मोनिका आंटी की वासना का खेल 

बात कुछ यु शुरू हुई थी की हमारे इलाके में एक बहुत ही सुन्दर औरत थी जिसका नाम मोनिका था। अपने नाम की तरह ही वह दिखने में भी बहुत ही ज्यादा आकर्षिक थी 

आंटी को देख कर बहुत ही कम लोग उन्हें फिर से देखने से रह पाते थे। पर मुझे आंटी का एक ऐसा राज पता चला था जिसके बाद से आंटी मेरे काबू में आ गयी थी और उनकी सुंदरता और यौवन भी मेरे गुलाम बन गए थे। 

अब एक की बात है जब मै आंटी के घर के आगे से निकल रहा था की तभी मुझे किसी की आहे लेने की आवाज आना शुरू हो गयी। वैसे तो में आगे जाने ही वाला था की तभी  मुझे आंटी की आवाज आयी जिसमे वह बोल रही थी की कही कोई हमे देख ना ले। 

अब मुझे बाते सुनने में दिलचस्पी आने लग गयी और  मेने पूरी बात को जानना सही समझा। मेने अब आंटी के दरवाजे पर कान लगाया और बाते सुनने लगा। अब मुझे कुछ देर में ही समझ आ गया की आंटी की चुदाई अंदर चल रही है और वह साथ ही साथ बाते भी कर रही है। 

कुछ ही देर के बाद अब मामला शांत हो गया और उनका दरवाजा खुला। मै वही अभी कोने में खड़ा था और अब उस आदमी के जाने के बाद मेने आंटी को एक अलग ही निगाह से देखा। 

अब आंटी समझ चुकी थी मुझे सब कुछ पता है और उन्होंने मुझे बहुत ही प्यार से कहा की मै अंदर आ जायु। आंटी के कहने पर मै अंदर आ गया और अब आंटी ने मुझ से बात करना शुरू करि। 

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आंटी ने बताया अपना राज 

अब आंटी ने मुझे कहा की क्या मुझे सब पता है ? मेने हां करि और आंटी ने अब मुझे कहा की पहली बात तो यह बात मै किसी से भी ना कहु। और मेने इस बात में हां भर दी। 

अब आंटी ने मुझे बताया की उनके पति ज्यादातर बाहर ही रहते है इसलिए उनकी कुछ जरूरते पूरी करने के लिए वह कभी कभी अपने दोस्त को भी घर पर बुला लेती है। 

मेने अभी कुछ भी नहीं कहा और मै आंटी की बात सुनता रहा। अब आंटी ने मुझे कहा की अगर मै अपना मुह्ह बंद रखु तो आंटी भी मुझे अपना दोस्त बना लेंगी जिसमे मेरा भी फायदा है। 

आंटी का इशारा में समँझ गया था और मेने अब आंटी की हां में हआ भर दी और मेने आंटी से कहा की मै भी उनका अच्छा दोस्त ही बनना चाहता हु जो उनकी हर जरुरत में काम आ स्कू। 

आंटी भी एक ही बार में मेरा इशारा समझ गयी और अब आंटी उठी और दरवाजा अंदर से बंद कर आयी। चुदाई के होने से शायद आंटी पहले से ही गरम थी इसलिए अब आंटी ने मुझे उठा कर अपनी बाहो में ले लिआ। 

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वासना से भरी आंटी को चोदा 

अब आंटी ने मुझे बाहो में लेने के बाद मुझे चूमना शुरू कर दिआ और कुछ ही देर मै और आंटी दोनों ही एक दूसरे के होठो को चूसे जा रहे थे। कुछ ही देर में मै भी गरम हो गया था और मेरा लंड भी खड़ा हो गया था। 

अब आंटी ने सीधा मेरे लंड को पकड़ा और  पजामे से  बहार निकल लिआ। आंटी अब लगातार मेरे लंड को चूसे जा रही थी जिससे मेरे लंड में पूरा तनाव आ चूका था। 

अब आंटी के कपडे भी मेने धीरे धीरे करके निकाल दिए। आंटी भी पूरी तरह से  नंगी हो चुकी थी और मेने भी अब अपना लंड आंटी की चुत में देते हुए उनकी चुत को पेलना शुरू कर दिआ। 

आंटी भी  मेरे लंड का मजा लेती हुई अपनी चुत की चुदाई करवा रही थी जिससे मुझे भी मजा आने लगा था। लगातार मै अपना लंड आंटी की चुत में अंदर बाहर कर रहा था जिससे मेरा लंड चुत पर जोर जोर से रगड़ खा रहा था। 

अब कुछ ही देर बाद मेरे  लंड से भी माल निकलने ही वाला था और मेने अब अपने लंड को बाहर निकाल कर सारा वीर्य जमीन पर ही गिरा दिआ जिससे आंटी के पेट में मेरा बच्चा ना आ जाये। 

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