मौसेरी दीदी की गर्मासि चुदाई – 1

मैं हिंदी सेक्स कहानी पढ़ पढ़ कर इन कहानियों का शौक़ीन हो गया हूँ। भाई बहन सेक्स कहानी को पढ़ कर मैं अपने ही घर में अपनी ही मौसी की लड़की पर गलत निग़ाह डालने लगा था। 

वो हमारे यहां ऊपर के हिस्से में रहती थी। मेरी मौसी की तीन लड़कियां थीं। एक का नाम निशा, दूसरी का नाम रश्मि और सबसे छोटी का नाम पिंकी था। मैं और मेरा एक दोस्त दीपक, हम सब मौसी के लड़कियों के साथ आपस में हर तरह की बात साझा कर लेते थे। 

मैं निशा के चक्कर में लग गया कि अगर निशा से मेरा जुगाड़ फिट हो जाए, तो घर में ही मौज रहेगी। पर वो मुझसे बचती थी। उसको पता था कि मैं उसके ऊपर गलत निगाह रखता हूँ क्योंकि कभी कभी मैं उसको अपनी बहन की बेबी पकड़ाने के बहाने से उसकी चूची को कुछ जोर से छू लेता था। 

वो मुझको ग़ुस्से में घूरकर देखती थी। मैं फिर भी नहीं मानता था। कभी भी मौका मिलते ही उसका दूध दबाने से बाज नहीं आता था। जब वो नहाती थी, तब भी मैं उसको देखने की कोशिश में लगा रहता था। 

गर्मी के दिनों में मैं रात को ऊपर आ जाता था, जहां वो सोयी हुई होती थी। मैं उसके बराबर में लेट कर कपड़ों के ऊपर से ही अपना लंड उसके पीछे लगा कर हल्के हल्के धक्के मारने लगता था और उसके बूब्स दबा देता था। 

मगर मुझे उसे चोदने का मौका नहीं मिल पा रहा था कि कब वो अकेली सोती हुई मिले और मैं उसकी चूत चोदने का खेल खेल लूं। चूंकि हमारी बड़ी फैमिली है, सबके साथ में हल्का सा भी शोर होने पर मेरी पिटाई होने की पूरी गुंजाईश थी। 

फिर सर्दियों के दिन आए और मेरे घर के सब लोग नीचे सोने लगे। मौसी अपने ऊपर वाले कमरे में सोती थीं। रात को मैं उनके कमरे में टीवी देखने के बहाने चला जाता और उनकी ही रज़ाई में बैठ कर देखता रहता।

जवान चाची को दिए असली सम्भोग का मजा – 3

 सोने के बाद ही बनता माहौल

जब तक सब जागते, तो मैं चुपचाप बैठ कर टीवी देखता रहता। फिर थोड़ी देर बाद लेट कर देखने लगता। फिर जब सब सोने लगते, तो मैं निशा के ऊपर से ही उसके बूब्स हल्के हल्के से से सहला कर मज़े ले लेता। 

कभी कभी मुझे ऐसा लगता, जैसे वो भी मज़े लेती हो। पर पता नहीं था कि वो क्या सोचती थी। जब सुबह होती तो वो मुझसे दूर सी रहती थी। एक दिन मैं उसके बराबर में लेट कर हल्के हल्के से अपना लंड उसकी गांड पर लगा कर कपड़ों में ही मज़े ले रहा था। 

वो भी कुछ नहीं कह रही थी। कुछ देर बाद जब मुझसे सब्र नहीं हुआ तो मैंने उसकी सलवार की गांठ खोल दी और हल्के से उसकी सलवार को नीचे सरका दी। उस समय अन्दर से मेरी पूरी फ़ट रही थी मगर खोपड़ी पर सेक्स का भूत भी सवार था। 

मैं सोच रहा था कि एक बार निशा मुझसे चुद गयी तो फिर ये खुद दे दिया करेगी और मेरी मौज रहेगी। जब मैं उसके पास लेटा सलवार खोल रहा था, तो वो हल्का सा कसमसाई। पर वो गहरी नींद में थी। मैं चुप होकर लेट गया। 

कुछ देर बाद मैंने फिर से हरकत शुरू की और उसकी सलवार चड्डी सहित नीचे कर दी। अब मैं अपना लंड हल्के हल्के उसके चूतड़ों पर लगा कर ऊपर नीचे करने लगा। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था मगर ऐसे किसको सब्र आने वाला था। 

मैंने थोड़ी और हिम्मत की और अपना लंड उसकी गांड के छेद पर सैट कर दिया। छेद पर लंड सैट होते ही मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया मगर उसका छेद बहुत छोटा सा था।

मम्मी की सहेली और चुदाई की पहेली – 3

चुत को सहलाते ही चुदाई का बन गया मूड

मैंने लंड पर हल्का सा थूक लगाया और अपने लंड को वापस उसकी गांड पर सैट करके फिर से उसको अन्दर करने की कोशिश करने लगा। जैसे ही मैंने ज़्यादा ज़ोर लगा कर लंड घुसेड़ा, तो मेरा लंड का टोपा उसकी गांड के छेद में घुस गया। 

मगर वो एकदम से चिल्ला दी। मैंने उसका मुँह भींच कर दबा दिया और उठ कर वहां से चला गया। अगले दिन मैं डर रहा था कि कहीं घर में सबको पता चल गया तो क्या होगा। मैं सुबह से ही पूरा दिन घर से बाहर ही रहा। 

शाम को वापस आया। घर पर किसी ने कुछ नहीं कहा। शायद उसने किसी से कुछ नहीं कहा था। मैंने राहत की सांस ली। ऐसे ही दो दिन बीत गए। तीसरे दिन मैं फिर से ऊपर मौसी के कमरे में टीवी देखने चला गया। 

मैंने देखा कि निशा सो रही थी। मैं हिम्मत करके उसकी रज़ाई में ही जाकर बैठ गया। अब मैं सबके सोने का इंतज़ार करने लगा। देखते देखते सब सोने लगे। मौसी कहने लगीं- तू देख रहा है टीवी, मुझे तो नींद आ रही है। 

देख कर बंद कर दियो … और जब जाए, तो मुझे बता दियो। मैंने हां कह कर उनको बोल दिया कि जब जाऊंगा, तब आपको उठा कर चला जाऊंगा। अब मैंने अपना काम शुरू कर दिया। आज निशा सीधी लेटी हुई थी। 

मैंने सोचा आज पहले ऊपर से मज़े ले लूं। मैंने उसकी टांगों में हाथ फेरा तो उसने स्कर्ट पहनी थी और अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी। मैंने उसकी चूत पर उंगली फेरना शुरू कर दिया। मुझे उसकी चूत सहलाने में मज़ा आने लगा। अब मेरा मन उसे चोदने को करने लगा। मैं हल्के से उसके ऊपर से किस करने लगा कि कहीं वो जाग ना जाए।