मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 3 

अब मैं आपको मामीजी के शरीर की बनावट के बारे में बता देता हूं। वो लगभग 41- 42 साल की होंगी। उनक नाम शबनम (बदला हुआ नाम) है। मामीजी का एकदम गोरा चिकना बदन और होंठों पर गहरी लिपस्टिक लगी हुई थी। 

उनके ब़ड़े बड़े आम की तरह झूलते हुए बूब्स 34 साइज के थे जिनको गहरे हरे रंग की साड़ी ने ढक रखा था। मामीजी की 32 की कमर थी और उनके गोरे चिकने पेट पर भरपूर चर्बी चढ़ी हुई थी। 

मामी की  34 साइज की बड़ी उठी हुई गांड अब मुझे पागल करने लगी थी। अब मेरा लन्ड पैंट को फाड़कर बाहर आने के लिए गोते खाने लगा था। मैं निश्चय कर चुका था कि शबनम के भोसड़े में लंड ठोकना ही है। 

मैं प्लग को ठीक करने का नाटक करने लगा। कुछ ही देर में मैंने प्लग को खोलकर वापस लगा दिया। अब मैंने सोचा कि हमारे बीच इतनी गर्मा गर्म बातें तो हो ही चुकी हैं और मामीजी ने लंड को भी पकड़ लिया है तो अब क्यों न इनको लंड के दर्शन करवाए जाएं? 

तभी मैंने आस-पास देखा तो कोई नहीं था। अब मैंने मामीजी के पास ही खड़े होकर लंड को बाहर निकाला और पेशाब करने लग गया। मामीजी पीछे सरकने लगी। मैं पेशाब कर रहा था और मामी को नीचे ही नीचे देख रहा था। 

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मामी को दिआ अपना लंड हाथ में 

मेरा लंड तना हुआ था इसलिए पेशाब भी धीरे धीरे निकल रहा था। मामी ने एक बार तिरछी नजर से मेरे लंड को देखा और फिर अपना मुंह घुमा लिया। फिर मैंने भी नजर आगे कर ली। 

उसके बाद मैंने लंड को अंदर कर लिया और फिर चेन बंद करके बाइक स्टार्ट की। हम दोनों फिर से निकल पड़े। अब मेरे अंदर चुदाई की आग भभक चुकी थी। मैं किसी भी तरह अब लंड को शांत करना चाहता था और इसके लिए मैं कुछ भी करने को तैयार था। 

चलती हुई बाइक पर मैंने पैंट की चेन को खोला और फिर लंड को बाहर निकाल लिया। बीच रास्ते में जब भी कोई सामने से आता तो मैं उस पर शर्ट को ढक लेता था। फिर एक गड्ढे का बहाना लेकर मैंने जोर से ब्रेक दबाए और मामी एकदम से मेरी पीठ पर आकर लगी। 

उनका हाथ सीधा मेरे गर्म और कड़क लंड पर आ गया। मामी ने लंड को कुछ पल के लिए पकड़े रखा बल्कि भींचकर भी देखा। फिर उसने हाथ हटा लिया। तभी मैंने उनको चिढ़ाते हुए कहा- शबनम जी … खेत पास में ही है। मौके का फायदा उठा लीजिए। 

मामी ने कहा अभी तो मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं है। मैं इतनी आसानी से नहीं पिघलूंगी। मैं- शबनम जी, आप तो पट चुकी हो, अब कुछ छिपाओ मत! मामी- मैं आपसे तो किसी भी हालत में नहीं पटूंगी, कोशिश करके देख लो। 

मैंने कहा ठीक है, लाओ वो कपड़ों की पॉलीथिन मुझे दे दो। आपको बैठने में दिक्कत हो रही है। मामी ने चुपचाप पॉलीथिन मुझे पकड़ा दी और मैंने पॉलीथिन को बाइक की टंकी पर रख लिया। अब उनका दूसरा हाथ फ्री हो चुका था। 

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मामी हिलाने लगी मेरे लंड को 

तभी मैंने उनका हाथ आगे खींचा और हाथ में मेरा नंगा लंड पकड़ा दिया। उन्होंने हाथ वापस हटा लिया। मैंने फिर से उनका हाथ पकड़ कर लंड पर रखवा दिया। वो हाथ हटाने लगी तो मैंने मेरे एक हाथ से उनका हाथ पकड़कर लंड को पकड़ाए रखा। 

जब वो नाटक करने लगी तो मैंने कहा- ज्यादा हिलो डुलो मत समधन जी, नहीं तो दोनों ही बाइक से नीचे गिर जाएंगे। फिर उन्होंने लंड को पकड़े रखा। मैं बाइक चलाता रहा। मुझे मजा रहा था। 

उनका नर्म नर्म हाथ मेरे लंड पर था, मैं चाहता था कि वो भी कुछ करे। मैंने कहा- आप भी तो कुछ कला दिखाइये अपनी? वो बोली- कलाकार तो आप निकले, मुझे रास्ते में ही पटा लिया आपने! मैं बोला- कला दिखानी पड़ती है शबनम जी। तब जाकर चूत की फांकें मिलती हैं। 

अब आपकी अनुमति हो तो खेत देखकर बाइक रोक दूं? मामी- रोहित जी … सही जगह देखकर बाइक रोक लीजिए और इस शबनम को आपके इस गर्म लोहे का जलवा दिखा दीजिए। 

मैं- अब शर्माना छोड़िए और पूरा मज़ा लो शबनम जी! तभी सेक्सी मामी ने मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया। अब मामीजी के गद्देदार बोबे मुझे सुकून का अहसास करवा रहे थे। 

मैं आस-पास नजर मार रहा था कि कोई ऐसी जगह मिले जहां कोई रिस्क भी नहीं हो और सेक्सी मामी की हॉट चुदाई भी मस्त तरीके से हो जाए। तभी मैंने एक कच्चे रास्ते पर बाइक मोड़ दी। 

आगे चलकर एक सरसों का खेत दिखाई दिया जिसकी मेड़ रास्ते से सटी हुई थी और आसपास भी कोई नहीं था। मैंने सोचा कि यहीं पर सही रहेगा। मामी भी बोल पड़ी- हां, ये ठीक है, यहीं ले लो। 

मैं तुरंत बाइक को मेड़ पर आगे ले गया। अब मैंने शबनमजी को नीचे उतारा और फिर बाइक सरसों के अंदर खड़ी कर दी। अब मुझे शबनम जी के भोसड़े में से पानी निकालना था। मेरा लौड़ा पूरा तमतमाया हुआ था और अब खेत में मामीजी की चूत को बजाना और हम दोनों सरसों के खेत में अंदर घुस लिए।

मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 4

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