बेटे ने करि मम्मी की चुदाई – 1

मेरी उम्र 26 साल है। आज जिस सेक्स कहानी को मैं यहां लिखने आया हूँ, उसकी वजह से मुझे बहुत बुरा लग रहा है। क्योंकि मेरे साथ जो भी हुआ, वो मैं जानबूझ कर भी नहीं सकता था। 

जी हां, मैंने अपनी मां के साथ सेक्स (संभोग) किया था। मैं पंजाब के रोपड़ जिला का निवासी हूँ। मेरे घर पर हम चार लोग रहते हैं। मेरी माँ, पापा, दादी और मैं! आज जो माँ बेटे की चुदाई हिंदी कहानी मैं सुनाने जा रहा हूँ, यह मेरे जवानी में कदम रखने के समय की बात है। 

उस समय मेरी उम्र 21 साल ही थी। हम बहुत गरीब थे, तो घर बहुत छोटा था। हमें एक साथ ही सोना पड़ता था। मेरे पापा कमरे में एक आड़ बनाए हुए थे और वो आड़ के उस तरफ सोते थे। मैं दूसरी तरफ सो जाता था। 

अपनी इस गरीबी पर लाज मुझे तब महसूस हुयी, जब मैं आधी रात को पेशाब करने उठा। मैंने पापा की तरफ की बत्ती को जला देखा। उस समय भी बहुत हो चुका था तो मैं भी अन्दर का सीन देख कर हैरान था और डर भी गया था कि पापा ने मुझे देख तो नहीं लिया। 

मगर कुछ हुआ नहीं था। पापा माँ सेक्स कर रहे थे। फिर मैं पेशाब करने चला गया। हालांकि मेरे दिमाग में ये बात खटक रही थी। मैंने इग्नोर करना ही ठीक समझा। पर जब मैं वापिस आया तो मेरी इच्छा हुयी कि मैं कमरे में फिर से देख लूं। 

मैंने फिर से वही किया। पर जैसे ही मैंने अन्दर देखा तो पापा मेरी माँ को हचक कर चोद रहे थे। उन्होंने मुझे नहीं देखा, पर मुझसे आड़ में लगा पर्दा थोड़ा खुला छूट गया। तभी माँ की चिल्लाने की आवाज़ आने लगी और मुझे सुनाई दे रही थी। 

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मुझे ये घटना हमेशा याद रहती है क्योंकि वो पहली बार था, जब मैंने अपने ही घर में ये देखा और सुना था। उस समय वो गलत तो लगा था, पर अब समझ आया कि ये सब ज़िंदगी का एक हिस्सा है। 

अब हर तीसरे चौथे दिन मुझे माँ की चुदाई की आवाजें सुनने को मिल जाता था। इस वाकिये के बाद मैंने अपनी माँ की फ़िगर नोटिस करनी शुरू कर दी। मेरी मां की उम्र वैसे तो 44 साल की हो गयी थी पर वो 33-34 जैसी ही दिखती थीं। 

वो हमेशा टाइट ब्रा पहनती थीं ताकि उनके चुचे टाइट रहें। उनकी लंबाई 5।3 फीट ही थी तो वो ज्यादा लंबी नहीं थीं। पर उनका चलना इतना मस्त था कि गांड को तो बस देखते ही रहने का मन होता था। 

फिर जब मेरी उम्र 22 साल हो गयी तो मैं एक दुकान में काम करने लगा था। अक्सर ही मुझे वहां से रात को घर आने में देरी हो जाती थी। गर्मियों का समय चल रहा था, तो माँ पापा जल्दी सो जाते थे, मैं आकर खुद ही खाना लेकर खा लेता था। 

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 माँ की चुदाई की यादे

उस समय भी मुझे अपने मन में चार साल पहले हुई माँ की चुदाई की आवाज, उनके कराहने की आवाज़ आती थी। वो आवाज अब तक मेरे कानों में गूँजती थी। उस दिन भी मुझे आवाज आई- उह आह … उह आह … आराम से करो … फुद्दी में डाल लो यार ,,, गांड में दर्द होता है। 

मेरे मम्मे न पिया करो यार … पहले ही बहुत बड़े हो गए हैं। मैं चुपचाप किचन में चला गया। फिर जब मैंने खुद को हल्का रखने के लिए ब्लू फिल्म और अन्तर्वासना का सहारा लिया तो उधर पर भी मां बहन की चुदाई वाली वीडियो और कहानियां पढ़ कर मेरा मन विचलित सा हो रहा था। 

पीछे से मुझे अपनी मां की चीखें सुनाई देने लगती थीं। इसी तरह से मेरी रातें गुजरने लगी थीं। फिर न चाहते हुए भी मेरा ध्यान गलत दिशा में जाने लगा था। हर रोज पूरा दिन तो दुकान में अच्छे से निकल जाता पर रात को माँ की चुदाई की चीखें मुझे मुठ मारने को विवश कर देती थीं। 

अब मैंने माँ पापा और अपने बीच में लगे परदे की जगह एक दरवाजा लगवा लिया था। इसे माँ पापा भी खुश हो गए थे। एक दिन जैसे ही मैं दुकान से आया तो माँ पापा का सेक्स देख कर मेरा मन भी हो गया। 

पर मुझे उस समय खाने की भूख भी थी तो मैं चुदाई देखना छोड़ कर रसोई में चला गया। जब मैं खाना खा रहा था तो मैंने रसोई में ही एक ब्लू फिल्म लगा ली और मैं बिना इयरफोन ही उसे देख रहा था। 

उस समय रसोई में कोई नहीं आता था पर उस दिन माँ आ गईं और माँ ने फोन से निकलती चुदाई की चीखें सुन लीं। उन्होंने मुझे देखा और फिर फोन की तरफ देखा। उनके इस इग्नोरेन्स को मैं समझ नहीं पाया और अब मै बहुत डर गया। 

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