मामा की बेटी को पूरी रात चोदा – 2

दस पन्द्रह मिनट बाद मैंने अपनी दूसरी उंगली भी अपनी बहन संगीता की गांड में डाल दी। अब मैं उसकी गांड में दोनों उंगलियों को घुमाने लगा। उसकी गांड का छेद काफी खुल गया था शायद उसे हल्का दर्द भी हो रहा था पर कुछ बोली नहीं। 

उसका मुँह दूसरी तरफ था इसलिए मैं धीरे से उसकी रजाई में घुस गया पर मैंने अपनी उंगलियां उसकी गांड से नहीं निकालीं। मैं अब तक उसकी गांड में अपनी उंगलियां जड़ तक पेल चुका था। अब मेरा मन अपनी तीसरी उंगली डालने को करने लगा तो मैंने तीसरी उंगली भी डाल दी। 

जैसे ही मैंने तीनों उंगलियां एक साथ गांड में घुसाईं तो वो आगे को खिसक गई। पर पलंग की उस साइड दीवार से चिपका था तो वो आगे नहीं हो पाई। मेरी तीनों उंगलियां अन्दर घुस गईं तो गांड का छेद पूरा खुल गया। उसने भी अपनी टांगों को खोल दिया था। 

ये देख कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और सलवार नीचे कर दी। संगीता कुछ खास हलचल नहीं कर रही थी। मैंने अपनी पैन्ट खोल कर लंड बाहर निकाल लिया, यह सब मैंने एक हाथ से किया। उसकी गांड से उंगलियां बाहर नहीं निकालीं थीं। 

अब मैंने जैसे ही गांड से उंगलियां निकालीं, झट से अपना लंड गांड के छेद पर रख दिया। गांड पहले से ही खुली थी तो लंड आराम से घुस गया। लंड की गर्मी पाकर संगीता ने गांड सिकोड़ ली जिससे लंड गांड में फिट हो गया। उसके मुँह से हल्की सी आह निकली और वो लंड खा गई। उसकी गांड की गर्मी से मेरा लंड भी पूरा टाइट हो गया। कुछ देर तक मैं गांड में लंड डाले लेटा रहा और अपनी एक उंगली चूत में घुसा दी। 

चुत में उंगली देखकर संगीता ने मुझे रोकना चाहा और मेरा हाथ पकड़ लिया। गांड में लंड घुसवाने की इतनी देर बाद उसने कोई हलचल की थी। मैंने अपना हाथ उसकी चूत से हटा लिया और उसके चेहरे पर फेरने लगा। उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। 

वो धीमी आवाज में आहें भर रही थी। मैंने उसके कान में कहा- तुमको कैसा लग रहा है? जब वो कुछ नहीं बोली तो मैं अपना लंड उसकी गांड में हल्के हल्के से हिलाने लगा। 

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गांड में घुसा दिआ पूरा लंड

अब उसने अपना मुँह हल्का मेरी तरफ किया और धीमी आवाज में बोली- भैया, अगर करना ही है, तो पहले अमन को देख लो, कहीं वो जाग ना जाए। भैया में नहीं चाहती कि इस सबके कारण हमारी बदनामी हो। 

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो, कुछ नहीं होगा। ये सुनकर संगीता चुप तो हो गई मगर वो फिर से कराहने लगी। वो कराहती रही और मैं उसकी गांड में लंड अन्दर बाहर करता रहा पर वो मुझे अपनी चूत को हाथ नहीं लगाने दे रही थी और बिना हिले ही अपनी गांड की चुदाई करवा रही थी। 

दस मिनट तक गांड चुदाई का मजा लेने के बाद अब मैं झड़ने के करीब था इसलिए मैं अपना हाथ उसकी चूत पर ले जाना चाहता था। पर उसने चूत को छूने तक नहीं दिया। मैंने अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया गांड पेलने लगा। 

जब मेरा वीर्य निकलने को हुआ तो मैं उससे चिपक गया और पूरा लंड गांड की जड़ में पेल दिया। फिर मैं तेज तेज झटके मारने लगा और उसकी गांड में झड़ गया। वीर्य की गर्मी से उसने गांड को और सिकोड़ लिया और उसकी गांड ने झटके लेकर लंड का सारा वीर्य निचोड़ लिया। 

झड़ने के बाद मैंने उसके कान में आई लव यू कहा, पर वह बस मीठी आह ले रही थी। मुझे अब नींद आ रही थी। मैं बिना लंड गांड से निकाले उससे चिपक कर सो गया। सुबह जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अमन मेरे बाजू में सो रही थी। 

मेरा लंड अब भी संगीता की गांड में था और पूरी तरह से तना हुआ था। मेरे हिलने से लंड में हलचल से संगीता जाग गई और मेरी तरफ गुस्से से देखने लगी। मैं उसे चुम्मी करने के लिए जैसे ही आगे हुआ, लंड उसकी गांड में पूरा अन्दर चला गया और किसी गुदगुदी चीज से टकरा गया। 

पति से बदले के लिए करवाई चुत चुदाई – 2

गांड में ही फसा रहा रात भर पूरा लंड 

मुझे समझते देर न लगी कि ये संगीता का मल है। मेरा लंड पूरा संगीता के मल से सन गया। संगीता भी समझ गई कि मेरा लंड उसकी गांड में उसके मल से लिपट गया है, इसलिए वह खड़ी नहीं हुई। 

मैंने उसके कान में कहा- लंड गांड से बाहर मत निकालना, बिस्तर खराब हो जाएगा। वो कराहती हुई बोली- अमन जाग जाएगी … इसे बाहर निकालो प्लीज़। मैंने कहा- पर तुम्हारे मल से बिस्तर खराब हो गया तो? वह शर्मा कर मुँह छिपाने लगी। 

मुझे लगा कहीं अमन ना जाग जाए इसलिए मैं संगीता को यूं ही अपनी गोद में उठाकर बाथरूम में ले गया और लंड को बाहर निकाल दिया। मेरा लंड मल से सना हुआ था। जिसे देख संगीता ने मुझे गुस्से से देखा और शर्माती हुई बोली- भाई तुम बहुत गंदे हो। 

मैं हंस दिया और कहा- तुम पहले भी अपनी गांड में लंड ले चुकी हो क्या? उसने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुरा दी। मैं खड़ा खड़ा उसे देखता रहा। मैंने फिर से पूछा तो उसने कहा- तुम पहले हो, मैं उधर कुछ डालती रहती थी। 

फिर वो मल साफ़ करके और अपने कपड़े ठीक करके अपने बिस्तर में जाकर लेट गई। मैंने भी अपना लौड़ा साफ किया और बिस्तर में जाकर लेट गया। उसने मेरी तरफ पीठ कर रखी थी तो मैंने उससे चिपक कर पूछा- क्या हुआ? वो कुछ नहीं बोली। मैं सीधा लेट गया। 

उसके बाद उसने मुझसे कम ही बात की। तब भी जितने दिन मेरे माता पिता नहीं आए, वो मेरे पास ही सोती और मैं रोज उसकी गांड में लंड डाल कर सोता। वो कुछ नहीं बोलती। बस रात को गांड में लंड डलवा लेती और चिपकी रहती। 

सारे दिन में मुझसे ज्यादा बात नहीं करती मगर रोज रात को मेरी तरफ गांड करके सो जाती। मैं उसकी गांड में लंड डाल देता और सुबह तक लंड गांड में रखता। वो भी रात को लंड गांड से बाहर नहीं निकलने देती, पर चूत को हाथ तक नहीं लगाने देती। फिर वो दोनों अपने घर चली गईं। 

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