मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 6

अब मेरा लौड़ा उनके मुंह में था और मेरा मुंह उनके भोसड़े में! अब वो मेरे लौड़े को आराम से चूस रही थी और मैं काले भोसड़े को सबड़ रहा था। अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा था, मैं वापस नीचे आया। 

अब मैंने उनकी टांगों को फैलाकर चौड़ा कर दिया। उनके काले भोसड़े में से पानी रिस रहा था। मैंने उनकी दोनों टांगों को अच्छी तरह से पकड़कर मेरे लौड़े को उनके गीले भोसड़े के खांचे में रख दिया। 

अब मैंने एक जोरदार धक्का दिया और एक ही झटके में मेरा लौड़ा शबनम जी के भोसड़े के सारे अस्थि पंजरों को हिलाता हुआ भोसड़े की जड़ तक घुस गया। वो एकदम से चीख पड़ी- आह … ओह … उईई … मर गई। 

उनकी आंखों में से आंसू छलक पड़े। तभी मैंने उनकी चीख को दबाते हुए मेरे प्यासे होंठों से उनके रसीले होंठों को बंद कर दिया। ऐसा करने से वो चेहरे को इधर उधर करते हुए दर्द से बिलखने लगी। 

मैं मेरे लौड़े को उनके गर्मा गर्म और गीले भोसड़े में पेलने लगा। आज मुझे पेलने के लिए एक और शानदार भोसड़ा मिला था। धीरे धीरे उनका दर्द कम होने लगा। तो मैंने मेरे होंठ हटा लिए। अब वो चुपचाप निढाल होकर धीरे धीरे सिसकारियां भर रही थी और मैं उनके भोसड़े को चोदे जा रहा था। 

हम दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे। शायद आज पहली बार शबनम जी इतने बड़े लंड से चुद रही थी। उन्होंने मुझे बांहों में कस लिया। हमारे बीच भोसड़े में लंड घुसने की फच्छ … फच्छ की आवाजें गूंज रही थीं। 

मेरा लौड़ा मामी के भोसड़े के पानी से पूरा गीला हो चुका था। अब मैंने उनके स्तनों को मुंह में दबा लिया और ज़ोर ज़ोर से मम्मों को भींचने लगा। कुछ पल के बाद मैं और ज़ोर ज़ोर से भोसड़े में शॉट लगाने लगा। 

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मामी की चुत ने छोड़ दिआ पानी

तभी शबनम जी के भोसड़े ने कामरस का फव्वारा छोड़ दिया। उनकी चूत मेरे धक्कों से अंदर से बिल्कुल लाल हो चुकी थी। मैं लगातार समधनजी को चोद रहा था और अब मेरा भी वीर्य निकलने वाला था। 

मैंने उनको कसकर पकड़ लिया। कुछ ही देर में मेरे लौड़े ने गर्मा गर्म लावा शबनम जी के भोसड़े में भर दिया। थोड़ी देर तक मैं उनके ऊपर ही पड़ा रहा। फिर मैं उठा तो मेरा लौड़ा अभी भी उनके भोसड़े के पानी में भीगा हुआ था और शबनम जी का भोसड़ा अभी भी मेरे लौड़े के रस से सराबोर था। 

उनकी काली घनी झांटों पर वीर्य लगा हुआ था। शबनम मुस्कुरा कर मुझे देख रही थी. मैं उनके नंगे जिस्म पर हाथ फिराए जा रहा था. थोड़ी देर आराम करने के बाद शबनम मामी बोली- रोहित जी … 

अब जल्दी से कपड़े पहनो और अब यहां से निकलते हैं। मैं- शबनम जी … अभी मेरा मन नहीं भरा है। आप बहुत गजब माल हो। पता नहीं फिर आपको चोदने का मौका कब मिलेगा? बस एक बार और शॉट लगाने दो। वो बोलीं अच्छा ठीक है, लगा लो। 

आज आपने मुझे भरपूर मज़ा दिया है। सच में आज जिंदगी में पहली बार किसी ने मुझे इस तरह चोदा है। उनके तैयार होने के बाद अब मैंने फिर से उनकी मजबूत टांगों को फैलाकर चौड़ा कर दिया और फिर उनके काले भोसड़े की फांकों को चौड़ा करके लौड़ा अंदर तक पेल दिया। 

वो एकबार फिर से तड़प उठीं। इस बार उनकी चीख नहीं निकली। थोड़ी देर की धक्कमपेल के बाद मेरे लौड़े ने फिर से उनके गर्मा गर्म भोसड़े में लावा भर दिया। कुछ देर बाद हम दोनों उठे। 

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चुत पे ही निकाल दिआ अपना वीर्य 

उनके बड़े बड़े बूब्स अभी भी मेरे सामने लटक रहे थे। मैंने एक बार फिर से स्तनों को ज़ोर से मसल दिया और मुंह में भरकर चूस लिया। शबनम जी- रोहित जी … अब तो छोड़ दो। अगर किसी दिन मौका मिला तो मैं आपको फुल मज़ा लेने का पूरा चांस दूंगी। 

मैं- ठीक है शबनम जी, मुझे उस दिन का इंतजार रहेगा। उन्होंने मेरी तरफ पीठ घुमाई और पीठ को साफ करने के लिए कहा। तब मैंने देखा कि उनकी पीठ पर खेत में चुदाई से सूखी मिट्टी की रगड़ के बहुत सारे निशान हो रहे थे और कुछ कुछ जगह सरसों के पौधों की खरोंचें भी आ रही थीं। 

मैंने उनकी गोरी पीठ को मेरी अंडरवियर से अच्छी तरह से साफ किया। अब मैंने उन्हें घुमाकर चड्डी और ब्लाउज पहना दिया। ब्लाउज के आधे हुक ही लग पाए। उन्होंने फिर पेटीकोट पहना और फिर साड़ी बांध ली। 

मैंने भी मेरी चड्डी पहन ली। तभी शबनम जी को न जाने क्या हुआ। मेरी चड्डी को उन्होंने नीचे खिसकाकर मेरे लौड़े को मुंह में भर लिया और चूसने लगी। थोड़ी देर तक उन्होंने मेरे लौड़े को अच्छी तरह से चूसा और थूक से पूरा गीला कर दिया। 

मुझे तो अब भी बहुत मजा आ रहा था और मैंने कई मिनट तक इसका आनंद लिया। फिर लंड को मुंह से निकाल कर वो बोली- आपने तो मेरी तबियत खुश कर दी। आपसे फिर से मिलने का मन करेगा। 

मैं बोला- कोई बात नहीं मामीजी, मेरा लौड़ा तो हमेशा आपकी चूत के लिए तैयार रहेगा। कुछ देर बाद मैंने पूरे कपड़े पहने। अब मैंने धीरे धीरे बाइक को घुमाकर सरसों के खेत में से बाहर निकाला। 

मैंने एक बार पीछे मुड़कर देखा तो वहां सरसों के बहुत सारे पौधे चूर-मूर होकर टूटे पड़े थे। वो इस बात का सबूत था कि यहां अभी-अभी ताबड़तोड़ चूत चुदाई का कार्यक्रम हुआ था। अब हम पूरे रास्ते मस्ती करते हुए शाम को घर पहुंच गए। मामीजी से मेरी अच्छी यारी हो गई।

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