यौवन का जोश और चुदाई के दिन – 1 

मैं जब कम उम्र की थी, तब मेरे मां बाप एक महामारी में गुजर गए थे। मेरे मामा ने ही मुझे पाला पोसा था। मेरी मामी हमेशा बीमार रहती थीं। मेरे मामा का हमारे घर में काम करने वाली कामवाली से जिस्मानी संबंध था। 

लड़कियों को जो माहवारी आती है, वो मेरी भी चालू हुई मेरे माँ बाप के गुजरने के कुछ माह बाद! इससे मैं घबरा गई। तो काम वाली बाई ने बाजू में ले जाकर मुझे समझाया कि हर औरत को यह होता है। अब तू बड़ी हो गई है। 

मैं समझ गयी कि मैं अब जवान होने लगी थी। उसी समय मेरी मामी गुजर गईं। घर का काफी काम अब मुझे करना पड़ता था। मुझे कामवाली और मामा जी की चुदाई जब तब देखने को मिल जाती थी जिससे मेरी बुर में आग भड़क जाती थी। 

मुझे मामा का लंड भाने लगा था, अब तक मेरे मन में भी मामा के लंड से चुदने की लालसा होने लगी थी। मेरे मामा खाट पर सोते थे, मैं नीचे सोती थी। मामा बहुत गुस्से वाला था, मैं उससे बहुत डरती थी। एक रात मैं नींद से जागी तो कोई मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे मम्मों को दबा रहा था। 

मैं घबरा गई और हाथ हटा कर सो गई। वो अंजान हाथ फिर से मेरे दूध दबाने लगा। अंधेरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, मैं फिर से हाथ हटाकर सो गई। मैंने समझ लिया था कि ये काम मेरे मामा का है मगर मेरी उससे बात करने में गांड फटती थी तो कैसे कहूँ, ये समझ ही नहीं आ रहा था। 

सुबह मैंने मामा को डरते डरते रात का किस्सा बताया। मामा बोला- तू बड़ी भाग्यवान है। वो अपनी जिन्दगी का रखवाला होगा। वो घर घर जाकर सबका भला करता है। तुझे भी वो ही करता है। उसे करने दे, नहीं तो वो तुम्हें बददुआ दे देगा। 

मैं घबराने का नाटक करती हुई बोली- वह कुछ करेगा तो नहीं ना! मामा बोला- जो करेगा, तेरा भला करेगा। मैं सब समझ कर चुप हो गई। दिन निकल गया, रात हो गई। आधी रात को मेरे मम्मों को दबाने से मैं जाग गई। 

मम्मों को दबाते दबाते मेरे ब्लाउज के बटन खोल कर मेरे मम्मों को आजाद कर दिया गया। मुझे मजा आने लगा था तो मैं चुपचाप लेटी रही। वो अंजान हाथ मेरे मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा। मुझे दर्द भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था। 

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मामा दबाने लगा मेरे बूब्स

ये सब मेरा मामा कर रहा था, ये मैंने समझ लिया था। फिर मामा मेरी पजामी का नाड़ा खोल कर मेरी बुर को अपने हाथ से सहलाने लगा। इससे मुझे और मजा आने लगा। फिर वो मेरी बुर में उंगली डाल कर अन्दर बाहर करने लगा। 

मुझे और ज्यादा मजा आने लगा, मेरी बुर में से पानी निकल गया। फिर मामा की आवाज आई- मैं तेरे मुँह में कुल्फी डाल रहा हूँ, इसे चूस लेना चूसने से जो निकलेगा, उसे प्रसाद समझ कर पी जाना। मैंने उसका लंड मुँह में आता महसूस किया। 

मैं लंड चूसने लगी। खट्टा सा स्वाद आ रहा था। मैं चूसती गई। लंड चूसने से जो रस निकला, वो मैं पी लिया। मामा ने पूछा- मजा आया? मैं हां कह दिया। ‘अब कल से तू ये सब अपने मामा से कराना, तुझे बहुत मजा मिलेगा। 

आज भी मैं तेरे मामा के ऊपर सवार होकर तेरे पास आया हूँ। कल से मैं उसी के ऊपर सवार रहूँगा। तू मना मत करना।’ मैंने हामी भर दी और मामा के ऊपर देवता आने की बात को मान ली। वो मेरा भला करने वाला था। 

ये आईडिया मुझे भी सही लगा। सुबह मैंने मामा से ये सब बोला कि मेरे साथ ये हुआ और उसने ये ये कहा। मामा बोला- हां ठीक है … अब से मैं जो बोलूंगा, तो तू वह कर लेगी न! मैंने हां बोल दिया। 

दोपहर का खाना खाने के बाद मामा ने मुझे अपने बाजू में बिठाया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से मेरे मम्मों को दबाने लगा। मैं कुछ नहीं बोली। मुझे मजा आ रहा था और अब मामा से कोई डर भी नहीं लग रहा था। 

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मामा ने बुर में दे दिआ अपना लंड 

मामा ने मेरे दूध दबाते हुए ही मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिए। उसने मेरे मम्मों को आजाद कर दिया और मम्मों को जोर जोर से दबाने लगा। मुझे दर्द भी आ रहा था और मजा भी आ रहा था। 

फिर मामा ने मेरी सलवार का नाड़ा खोलकर मुझे नंगी कर दिया, मेरे होंठों पर अपने होंठों को रखकर चूसने लगा। मैं जल्दी ही गर्म हो गई। मामा ने नंगे होकर मेरे मुँह में लंड को डाल दिया और चूसने को कहा। 

मैं मामा का लंड चूसने लगी। वो खड़ा हो गया और लंड चुसवाने लगा। फिर कुछ देर बाद मामा ने मेरी टांगों को फैला दिया। उसने मेरी बुर पर थूक लगा दिया। मामा मेरे ऊपर चढ़ गया। मुझे बड़ा मजा आ रहा था। 

मामा ने मेरी बुर पर लंड को घिसा और एक धक्का दे दिया। मामा के लंड का सुपारा मेरी बुर के अन्दर घुस गया। मैं दर्द से कलप उठी। मगर मामा ने होंठों से मेरी आवाज को दबाया हुआ था। मामा ने फिर से लंड बाहर निकालकर जोर से धक्का दे दिया। 

उनका आधा लंड मेरी बुर के अन्दर घुस गया। मैंने दर्द से चिल्लाने की कोशिश की मगर मामा ने अपने होंठों से मेरे होंठों को दबाया हुआ था। वो बोला- पहली बार में दर्द होता है, फिर मजा ही मजा आता है। 

कुछ देर तक मेरे दूध सहलाए तो मेरा दर्द कुछ कम हो गया। मामा ने लंड को फिर से बाहर निकाला और फिर जोर से धक्का दे दिया। इस बार मामा का पूरा लंड मेरी बुर में अन्दर घुस गया था। बड़ा दर्द हो रहा था। मामा लंड बुर में अन्दर बाहर करने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी मजा आने लगा, मैं अपनी गांड जोर जोर से उठाने लगी।

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