लवर ने दिआ बच्चा – 2

पर उसे रुकने के लिए नहीं कह पाती थी। उसकी बीवी के मायके जाने के बाद हम दोनों को ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ा। वो जुलाई का महीना था। सुलेमान रोज की तरह आज भी होटल से छुट्टी के बाद मुझे अपने बाइक से घर तक ड्रॉप करने आया। 

मैंने उसे फ्लैट पर चलकर चाय पीने के लिए कहा। वो सहज ही मान गया और मेरे साथ मेरे फ्लैट में आ गया। मैंने अपने कपड़े बदले और चाय बना कर ले आई। हम दोनों चाय की चुस्कियों के दौरान बातें करते रहे। 

उस दिन सुलेमान को घर जाने की जल्दी नहीं थी इसलिए हम दोनों ही बेफिक्र थे और हमारी गपशप को काफी देर हो चुकी थी। वही सब निजी बातें होने लगी थीं। सुलेमान पूछ रहा था कि मुझे बच्चा क्यों नहीं हुआ? हज़्बेंड मीहांक कैसे हैं? मैं पूछ रही थी कि उसकी बीवी में क्या कमियां हैं। 

सुलेमान अपनी बीवी से खुश क्यों नहीं है? ये सब बातें करते करते रात के 12 बज गए थे। अगले दिन होटल के जॉब शिड्युल के चलते उसकी छुट्टी थी। हमारे होटल में कर्मचारियों को कुछ इस तरह से नियमित किया गया था कि सभी को हफ्ते में एक दिन की छुट्टी रहती थी और सुलेमान को दूसरे दिन रविवार न होने के बावजूद भी छुट्टी मिली थी मगर मेरी नहीं थी। 

क्योंकि मेरे पति को रविवार की छुट्टी मिलती थी तो मैंने अपने लिए रविवार की छुट्टी को ही प्राथमिकता दी थी। उस दिन मैंने मन बना लिया था कि कल मैं जॉब पर नहीं जाऊंगी। खैर … हमारे बीच बातों का लम्बा दौर जारी था। 

बुआ की चुदाई की प्यास – 1

बारिश ने बना दिआ चुदाई का मूड

तभी बाहर आंधी तूफान और बारिश होने लगी। सुलेमान ने कहा- अब मुझे जाना चाहिए। मैंने कहा- नहीं, बाहर आंधी तूफान चल रही है। आज तुम यहीं रुक जाओ। सुलेमान ने कहा- नहीं यार, बात समझो। हम दोनों एक दूसरे के दिल में रहते हैं। ये बात यहीं तक ठीक है। 

रात में मैं तुम्हारे साथ यहां रहा, तो गड़बड़ हो जाएगी। वैसे भी मैं तुम्हारे हुस्न पर फिदा हूँ। वैसे ही तुम्हारे कारण मेरी हालत खराब रहती है। तुम मेरे ख्वाबों में रोज आती हो और मैं अकेले में भी अपने आप को नहीं संभाल पाता हूँ। 

बीवी साथ में ना हो, तो बिस्तर में या बाथरूम मुझे खुद को गिरा कर ठंडा करना पड़ता है। मुझे उसकी इतनी खुली बात के बाद भी ये कहते नहीं बन रहा था कि तुम मुझे चोद दो। मैं उसकी तरफ से ही पहल होने का इन्तजार कर रही थी। 

उसकी बात से मैं खिलखिला कर उसके सामने अपनी बेतकल्लुफी जाहिर की और वो भी बस मेरी इस बेतकल्लुफी से भरे ठहाकों को देखता रहा। उस वक्त मेरी नजरें उसकी नजरों से मिली हुई थीं। हमारे बीच एक अजीब सी कश्मकश थी लेकिन हमारी जुबान नहीं हिल रही थी। 

वो मुझसे जाने की कहते हुए चला गया। मैं बेबस कसमसाती रही और उसका साथ पाने की बेचैनी से खुद को दो चार करती रही। सुलेमान के जाने के बाद मैं बुत बनी बैठी रही … न ही उठ कर दरवाजे बंद करने की कोशिश की और न ही सुलेमान को अपने ख्यालों से निकाल पाई। 

करीब 20 मिनट बाद मैंने उठकर दरवाजा बंद किया और बुझे मन से वापस सोफे पर बैठ गई। उसी वक्त सुलेमान वापस आ गया। उसने डोरबेल बजाई। मैं समझ गयी कि सुलेमान अब मेरे सपनों का राजा बनने आ चुका है। वो ऐसे नहीं जा सकता है।

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लवर ने उतार दिए अपने कपडे 

फिर मन ने कहा कि पहले देख तो कौन आया है। मगर मैं मानने को तैयार ही न थी कि ये सुलेमान की जगह कोई और हो सकता है। घंटी के बजते ही मैं मुदित भाव से उठी और जाकर तुरंत दरवाजा खोल दिया। 

आह … मेरे सामने मेरी चाहत बन चुका सुलेमान भीगा हुआ खड़ा था। तेज हवाएं चल रही थीं जो बिल्डिंग की ओपन गैलरी से तेज चलती हुई थपेड़े बरसा रही थीं। बाहर बारिश बहुत तेज हो रही थी। सुलेमान बीच रास्ते से ही पानी में लथपथ होकर वापस आ गया था। 

मैंने उसके साथ बेहद अपनापन जताते हुए उसे अन्दर खींचा और कहा- सुलेमान, मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि मत जाओ। मगर तुम मेरी सुनते कहां हो। ना तो अपना ख्याल रखते हो, ना ही तुम्हें मेरी कोई फ़िक्र है। चलो अब जल्दी से अन्दर आओ और अपने कपड़े उतारो। 

मैं इन्हें वॉशिंग मशीन में डाल देती हूँ। सुलेमान मेरी तरफ मुस्कुरा कर देख रहा था मगर वो चुप था। मैंने सुलेमान को अन्दर लिया और बाथरूम के पास खींचती हुई ले गई, उधर टंगा तौलिया मैंने उसे पकड़ा दिया। 

“लो अब जल्दी से अपने जिस्म को पौंछ लो और कपड़े उतार कर मुझे दे दो।” सुलेमान ने अंडरवियर छोड़ कर अपने सारे भीगे हुए कपड़े उतार दिए। मैंने उसके मर्दाना जिस्म को ऊपर से नीचे तक निहारा और कहा- अंडरवियर नहीं भीगी है क्या? 

उसने मेरी नजरों को पढ़ते हुए बड़े ही मादक अंदाज में कहा- मेरा सब कुछ भीग गया है जान। लो आज इसे भी उतार ही देता हूँ। तुम वॉशिंग मशीन में डाल दो। ये कहते हुए वो आदमजात नंगा हो गया। उसका मस्त झूमता हुआ लंड मेरी आंखों की प्यास को बढ़ाने लगा था। 

सुलेमान का लंड खड़ा हो चुका था। उसने उसी पल अपनी कमर पर तौलिया बांध ली। उतनी देर में उसका भूरा लंड, गुलाबी सुपारा मुझे अन्दर तक गीला कर चुका था। 

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