मकान मालकिन की जवानी और मेरी हवस – चूत के साथ मारी गांड और लिआ चरमसुख

सभी दोस्तों को मेरा नमस्कार, तो जैसा की आप पढ़ सकते है यह कहानी मेरी मकान मालकिन की जवानी की है। तो चलिए  बिना समय खराब किये बिना यह किस्सा भी शुरु। 

 हम एक मिडिल क्लास परिवार के रहने वाले थे और हमारे पास अपना मकान नहीं था।  यह बात उस समय की है जब हम सभी लोग किराये के कमरे में रहते थे जिसका मकान मालिक एक बूढ़ा था।  अंकल की उम्र करीब 55 साल रही होगी और जल्दी बीवी का देहांत हो जाने के कारण उन्होंने दूसरी शादी भी कर ली थी।  हमारी मकान मालकिन अंकल से बहुत ही ज्यादा जवान सुन्दर और आकर्षक थी।  

आंटी को देखकर मै कई बार उन नाम की मुठ भी मारा करता था। आंटी का रंग सफ़ेद बाद बड़े और गांड एकदम उठी हुई थी जिसे हमारे मकान से सभी किरायेदार भी देखकर अपना मन बहलाया करते थे। मै रोज आंटी को चोदने के लिए नए नए प्लान बनाया करता था पर उनमे से एक भी कभी काम में नहीं आया। मै रोज सीढ़ियों पर बैठकर अंकल आंटी की लड़ाई की आवाजे सुनता रहता था की कैसे उल्टी बस अंकल के पैसो उनके साथ रह रही है 

आंटी ने बताया अपना दुःख और शुरू हुआ हवस का खेल 

अब एक दिन की बात है आंटी बहुत ही गुस्से में थी और मुझसे किराये के पैसे मांग रही थी। मै भी उनसे काफी देर तक बेहेस करता रहा।  ऐसे ही कुछ देर तक खड़े रहने के बाद आंटी ने मुझे चाय पिने के लिए पूछा और चाय बनाने चली गयी। कुछ समय बाद आंटी चाय लेकर आयी और हम दोनों उनके कमरे में बैठकर चाय पिने लगे।  

आंटी से मेने उनके पहले के बॉयफ्रेंड के बारे में पूछा।  और आंटी ने उदास होते हुए कहा की पहले की बात तो कुछ और थी और जब से यह शादी हुई है मेरी तो ख़ुशी खत्म ही होगई  है। अब आंटी ने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा और कहा की तुम्नसे कभी किसी लड़की को किस भी किआ है क्या। में यह बात सुनकर चौक गया था पर इस बात को ना बढ़ाते हुए मेने बात टाली और यही प्रश्न आंटी से वापस पूछ लिआ। 

आंटी ने फिर से दुखी हुए बोला। शादी के बाद को शारीरिक सुख मिलने की सम्भावना भी खत्म हो जाती है। मैने अब आंटी की तरफ देखा तो वह बहुत ही उदास हो गयी थी और रोने ही वाली थी। सोफे से उठते हुए मै आंटी के पास गया और उन्हें दिलासा देते हुए उनसे बाते करने लगा। इतने में आंटी मेरी तरफ मुड़ी और मुझसे बोली की मै तुम्हरा किराया माफ़ कर दूंगी बस तुम्हे मेरा एक काम करना होगा। 

मै भी पैसो के लालच में आते हुए  बिना कुछ सुने उनकी हां में हां भरते हुए मान गया। अब आंटी ने मुझसे बोला की तुम्हे मुझे शारीरिक सुख देना होगा वो भी महीने में दो बार। मै यह बात सुनकर बहुत ही चौका हुआ था और उनकी बात समझने की कोशिश कर रहा था।  आंटी मेरा हाथ पकड़ते हुए मुझे उनके साथ अंदर वाले कमरे में ले गयी और मुझे बिस्तर पर लेटने को कहा। 

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मकान मालकिन आंटी ने खुद चुदवाई अपनी चूत 

अब मेरे बिस्तर पर लेटते ही आंटी कुछ समय के लिए बहार गयी और सरे दरवाजे अंदर से बंद करके आ गयी।  मै अभी भी किसी संजान की तरह अपन मजबूरी में बिस्तर पर लेटा हुआ था।  अब आंटी ने अपने कपडे उतरना शुरू कर दिए।  पहले उन्होंने अपने सूट को ऊपर करते हुए उतारा और धीरे से अपनी ब्रा भी उतार दी। 

अब आंटी मेरे सामने अपनी दोनों बूब्स को हाथ में लेते हुए मेरी तरफ बढ़ी और मुझे अपनी बाहो में भरने लगी। आंटी की हवस उनकी आँखों में साफ़ दिख रही थी और वह मुझे अब किस करना शुरू कर चुकी थी। उनके किस करते ही मेरा भी लंड अब उफान मारने लगा था। मैने भी अब अपने होठो से उनकी किस का जवाब देना शुरू कर दिआ। आंटी अब मेरे कपडे भी ऊपर करते हुए निकाल चचुकी थी और में ऊपर से पूरा नंगा हो गया था 

आंटी की रोकते हुए मेने अब आंटी को निचे किआ और उनके बूब्स चूसना शुरू कर दिए। आंटी बुरी तरह से कामवासना में खो चुकी थी और लम्बी लम्बी सिसकिआ भी भरने लगी थी। अब आंटी के पूरे शरीर पर किस करते हुए मेने उनकी सलवार का नाडा खोलकर उनकी सलवार उतार दी। आंटी की पूरी पैंटी उनकी चूत के पानी से गीली हो चुकी थी।  उनकी चूत एकदम रसीली दिख रही थी और बिना ज्यादा सोचते हुए मेने आंटी की चूत को चेतना शुरू कर दिआ।  आंटी की चूत का स्वाद कुछ नमकीन पानी जैसा था पर मुझे अब मजा आने लगा था। 

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आंटी की चूत के साथ मारी गांड और लिए पैसे 

अब आंटी मेरा मुह्ह अपनी चूत में घुसाए जा रही थी और साथ में अपने बूब्स भी दबा रही थी। कुछ देर ऐसे ही चटाई करने के बाद मेने अपना लम्बा लंड निकालते हए सीधा आंटी की चूत के छेद पर रख दिआ। आंटी  मेरा लंड लेने के लिए बेताब हो चुकी थी और मुझे चुदाई करने के लिए जोश दे रही थी। अब मैने एक जोर के धक्के से अपना पूरा लंड आंटी की चूत में घुसा दिआ और चुदाई शुरू कर दी। अब आंटी ने कुछ ही देर ने तेज तेज आवाजे निकलना शुरू कर दी और हमारा पूरा कमरा अब चुदाई की आवाज से गूँज रहा था।  ऐसे ही मेने आंटी की चूत को कम से कम  25 मिनट तक चोदा और थक जाने के बाद अपना लंड आंटी को चूसने के लिए दे दिआ।  

अब मालकिन आंटी ने मुझे गांड में भी लंड घुसाने के लिए बोला और पैसे के लिए मेने वैसा ही किआ।  थोड़ा सा थूक आंटी की गांड पे लगाते हुए मेने अपना लंड घुसना शुरू किआ।  आंटी की गांड बहुत ही टाइट थी जिसको अंकल ने पहले शायद ही चोदा था।  थोड़ी दिक्कत होने के बाद मेने एक जोर का धक्का देते हुए पूरा लंड आंटी की गांड में घुसा डाला और गांड को छोड़ना शुरू कर दिआ।  

आंटी की गांड बहुत ही नरम और गोल थी जिसको दबाते हुए में मजे से आंटी की गांड की चुदाई करे जा रहा था। आंटी भी अपनी चुदाई करवाते हुए अपनी गांड निचे से उठा उठा कर मुझसे चुद रही थी।  और कुछ देर की चुदाई के बाद आंटी ने अपनी चूत को रगड़ना शुरू कर दिआ और उनकी चूत से सारा पानी बह गया। अपनी गांड से लंड निकलते हुए आंटी ने मेरा लंड बुरी तरह चूसा और मेरा सारा वीर्य पी गयी। 

कमरे से निकलते वक्त आंटी ने मुझे 500 रूपये दिए और कहा की मुझे ऐसे ही खुश रखोगे तो ऐसे ही तुम भी मालामाल कर दूंगी। उस दिन के बाद मेने अपनी मकान मालकिन को कई बार चोदा और पैसे भी लिए।  एक बार आंटी अपनी सहेलिआ भी चुदवाने के लिए लायी थी जिसका किस्सा आप दूसरी कहने में पढ़ सकते है।  अभी के लिए इतना ही और मिलते है अगले किस्से पर।  

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