यौवन का जोश और चुदाई के दिन – 2 

कुछ ही देर बाद मैं कामुकता से कहने लगी- आह मामा … अपनी भांजी की बुर को ऐसे चोदो कि ये फट जाए। मामा भी मस्ती से भांजी की बुर में ताबड़तोड़ लंड अन्दर बाहर करने लगा। कुछ देर बाद हम दोनों का पानी निकल गया। 

कुछ देर बाद मामा ने फिर से एक बार मेरी बुर में लंड डाल कर मुझे चोदा। हम दोनों का पूरा पानी निकल गया। मामा ने बोला- तू छोटी उम्र में चुदाई में मस्त निकली। मैंने कहा- मामा, तुमको कामवाली बाई को चोदते वक्त चोरी से देखकर तैयार हो गई थी और रात को तुम्हीं थे, ये भी मालूम था। 

मैंने भी सोचा कि बाहर किसी से चुदवाने से अच्छा है कि मामा ने ही चोदा, तो घर की बात घर में रहेगी। मामा हंस कर बोला- हां तू बड़ी समझदार है। फिर मैंने पूछा- मामा, मेरी बुर तुमको कैसे लगी? मामा- कुंवारी बुर को चोदने में मजा आता ही है। वो मजा मैंने ले लिया। 

अब मामा और भांजी की चुदाई का दौर चालू हो गया। मैंने कामवाली को भगा दिया। चुदाई के तीन महीने पूरे हो गए। मुझे माहवारी नहीं हो रही थी। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया। 

जब चौथे महीने भी मुझे माहवारी नहीं हुई तो मैंने इस बात को मामा से कहा। वह मुझे डॉक्टर के पास लेकर गया। डॉक्टर ने कहा- ये प्रेंगनेट है। चार महीने का गर्भ है। इस कारण बच्चा नहीं गिरा सकते। 

सात महीने होने के बाद मामा मुझे गांव के बाहर लेकर गए, एक खोली भाड़े से लेकर रहने लगे। जून में 9 वां महीना लगा। उसी महीने में 12 जून दिन मैंने बच्चे को जन्म दिया। वह लड़का था। मामा भांजी के प्यार की निशानी थी। 

मैंने दो महीने उसे अपना दूध पिलाया। मामा ने मुझे बहुत समझाया कि छोटी उम्र में तुझे बच्चा हुआ है। लोग हसेंगे, बदनाम करेंगे। मैं मान गई। मामा मेरा बच्चा किसी को देकर आ गए। 

मेहमानो ने दिखाए सुहाने दिन – 1 

बच्चा दे आयी किसी और को 

फिर हम दोनों घर वापस आ गए। हमारा भानजी मामा सेक्स फिर से चालू हो गया। मामा मेरे दूध पीने लगा था। मुझे भी मामा को अपना दूध पिलाने में मजा आता था। दो साल तक मामा ने मुझे खूब चोदा। 

फिर एक दिन बोले- मेरे जाने के बाद तेरा क्या होगा। मैं तेरी शादी कर देता हूँ। मैं तेरी शादी ऐसे आदमी से करा देता हूँ कि वो भी तुझे चोदता रहे और मैं भी। मैं मान गई। मामा ने मेरी शादी एक सिंधी से करा दी। 

उस सिन्धी का नाम दिनेश वासानी था। वो सिन्धी मेरे से 12 साल बड़ा था। सिन्धी पैसे वाला था अपने व्यापार में लगा रहता था। रात को वो मेरे ऊपर चढ़ता था। उसकी पहली बीवी उसे छोड़कर भाग गई थी। उसे भागे चार साल हुए थे। 

देखने में दिनेश अच्छा लगता था। शादी के दूसरी रात को उसने मुझे चोदा। उसका लंड साढ़े पांच इंच से कुछ ज्यादा का रहा होगा। मामा का लंड छह इंच का था। मामा से चुदने में बड़ा मजा आता था। 

दिनेश से वो मजा नहीं आया। एक महीना हो गया था। हमारी चुदाई चालू थी। एक दिन मामा आकर बोला- मैं एक महीने से प्यासा हूं। मेरी प्यास बुझा दो। मैं बोली- पहले नसबंदी करवा लो। अब मुझे तुमसे कोई बच्चा नहीं चाहिए। 

मैं मामा को साथ लेकर नसबंदी करावा कर ले आई। फिर मैंने उसे चूत चोदने दी। उस दिन मामा के मोटे लंड से चुदवा कर मुझे बड़ा मजा आया। मेरी पति दिनेश की इलेक्ट्रॉनिक की दुकान थी। वो रोज सुबह 10 बजे निकलता था। 

दोपहर 2 बजे खाना खाने के लिए घर आता था। फिर आराम करके 5 बजे जाकर रात को 9 बजे आता था। दुकान में दो नौकर भी थे। वो दिनेश की गैरहाजिरी में दुकान देखते थे। इस बीच में मामा मेरे पास आकर अपनी प्यास बुझाकर चला जाता था। 

शादी के तीन साल पूरे हो गए। मैं 23 साल की हो गई थी। तब वीडियो कैसेट का जमाना आ गया था। दिनेश ब्लू फिल्म की कैसेट लाने लगा। हम दोनों बैठकर देखते थे। जब गर्म हो जाते तो हमारा चुदाई का खेल चलने लगता था। 

मेहमानो ने दिखाए सुहाने दिन – 2

पति का जल्दी निकल जाता था पानी 

उसका पानी जल्दी निकल जाता, मैं प्यासी रह जाती। दिनेश के दो दोस्त थे। एक मराठी था उसका नाम रमेश था और एक का नाम जावेद था। वो दोनों पढ़े लिखे थे। उनकी नौकरी भी अच्छी थी। उन दोनों का घर में आना जाना बहुत था। 

दोनों घर के सदस्य जैसे थे। दिनेश हर दिन नई नई कैसेट मुझे दिखाता था। उसमें एक औरत के साथ दो या तीन मर्द चूत को चोदते थे। मैंने उससे पूछा- एक औरत को तीन आदमी कैसे चोद सकते हैं? वह बोला- तीन क्या … औरत तो पांच मर्द से भी चुदाई का मजा ले सकती है। 

मैं बोली- ये सब झूठ है। दो दो बार उसे चोदे, ये मुमकिन नहीं है। वो बोला- सब मुमकिन है। तुम एक काम करो। मैं- क्या? वो- तुम भी ये करके आजमा लो। मैं- ये तुम क्या बोल रहे हो … अपनी बीवी के बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हो? वो- मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। 

मुझे भी अपनी बीवी को दूसरों से चुदाई करते देखने में मजा आएगा। वो मेरी बीवी की चूत को कैसे चोदते हैं। मैं- आप पागल हो गए हैं क्या? वो- तेरी कसम, मुझे किसी और से तुझे चुदते देखना है। मैं- अब चुपचाप सो जाओ। 

हम दोनों सो गए। मगर मुझे अब नींद कहां आने वाली थी। मैं सोच रही थी कि दिनेश मुझे दूसरों से चुदवाना चाहता है या मेरी परीक्षा ले रहा है। पर वो मेरी कसम नहीं लेता। फिर मैंने सोचा कि दिनेश को थोड़ा पीछे पड़ने दो, फिर देखा जाएगा। 

सुबह उठते ही उसने मुझसे पूछा- क्या सोचा तुमने? मैंने- किस बारे में? वो- किसी और से चुदवाने के बारे में। मैंने कहा- मैंने कुछ भी नहीं सोचा, ये सब फालतू की बात है। मैं अपने काम करने में लग गई। वो दुकान चला गया। 

दोपहर का खाने के बाद उसने फिर से पूछा- क्या सोचा तुमने? ‘कुछ भी नहीं।’ ‘अरे सोचो जरा।’ मैं- तुम सीरीयस हो क्या? वो- हां। मैं- यानि मैं पत्नी से रंडी बन जाऊं ।। यही ना! वो- हां। मैं बोली- चलो सोचती हूँ, रात को बताती हूँ। 

रात को खाना खाने के बाद दिनेश ने पूछा- क्या सोचा तुमने? मैं बोली- इतनी जल्दी क्या है … कल परसों बताऊंगी। वो कुछ नहीं बोला, बस मुझे अपनी बांहों में लेकर मेरे मम्मों को दबाने लगा। मैं गर्म हो गई। 

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