मकानमालकिन का जोश और चुदाई – 1

तब मेरी पढ़ाई हो चुकी थी और मैं नौकरी ढूँढ रहा था। मैंने एक प्राईवेट कम्पनी में सेल्स की जॉब कर ली। तभी मेरे मकान मालिक के लड़के की शादी तय गई तो मुझे रूम छोड़ना पड़ा। 

मैं रूम ढूँढ रहा था तो मेरे एक दोस्त ने एक रूम बताया। कमरा देखने गया मैं वहां तो एक लड़का मिला। उससे मेरी बात हुई। उसने कहा- रूम है और सेप्रट है। तब उसने रूम दिखाया और बात पक्की हो गयी। 

तभी उसकी मां आ भी गई और उनसे भी बात हुई। लड़के ने अपना नाम अमर बताया। उसने मेरे और मेरे परिवार के बारे में पूछा, फिर अपने परिवार के बारे में बताया। अमर ने बताया कि उसके पिता नहीं हैं; एक बहन है जिसकी शादी हो गई। 

अमर अहमदाबाद में जॉब करता है और अभी‌ छुट्टी लेकर आया है। उसकी मां अकेली रहती है। उसने कहा- तुम यहां रहोगे तो मेरी मां को भी कुछ सहारा मिल जाएगा। मैंने कहा- तुम चिन्ता मत करो। 

अब मैं आपको उसकी मां के बारे में बता दूं जो मेरी मकान मालकिन है। वो एक हल्के सांवले रंग की महिला, उम्र करीब 48 साल, कद करीब सवा 5 फुट, गदराया बदन, बूब्स 34″ के होंगे और गांड चौड़ी, लुभावना चेहरा था। 

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मकानमालकिन भी थी मोटा माल

उनका शरीर देख कर अच्छों अच्छों के लण्ड खड़े हो जाएं … खासकर उनके बूब्स देख कर! पर वो नेचर से कड़क थी। मेरे दिमाग में उनके बारे में कुछ भी नहीं था। पर मैंने देखा कि पड़ोस के कुछ लोग उन्हें बहुत घूरा करते थे और बात करने का बहाना ढूंढते थे। 

पर वो किसी को अपने पास फ़टकने भी नहीं देती थी। उनका सम्बन्ध मेरे साथ कैसे हुआ, मुझे समझ नहीं आया। इसे इत्तेफाक कहें या मेरी किस्मत जो मुझे मकान मालकिन का प्यार मिल गया। 

अब आगे कहानी पर बढ़ते हैं। करीब 2 महीने ही निकले थे मुझे उनके घर में रहते हुए … मुझे उनसे डर लगता था क्योंकि कभी कोई गलती होती तो वे मुझे डांट दिया करती जैसे लेट आने या कोई दोस्तों के ज्यादा देर तक रूम में रहने पर! उनसे मेरी कम ही बात होती थी। 

गर्मी के दिन थे। रात में मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और नंगे बदन ही सो गया। सब दरवाजे बन्द थे पर खिड़की खुली थी। सुबह सुबह मैं अपनी मामी की चूत को याद करके अपने लण्ड को मसल रहा था। 

लण्ड एकदम कड़क खड़ा था। फिर मैं उठा, पेशाब किया और फ्रेश हुआ और काम पर चला गया। उसी शाम सुनीता जी, हां शायद मैंने आपको उनका नाम नहीं बताया, उनका नाम सुनीता है, मुझे बुलाया और कहा- गोलू तुम्हें गर्मी बहुत लगती है क्या? 

मैंने कहा- जी! सुनीता- तुम अमर के कमरे का कूलर उठा लो! मैंने कहा- जी। मैंने कूलर उठाया और अपने कमरे में रख लिया। पर मैं रोज ही अन्डरवियर में सोया करता और कभी मामी तो कभी श्वेता आन्टी की चूत चुदाई को सोच कर लण्ड को सहलाया करता। 

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सुनीता की करि मसाज

कुछ दिन और बीते। एक दिन सुनीता ने कहा- गोलू, तुम खाना बनाते हो और मैं भी … अब मैं ही तुम्हारा खाना बना लिया करुंगी, तुम यहीं खा लिया करो। मैंने कहा- ठीक है … पर आप परेशान होंगी। तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- हम साथ में बनाएंगे। 

मुझे कुछ समझ में नहीं आया कि वे हंसी क्यों! हम साथ में खाना खाने लगे। अब हम घुल मिल गए थे तो बातें होने लगी और समय निकलता गया। एक रात करीब 10 बजे में अपने कमरे में लण्ड की तेल से मसाज कर रहा था। 

तभी मुझे खिड़की खटकने की आवाज सुनाई दी। तो मैंने अपना लण्ड छुपाया और खिड़की से देखा। वहां कोई नहीं था पर मुझे शक हुआ कि कोई था। फिर एक दिन सुनीता घर में गिर गई तो उनके पैर के पंजे में सूजन थी, पीठ और कमर में चोट के कारण दर्द था। 

मैंने जॉब पर से लौटा तो पाया कि वो पलंग पर लेटी हैं और कराह रही हैं। वहां उनके पास पड़ोस की एक आंटी बैठी हैं। मैं गया और पूछा तो उन्होंने सब बताया और रोने लगी। तो मैंने कहा- आप चिंता मत करो, हम डाक्टर पास चलते हैं। 

हम डॉक्टर के पास गए, उसने कुछ दवाई दी और एक तेल दिया और कहा- इससे पीठ, कमर और पैर की हल्के हाथ से मालिश करनी है। फिर हम घर आए। मैंने उन्हें बेड पर लेटाया वो आराम करने लगी। 

मैं रात को उनके पास गया और कहा- बताइए, मैं आप की मालिश कर दूं! तो उन्होंने मना कर दिया। पर मैंने तेल उठाया और पैर पर मालिश करने लगा। फिर कमर में करने को बोला तो उन्होंने मना कर दिया और मैं अपने कमरे में आ गया। 

अगले दिन भर उन्हें दर्द रहा। मैं रात को खाना खाने गया तो बोली- गोलू मेरी कमर और पीठ का दर्द नहीं ठीक हो रहा। तो मैं बोला- आप मालिश नहीं कराओगी तो कैसे ठीक होगा? वो बोली- किस से कराऊं … कोई नहीं मिला। मैं बोला- मैं कर दूंगा … पैर की करता हूं, कमर की भी कर दूंगा। 

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