गुजरती भाभी के बाद उनकी ननद को चोदा – 2

समझ नहीं पा रहा था कि पिछले पांच मिनटों में जो हुआ, वो सच था या सपना! भाभी की हरकत के बारे में सोचकर मुझे हैरानी भी हो रही थी लेकिन साथ ही वासना भी उठने लगी थी। 

मेरा लंड अभी भी तना हुआ था और बैठने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने भाभी के बारे में सोचते हुए उसे सहलाना शुरू किया और फिर मुठ मारने लगा। एक बार लंड पर हाथ चलने लगा तो फिर वीर्य निकलने के बाद ही थमा। मैं थोड़ा शांत हो गया। 

अब मेरे दिमाग में रात की तैयारी की बात चलने लगी। मैं भी भाभी की चुदाई करने के लिए रोमांचित हो रहा था। उसका फिगर 36-30-34 का था। देखने में गजब की चोदू माल लगती थी वो! उस दिन पता नहीं कैसे भाभी ने सविता को कहीं और भेज दिया। 

रात को मैं 10 बजे के करीब उनके रूम पर गया तो रूम में भाभी के अलावा कोई भी नहीं था। उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और मेरी बांहों में लिपटने लगी। उसने मेरी गर्दन को नीचे की ओर खींचा और मेरे होंठों को चूमने लगी। 

मैं भी भाभी का साथ देने लगा और दोनों जोर से एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे। मेरे हाथ भाभी की गांड पर जाकर कस गए। काफी देर तक हमारी किस चलती रही। भाभी ने साड़ी का पल्लू गिरा दिया और ब्लाउज में उसकी चूचियों की घाटी दिखने लगी। 

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टट्टों को चूसने लगी भाभी जोर जोर से 

मैंने दोनों हाथों से भाभी के चूचों को भींचना शुरू कर दिया। वो सिसकारने लगी और मेरे लंड को कैफ्री के ऊपर से ही सहलाने लगी। कुछ ही देर में मेरा लंड मेरी हाफ पैंट को फाड़ने के लिए उछलने लगा। 

भाभी ने जल्दी से मेरी हाफ पैंट को खोला और नीचे करते हुए अंडरवियर समेत उसे निकाल दिया। अब मैं नीचे से नंगा था और बदन पर केवल एक टीशर्ट रह गई थी। मेरा लौड़ा फुंफकारें मार रहा था। 

लौड़े का साइज देखकर भाभी की आंखों में चमक आ गई। बिना देरी किए वो नीचे मेरे घुटनों में बैठी और लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी। उसकी आंखें एकदम से बंद हो गईं और वो मेरी नंगी गांड भींचते हुए मेरे लौडे़ को चुसाई का मजा देने लगी। 

मैं भी जैसे सातवें आसमान में सैर कर रहा था। भाभी की जीभ टोपे पर आकर फिरती तो मेरे मुंह से आह्ह … करके सिसकारी निकल जाती थी। वो मेरे लंड को जैसे कोई खाने की चीज समझ रही थी। 

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भाभी की चुत पर रड़गने लगा लंड 

बार बार टोपे पर जीभ फिराती, कभी टट्टों को चूसने लगती, कभी लंड पर ऊपर से नीचे तक जीभ फिराने लगती। अब मैं भी बहुत गर्म हो गया। मैंने उसे बेड पर गिरा लिया और जल्दी से उसकी साड़ी को खोलने लगा। 

जब तक मैंने साड़ी और पेटीकोट उतारा, भाभी ने ब्लाउज खोलकर अलग कर दिया। अब वह केवल लाल ब्रा और पैंटी में थी। उसकी मोटी चूचियां उसकी ब्रा में जैसे समा नहीं रही थीं। 

पैंटी भी गांड पर ऐसे कसी हुई थी कि बस फट ही जाएगी। मैं उसके गोरे बदन को देखकर बेकाबू सा होने लगा। कभी उसकी ब्रा पर हाथ मारता तो कभी उसकी चूत के पास से जांघों पर हाथ फिराने लगता। 

पैंटी में उसकी चूत का उभार साफ दिख रहा था। उससे भी ज्यादा देर रुका न गया और उसने मेरे हाथ को अपनी पैंटी पर रखवा दिया। मेरे हाथ से ही वो चूत को सहलाने लगी। 

चूत से निकला गीलापन अब पैंटी तक आ चुका था। फिर मैंने उसकी पैंटी के अंदर हाथ डाल दिया। भाभी की चूत इतनी रसीली हो चुकी थी मुझसे उंगली दिए बिना रुका नहीं गया। 

मैं भाभी की चूत में उंगली देने लगा। वो मस्ती में भर गई और अपनी ब्रा को खोलने लगी। नीचे से मेरा हाथ उसकी चूत को मजा दे रहा था और ऊपर से वो अपने बोबों को खुद ही दबा रही थी। 

फिर मैंने उसकी पैंटी को पूरी तरह उतार दिया। अब भाभी मेरे सामने पूरी नंगी होकर चूत खोले पड़ी थी और मुझे उसके ऊपर चढ़ने के लिए बुला रही थी। मैं भी पूरा नंगा हो गया और भाभी पर कूद पड़ा। 

एक बार फिर से हम दोनों के होंठ मिल गए। नीचे से मेरा लंड भाभी की चूत पर ऊपर-नीचे रगड़ खा रहा था। मैं एक हाथ से उसकी चूचियों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से लंड के टोपे को उसकी चूत पर रगड़ रहा था।

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