बेटे ने करि मम्मी की चुदाई – 2

उस समय कोई और होती तो मैं उसे हिंट समझ लेता और सेक्स करने की बात भी करता। पर अपनी माँ की तरफ मेरा ऐसा ध्यान नहीं गया। उल्टा मैं शर्म के मारे नजर चुराने लगा था। 

जैसे ही माँ रोटी गर्म करने आईं, तो मैंने अपने लौड़े को अपने कच्छे में एडजस्ट किया। फिर जैसे ही माँ पीछे मुड़ीं तो उनका कुर्ता चुचियों के पास गीला सा था, जिसका कारण मुझे पता था। 

पर मैं कुछ बोल भी नहीं सकता था। मुझे पता नहीं था कि माँ पापा की चुदाई आधी ही हुयी थी। थोड़ी देर में पापा भी रसोई में आ गए और माँ को बालों से पकड़ कमरे में खींच कर ले जा रहे थे। 

मैंने टोका- क्या हुआ है पापा, ऐसे क्यों खींच रहे हो? पापा बोले- तू चुप रह रंडी के बच्चे और सो जा। मैं डर गया था क्योंकि माँ पापा की लड़ाई होती नहीं थी पर शायद माँ ने सेक्स पूरा नहीं किया और उसी वजह से पापा गुस्सा थे। 

मैंने हिम्मत करके माँ को छुड़ा लिया। मगर मुझे माँ भी सेक्स के लिए खुश लग रही थीं … तो वो पापा के साथ जाने को तैयार हो गईं और चली भी गईं। फिर दस मिनट के बाद पापा ने माँ को बाहर भेज दिया और अन्दर से कुंडी लगा दी।

बेटे ने करि मम्मी की चुदाई – 1

पापा से कर ली मम्मी के लिए लड़ाई

जब माँ दरवाजा खोल कर बाहर आईं तो वो मुँह साफ कर रही थीं और बाहर आते ही उन्होंने कुल्ला किया। इससे ये बात तो स्पष्ट थी कि पापा ने माँ के मुँह में लंड डाला था, शायद माल (वीर्य) भी। 

माँ थोड़ी मायूस थीं। अब माँ मेरे कमरे की तरफ सोने आ गईं, तो मैं भी सोने चला गया। मैंने सोते हुए माँ से पूछा- पापा को क्या हुआ था आज? माँ ने कुछ नहीं कहा और अपनी पीठ मेरी तरफ घुमा कर सो गईं। 

मुझे अजीब तो लगा था, पर मैंने ज्यादा पूछा नहीं और मैं भी सो गया। आधी रात को मैंने महसूस किया कि मैं माँ के बहुत नजदीक सोया था और मेरा लौड़ा माँ के चूतड़ों से टच हो रहा था। मेरा लौड़ा आधा खड़ा हो चुका था। 

मैंने इसे गलत समझते हुए इग्नोर कर दिया और मैं दूसरी तरफ मुड़ कर सो गया। अबकी बार आधी रात में जब मेरे ऊपर से चादर हट गयी थी तो माँ उसे देने लगीं। जब वो चादर दे रही थीं, तो वो मेरे काफी नजदीक आ गई थीं।

मैडम की चुत को दी शांति – 2

माँ हो गयी चुदाई के लिए राजी 

कुछ समय बाद अचानक से मैं पलटा तो मेरा हाथ माँ के चुचों पर जा पड़ा और मुझे अलग ही महसूस होने लगा। बंद आंखों से मेरे दिमाग में एक सपना चल पड़ा, जिसमें मेरे साथ रंडी सोयी थी। 

मैंने नींद में उस रंडी को चोदने के लिए जैसे ही उसके चुचों को मसला तो मेरी माँ सिसकियां भरने लगीं। अब यहां जो मैं सपने में कर रहा था, वो मैं माँ के साथ असल में कर रहा था। 

फिर जैसे ही मैंने माँ की चुचियां दबाईं और ब्रा का हुक खोला, वैसे ही मेरी नींद खुल गयी। पर मुझे न जाने क्यों अच्छा लग रहा था तो मैं सोने का बहाना करने लगा था क्योंकि अब मैं उन्हें माँ नहीं, एक रंडी मान रहा था। 

कमाल की बात ये थी कि माँ भी मेरा साथ दे रही थीं। मैं आंखें बंद करके जो उनसे बोलता गया, वो करती गईं। वो मेरी ओर मुड़ गईं और मेरे हाथ को अपनी गांड पर फेरने लगीं। अब मैं हैरान था कि उन्होंने अपना पजामा कब खोल दिया। 

मैं समझ गया कि वो भी सेक्स करना चाहती हैं। फिर जब वो मेरी उंगली को अपनी चूत में डाल चुकी थीं तो मैंने आंखें खोल कर उनसे पूछा- आप ये क्या कर रही हो? उस समय वो थोड़ा सहम गईं। 

पर मैंने तभी उनके होंठों को चूम लिया और वो भी पूरी तरह मेरा साथ देने लगीं। आज बहुत सालों बाद मैं अपनी मां के चुचे चूसने वाला था, पर जैसे ही मैं चुचों की तरफ बढ़ा, वो मेरे लंड की तरफ चली गईं। 

माँ मेरा निक्कर नीचे करके मेरे टट्टे चूसने लगीं। जैसे ही माँ ने मेरा लौड़ा अपने मुँह में लिया, मेरे तो जैसे प्राण निकल गए। आगे पढ़िए अगले भाग में। ….. 

Leave a Comment