नर्स की चुदाई करके दिआ मजा – 1 

मैं अभी मुरादाबाद के एक कॉलेज में अपने अंतिम वर्ष में हूँ। मैं अपने बचे हुए कुछ दिन हॉस्टल में ही काट रहा हूँ। चूंकि पहले लॉकडाउन के चलते मैं हॉस्टल में ही फंस गया था। मेरा हॉस्टल लगभग खाली ही था। बस कुछ ही स्टूडेंट थे। 

लॉकडाउन के बाद मेरा कॉलेज फिर से खुल गया था मगर मुझे कॉलेज जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था। फिर कुछ दिन बाद कॉलेज की सारी पढ़ाई ऑफ लाइन होने की वजह से मुझे कॉलेज आना पड़ा। 

अभी फिर से लॉकडाउन लगने की खबरें आने लगी थीं। मगर इस बार ऐसा होता तो मैंने हॉस्टल में ही रहने का मन बना लिया था। मेरे बहुत से दोस्तों ने कहा कि किराए का रूम ले लेते हैं; वहीं पर हम सब साथ में रह लेंगे। 

पर मैंने हॉस्टल में ही रुकने का मन बनाया हुआ था। मेरे दोस्त बाहर कमरा लेकर रहने लगे। अब मैं अपने कमरे में अकेला रह गया था। कभी कभी मुझे लगता था कि मुझे भी बाहर ही रह लेना था, पर कहते है ना कि जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है। 

मेरे साथ भी वैसा ही हुआ। मुझे हॉस्टल में अकेले रहते हुए एक महीना ही हुआ था कि प्रदेश सरकार ने फिर से कोरोना के बढ़ते केस देख कर जगह जगह लॉकडाउन के ऐलान करना शुरू कर दिया। 

हालांकि मुरादाबाद में किसी तरह से भी लॉकडाउन के आसार नहीं लग रहे थे। मेरे घर रायपुर में सब चीजें बहुत पहले से बंद हो गई थीं। जिसके कारण मैंने सोचा कि यदि किसी भी सूरत में मुरादाबाद में लॉकडाउन लगता है तो हॉस्टल में रहना ही ठीक रहेगा। 

गलती बन गया चुदाई का मूड – 1

नर्स से करि काफी बाते 

कुछ दिनों तक तो मैंने बहुत बार सोचा कि घर चले जाना चाहिए, पर तभी कुछ ऐसा हुआ … जिससे मेरा मन हॉस्टल में लग गया और मुझे घर की याद नहीं आई। हुआ ये कि कोरोना के केस बढ़ने के कारण हमारे हॉस्टल के बहुत से स्टूडेंट अपने घर चले गए थे। 

हॉस्टल में बस हम सब मिलाकर केवल 40 लड़के थे। हमारे हॉस्टल के दूसरे तीसरे और सातवें माले को डॉक्टरों के लिए कोरंटाइन सेंटर बना दिया गया था। हमें बोला गया था कि अपने कमरों से ज्यादा निकलना बन्द कर दो। 

हम बस खाना खाकर रात को टहलने और थोड़ी बहुत मस्ती करने निकलते थे क्योंकि ऊपर के माले पर सुंदर सुंदर नर्स रुकी हुई थीं और हम सभी लौंडे नर्सों को देखने के लिए निकलते थे। 

ऐसे ही कुछ दिन मैं रात का खाना खाने के बाद टहलने निकलता और अकेले घूमने लगता। तभी मेरी नजर एक नर्स से जा टकराई, वो भी हर रात को उसी समय टहलने आती थी। 

मैंने सोचा कि चलो इससे बात की जाए। मैंने अपनी रफ्तार कम कर दी। उसी वजह से वो मेरे करीब आ गई और हम दोनों अब बराबर पर चल रहे थे। उसने मेरी तरफ देखा, तो मैंने उससे पूछा- तुम ऐसी हालात में हॉस्पिटल जाती हो, तो क्या तुम्हें डर नहीं लगता? उसने बताया- मैं अभी अभी ही यहां आई हूँ और जब तक मुझे वैक्सीन की पहले डोज़ नहीं लगती, तब तक वो हॉस्पिटल नहीं जा सकती। 

गलती से बन गया चुदाई का मूड – 2

नहाने के लिए हो गयी देरी

हमारी इतनी ही बात हुई थी कि उसकी किसी फ्रेंड ने उसे आवाज लगा दी और वो चली गई। वो दिखने में तो एक सामान्य लड़की के जैसी ही थी। सामान्य रंग, सामान्य ऊंचाई और बोलने में भी वो सामान्य थी। 

बस उसके चूचे और चूतड़ दोनों ही अच्छे खासे बड़े थे। उसके जाने के बाद मुझे याद आया कि ना तो मैंने उससे उसका नाम पूछा और ना ही अपना नाम बताया। फिर मैं अपने कामों में व्यस्त हो गया। 

उसकी तरफ से किसी दूसरी लड़कियों की तरह मन हटा लिया। तब भी अब मेरे मन में एक बात आ चुकी थी कि उससे दूसरी बार मिलने का मौका मिलेगा, तो उसका नाम पूछ लूंगा। 

फिर एक हफ्ते तक हर रात मैं टहलने को जाता, पर वो नहीं दिखी। इस बीच मुझे उसका नाम मालूम चल गया था। उसका नाम प्रिया था। एक रात मैंने उसे ढूंढने की काफी कोशिश भी की, पर वो नहीं मिली तो मैं अपने रूम में जाकर सो गया। 

सुबह मैं सोकर उठा और नाश्ता करके अपने रूम में आकर काम करने लगा। काम करते हुए काफी देर हो गई और उसी वजह से मुझे नहाने के लिए थोड़ी देर हो गई। उस वक्त करीब एक बज रहे होंगे। 

मैं नहाने के लिए कॉमन बाथरूम में जा रहा था। मैं हमेशा की तरह अपने सारे कपड़े उतार कर एक टॉवल कमर पर लपेट कर बाथरूम में आ गया।

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