मम्मी की सहेली और चुदाई की पहेली – 4

मैं पीछे से उनकी गर्दन पर पागलों की तरह चूम चाट रहा था और वो मेरे हर चुम्मे पर सिसक रही थीं। उन्होंने कहा- निखिल अपनी आंटी को नंगी कर दे। ये सुनकर मैं पागल सा होने लगा। 

एक चालीस साल की अधेड़ उम्र की औरत से ऐसा कुछ सुनकर मेरा लंड फटने को होने लगा। मैंने उनकी टी-शर्ट और बाक्सर उतार दिए। अब पूनम आंटी पूरी की पूरी नंगी मेरे सामने मेरे बेड पर बैठी थीं। 

मैं भी उनके सामने बेड पर ही खड़ा हो गया। मेरा तना हुआ लंड मेरे शार्ट्स से दिख रहा था। आंटी अपने घुटनों पर बैठीं और धीरे से मेरे शार्ट्स और चड्डी उतारकर अलग कर दिया। अब मेरा लंड उनके चेहरे के सामने था। 

वो मुझे और मेरे लंड को नजरें उठाकर देख रही थीं। ‘कभी सोचा था बेटा तेरी आंटी तेरे बेड पर नंगी होकर तेरा लंड चूसेगी?’ ये कहकर गप्प से पूनम आंटी ने मेरा लंड मुँह में ले लिया और मस्त होकर आगे पीछे अन्दर बाहर करके लंड चूसने लगीं। 

मैं आनन्द के सागर में खोने लगा। उनके गालों की दीवारों पर बनती हुई मेरे लंड की आकृति बार बार मुझे उत्तेजित कर रही थी। वो मेरा लंड पूरे मज़े लेकर चूस और पी रही थीं। 

तभी मेरे मन में आया कि मुझे भी आंटी की बुर चाटनी चाहिए। मैंने कहा- आंटी, मैं लेट रहा हूं आप मेरे ऊपर आ जाओ। आप मेरी तरफ गांड करके बैठो और आप मुझे अपनी झांटों वाली बुर चाटने दो। 

ये सुनकर आंटी ने कहा- हम्म … मेरा बेटा अपनी आंटी के साथ 69 चाहता है। अब हम दोनों ही एक दूसरे को मज़े दे रहे थे। आंटी को मेरा आठ इंच का मोटा लंड चूसने में मज़ा आ रहा था और मुझे आंटी की महकती चूत चाटने में उनका कामरस मिल रहा था। 

लंड चूसते चूसते आंटी ने कहा- निखिल, अपनी आंटी की चूत कैसी लगी बेटा? ‘एकदम जवान चूत है आंटी, एकदम टाइट … जैसे किसी जवान लौंडिया की चुत हो।’ ‘तो चाट अपनी पूनम की चूत।’

पड़ोसन वाली आंटी ने दी गांड – 1

आंटी ने होठो पर रगड़ी चुत

ये बोलकर आंटी अपनी गांड घुमा घुमा कर मेरे होंठों पर अपनी चूत घिसने लगीं। उनकी चूत की कोमल फांकें मेरे होंठों पर बहुत मज़ा दे रही थीं। अब मेरा लंड पूरी तरह से तैयार था अपनी पूनम आंटी को चोदने के लिए। 

तभी आंटी बोलीं- बेटा अब रहा नहीं जाता, अब चोद दो अपनी पूनम आंटी को। ‘सच आंटी?’ ‘हां मेरे बेटे।’ आंटी के अन्दर की रंडी जाग चुकी थी। वो मेरा लंड के लिए बेड पर नागिन के जैसे तड़प रही थीं। 

मैंने आंटी से कहा- पूनम कुतिया बनोगी? ‘हां … कुतिया, घोड़ी जो कहो, वो बनेगी तेरी पूनम। बस अब तू अपने लंड की सैर करा दे मेरे लाल।’ ये कहकर आंटी अपनी गांड फैलाकर मेरे सामने घोड़ी बन गईं। 

मैं उनकी गांड का छेद चाटने लगा। पूनम आंटी मस्तियाने लगीं और बोलीं- ये मज़ा तो आज तक तेरे अंकल भी ना दे पाए। आह तू बहुत मज़े दे रहा है निखिल। तेरी आंटी आज से तेरी गुलाम हुई। 

जब मन करे, जितना मन करे, चोद लिया करना अपनी आंटी को! ‘सच आंटी।’ ‘हां मेरा बेटा।’ बस ये सुनकर मैंने एक ज़ोर के झटके के साथ अपना पूरा गर्म लंड पूनम आंटी की चूत में पेल दिया और बम्पर चुदाई चालू कर दी। 

अकेला घर पाकर पूनम आंटी खूब आवाजें करके अच्छे से चुदवा रही थीं। मैं उनको लगातार चोद रहा था। अपना पूरा लंड बाहर निकाल कर उनकी चूत को चोद रहा था। फिर मुझे उनकी गांड मारने का जी किया। 

मैंने अगले झटके में लंड को सुपारे सहित उनकी गांड में घुसेड़ दिया। अपनी गांड मरवाने से बेखबर आंटी दर्द से चीख उठीं- हाय रे … मेरी गांड फट गई। मगर मैं पूरा लंड अन्दर डाल कर ही माना और लंड अन्दर तक पेल कर रुक गया।

पड़ोसन वाली आंटी ने दी गांड – 2

जाते जाते भी आंटी को याद रही चुदाई 

मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी? ‘अरे मादरचोद … मैंने आज तक गांड नहीं मरवाई थी।’ उनके मुँह से गाली सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया और पूरे जोर से उनकी गांड मारने लगा। आंटी दर्द से कराह रही थीं और उनकी कमर और पैर कांप रहे थे। 

लेकिन दस बारह झटके खाने के बाद वो शान्ति से गांड मरवाने लगीं। फिर गांड हिला हिला कर धीरे धीरे मज़े भी लेने लगीं। अब उनकी मटकती गांड देखकर मैं भी अपने चरमोत्कर्ष पर आने लगा और तुरन्त मैंने अपना लंड आंटी की गांड से निकाल कर उनको सीधा लिटा दिया। 

फिर उनके ऊपर आकर लंड उनकी चूत में डालकर उनको हचक कर चोदने लगा। उन्होंने अपनी दोनों टांगें मेरी कमर पर जकड़ दीं और मैंने पूनम आंटी की चूत में अपना सारा वीर्य गिरा दिया। 

मैं आंटी से चिपक कर लेटा रहा। आंटी ने भी पैर और दोनों हाथों से मुझे जकड़ा हुआ था। थोड़ी देर बाद मैं उठा, उनकी चूत में अपने ही वीर्य से सना हुआ लंड निकाला। लंड अब लटका हुआ था लेकिन तभी आंटी ने मुझे रोका और लपक कर मेरा लंड मुँह में भर लिया। 

उन्होंने अच्छे से पूरा लंड चाट कर साफ कर दिया। उसके बाद मैंने कपड़े पहने और बाहर आ गया। मैंने देखा कि बारिश बन्द हो चुकी थी और कपड़े सूख चुके थे। कपड़े पहनकर आंटी तैयार हुईं, फिर हम दोनों ने लंच किया। 

फिर आंटी ने कहा- निखिल, मेरे लिए कैब बुला दे बेटा। पता नहीं क्या हुआ … मैंने उनके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और देर तक स्मूच करता रहा। अब आंटी जाने के लिए तैयार थीं। 

बाहर कैब इन्तज़ार कर‌ रही थी और पूनम आंटी मेरी बांहों में थीं। जाते जाते उन्होंने बोला- जब जरूरत हो याद कर लेना अपनी आंटी को! मुस्कुराती हुई वो निकल गयीं। इस बात को दो महीने हो गए हैं। अब आंटी दो महीने की गर्भवती भी हैं।