चुदाई – 1

बेटी को देख कर लंड हो जाता तम्बू 

मेरा मन करता है कि मैं लण्ड उसकी चूचियों में घुसेड़ दूं। उसके बड़े बड़े चूतड़ और मस्तानी गांड़ तो मैं खूब मजे से देखा करता हूँ। उसकी खुली हुई बांहें और सुराहीदार गर्दन देख कर मेरी नीयत ख़राब होने लगती है। 

मैं खाना बनाने के सिलसिले में उससे दिन में कई बार बात करता हूँ। चाय और नाश्ता वगैरह बनाने के लिए भी मुझे उससे बात करनी पड़ती है। मैं धीरे धीरे ललिता मेम के नजदीक आने लगा। 

ललिता मेम के सहारे मैं आहिस्ते आहिस्ते उसकी बेटी वर्तिका से भी बेहिचक बातें करने लगा। वर्तिका भी एक मस्त जवान लड़की थी। उसको देख कर मेरा मन होता था की मैं अपना लण्ड उसके हाथ में रख दूं। 

मैं इन दोनों माँ बेटी को बड़े गौर से देखने लगा। उनको नहाते धोते आते जाते भी मजे से देखने लगा। कभी कभी मुझे कुछ मजेदार चीज दिख भी जाती थी तो मज़ा आ जाता था। मैं भी अपना जिस्म दिखाने में कोई कमी नहीं कर रहा था। 

अक्सर मैं नंगे बदन रहता था; नीचे चड्डी के ऊपर एक अंगौछा बांध लेता था। मेरा लण्ड चड्डी में फंसा भी रहता था और कुलबुलाने भी लगता था। मैं कभी कभी उनके आगे ही अपने लण्ड को चड्डी के नीचे घुसा लेता था। 

मैंने गौर किया कि वो दोनों माँ बेटी मेरे लण्ड की हरकतें बड़ी हसरत भरी निगाहों से देखती हैं। मेरी इससे हिम्मत बढ़ती गयी। मैंने ऐसा भी देखा कि माणिक साहेब कुछ ज्यादा टाइम ललिता मेम को नहीं दे पाते हैं। 

मकानमालकिन का जोश और चुदाई – 2 

लड़की की माँ की चूतड़ों पे लगाई बाम 

इतने दिनों में मैंने कभी दोनों को एक साथ बैठे हुए और बातें करते हुए नहीं देखा। हां यह बात जरूर थी कि मेम साहेब के पास पैसों की कमी नहीं थी। वे खूब शॉपिंग करतीं थीं और इधर उधर घूमती भी बहुत थीं। 

उनकी बेटी वर्तिका भी आज़ाद किस्म की लड़की थी और वह खूब जम कर आवारागर्दी करती थी। रात में देर से आती थी और अक्सर शराब पी कर आती थी। मैंने उसे सिगरेट पीते हुए भी कई बार देखा था। 

एक दिन साहेब ऑफिस चले गए और उसकी बेटी कॉलेज चली गई। मेम साहेब जब बाथरूम से नहा धोकर अपने पेटीकोट को अपनी चूचियों तक बाँध कर बाहर निकली तो उसके पैर घुटनों तक खुले हुए थे और बाल एकदम खुले हुए थे। 

वे गज़ब की सेक्सी दिख रही थी। उसके बड़े बड़े दूध देखकर मन हो रहा था कि लण्ड इन्हीं के बीच में घुसेड़ दूँ। मैं सोचने लगा कि काश ये पेटीकोट न होता तो आज मैं इस भोसड़ी वाली को नंगी जरूर देख लेता। 

वह आगे बढ़ी तो उसका पैर फिसल गया और वह गिर पड़ी। मैंने दौड़कर उसे फ़ौरन अपनी गोद में उठा लिया और पलंग पर लिटा दिया। वह बोली- भोलू मेरी कमर में चोट आ गई है। 

कमर में दर्द हो रहा है तुम ज़रा बाम लगा दो। मुझे मौक़ा मिल गया। वह पेट के बल लेट गईं और पेटीकोट ऊपर से ढीला कर दिया, बोली- तुम हाथ अंदर घुसेड़ कर आहिस्ते आहिस्ते बाम लगा दो। 

मैं वैसा ही करने लगा तो उसे मज़ा आने लगा। फिर उसने अपने बड़े बड़े चूतड़ भी खोल दिये, बोली- इन पर भी थोड़ी मालिश कर दो भोलू। मैं उसके मस्त चूतड़ों की मालिश धीरे धीरे दबा दबा कर करने लगा। 

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