सेक्स की एक लम्बी कहानी और वासना – 4

अचानक से निकली उस शायरी से मेरी तरह वो भी सोच में पड़ गयी। मैं बिस्तर में उसके पैरों के पास बैठ गया। कमरे का तापमान कम हो रहा था और उसके साथ साथ मेरे अरमानों का हीटर चालू हो रहा था। 

बिना कुछ कहे मेरी उँगलियों ने उसके तलवों पर एक्यूप्रेशर देना शुरू कर दिया। उसने आँखें बंद करते हुए कहा- ओह, तो हमारे लेखक साहब शायर भी हैं और साथ में मसाज भी अच्छी देते हैं, बहुप्रतिभाशाली! मैं मानो तैयार बैठा था … मैंने कुछ नहीं कहा। 

अपने बैग से मैंने लेवेंडर अगरबत्ती उनका स्टैंड निकाला। “क्या कर रहे हो?” इससे पहले मैं कुछ जवाब दे पाता … डोरबेल बजी। मैं भूल गया था कि एक चाय और कॉफ़ी का आर्डर दिया हुआ था। वेटर ने आर्डर सर्व किया और चला गया। 

“कुछ नहीं … कुछ कोशिश कर रहा था पर शायद वक्त ने इजाजत नहीं दी।” अधूरी बात को दरवाजे पर कुण्डी लगाते हुए मैंने जवाब दिया। मैंने सौम्या के पास जाकर उसको कॉफ़ी सर्व करी और अपना चाय का प्याला भी हाथ में उठा लिया। 

“चलो आज की क्लिक की हुई फोटो देखते हैं।” ये बोलते हुए मैंने बैग से अपना लैपटॉप निकाल कर बिस्तर पर रखा और अपने कैमरे से कनेक्ट किया। मैं एक टांग नीचे करके और दूसरी बेड पर रखकर लैपटॉप को सामने रखा और लैपटॉप ऑन करते हुए फोटोज वाला फोल्डर खोला।

फोटोज देखते देखते मैं मानो सब भूल गया था। यहाँ तक कि यह भी भूल गया था कि मैं कहाँ हूँ। मैं सौम्या की फोटोज में मानो उसको महसूस कर रहा था। उसके सुर्ख होंठ और उन पर सजी मादक हँसी और मेरी नजर उसके गले से होते हुए उसकी गहराई में उतर रही थी।

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“ठण्ड लग रही है ना, तुम ऊपर बेड पर आ जाओ!” सौम्या मेरे कंधे से हटते हुए पलंग के सिरहाने की तरफ जाते हुए मुझे आदेश कर रही थी या रिक्वेस्ट, पता नहीं चला। और ये भी नहीं पता चला था कि कब वो मेरे कंधे के सहारे फोटोज देख रही थी। 

अचानक मुझे कुछ याद आया और मैंने कहा- वो वेटर के आने से पहले तुम पूछ रही थी ना कि क्या कर रहे हो? “हाँ, मतलब तुम बैग के पास गए कुछ निकला था।” वो उत्सुक दिख रही थी और मैंने उसकी उत्सुकता को जाना और कहा- ऐसे नहीं, तुम कम्बल के अंदर फोटो देखो और फिर पंद्रह मिनट बाद कम्बल से बाहर आना! 

यह कहते हुए मैंने AC का तापमान और भी कम कर दिया। “मतलब हद होती है।” ये कहते हुए उसने मेरी बात भी मान ली। मैंने अपना बैग उठाया और रूम को अपने हिसाब से डेकोरेट करने लगा। 

मुझे ये पल हमारी ज़िन्दगी का सबसे हसीन पल बनाना था। मैंने बेड के ठीक सामने अगरबत्ती जला दी और बेड के आस पास एरोमा कैंडल्स, फिर अपने बैग से स्पीकर निकाला उसको अपने मोबाइल से कनेक्ट करा। 

अब मेने बहुत ही कम आवाज में पुराने गानों की रोमांटिक धुन बजाई और लाइट्स ऑफ करके उसी कम्बल के अंदर घुस गया अचानक से! उसके शरीर से मेरा शरीर टच हो रहा था। हम बहुत करीब थे पर अब भी शायद सेक्स जैसा कुछ नहीं था। 

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मेरा हथियार भी सो रहा था। मैंने उसके चेहरे से कम्बल हटाया … कुछ देर वो बस देखती रही। मादक खुशबू और रोमांटिक गानों की वो धुन … और अचानक सौम्या मेरे सीने पर थी। मेरा बायाँ हाथ उसके सर पर था और दायां कमर में! 

मैं उसे और उसकी अंदर की तपन को अंतर्मन तक महसूस कर पा रहा था और मेरे शरीर में भी कुछ हलचल थी। “सौम्या, मैंने बस कुछ मौज मस्ती करने के लिए तुमसे बात शुरू करी थी, पर कब वो बातें प्यार में बदल गयी पता ही नहीं चला। 

और तुमसे इजाजत मांगने की जरूरत ही नहीं समझी। लगता है शायद हमारे बीच भावनाओं का वो गहरा सम्बन्ध शब्दों से परे बन गया है, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।” ये कहने के बाद हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। 

मेरे हाथ सौम्या के सर में मसाज देते हुए उसकी गर्दन तक पहुंच गया था और दूसरा हाथ उसकी नाभि से होते हुए उसकी कमर को सहला रहा था। मैं उसके होंटों की तरफ अपने होंठ ले जा रहा था और सौम्या भी धीरे धीरे मेरी तरफ अपनी गर्दन ला रही थी। 

मैंने अपनी आँख बंद कर ली। उसके होंठों की बाहरी सतह को अपनी जीभ से महसूस करने लगा। उसके होंठ भी धीरे धीरे खुल रहे थे और मेरे होंठ जगह ढूंढ कर अंदर अपनी जगह बना रहे थे। 

धीरे धीरे शुरू हुई किस! उसकी साँसें धीरे धीरे बढ़ रहीं थीं और अब मैं भी उसके होंठों को चूस रहा था। कभी कभी वो जीभ आगे बढ़ाती तो मैं उसकी जीभ कभी चूसता, कभी अपनी जीभ से टकराता! 

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