ओयो तक का साथ – चुदाई, दोस्ती, प्यार और धोखा

मेरा नाम आसिफ है यह बात मेरे कॉलेज की दिनों  की है जब मै लड़कीओ के बहुत ही करीब रहा करता था। हमारे ग्रुप में एक कई लड़किआ थी और सभी एक से एक सुन्दर भी थी।  पर सभी में एक लड़की का नाम था पिंकी जो मुझे बहुत ही ज्यादा पसंद थी। पिंकी के बूब्स बहुत ही मोटे और सुन्दर थे जीपे किसी का भी दिल आ जाये। 

पिंकी मुझे बहुत प्यार से बाते भी किआ करती थी पर जब भी मै उसके करीब जाता था उससे बाते नहीं कर पाता था। कई महीने ऐसे ही निकल गए और मै पिंकी से बाते भी ना कर सका। पिंकी रोज मेरे ख्यालो में आती थी जगा मै उसकी जोरदार चुदाई किआ करता था। अब शेरे शेरे मेने पिंकी से बाते करना शुरू कर दिआ और उसे अपने तरह आकर्षित करने लगा। 

पिंकी भी धीरे धीरे मुझसे घुल मिल गयी और हम दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए थे। पिंकी मुझसे अपनी सभी बाते शेयर करने लगी और हमारी दोस्ती गहरी हो गयी। अब मै पिंकी का बेस्ट फ्रेंड बन चूका था पर मै उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता था। पर जैसे ही मै पिंकी से यह करने के लिए जाता बिच में कोई न कोई आ ही जाता था। 

अब कुछ दिन बाद मै पिंकी के पास हिम्मत बांधते हुए अपनी बात कहने पंहुचा पर मुझे देखते ही अब वो रोने लगी और मुझे अपने दुःख सुनाने लगी। पिंकी ने मुझे बताय की कैसे उसे एक लड़के से बहुत प्यार हो गया था और अब लड़का उसके साथ नहीं रहना चाहता और पिंकी के घर में भी बहुत सी परेशानी वाले बाते होने लगी थी। 

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पिंकी को ओयो जाने के लिए मनाया 

अब पिंकी मेरे कंधे पर सर रखकर बहुत देर तक रोटी रही जिससे मेरा दिल भी पिघल गया और मेरे आंसू आ गया। और उस दिन के बाद मेने पिंकी को अपने दिल की बात बताने के बारे में कभी नहीं सोचा। पर पिकी की जवानी मेरे दिमाग में बसी हुई थी। 

जब भी में रात को अपना लंड पकड़कर सोता पिंकी मेरे सपनो में आकर मुझसे चुदाई कराके जाती थी। अब मेने पिंकी से उसके सभी दुखो के बारे में बात की। पिंकी उस दिन भी थोड़ी उदास ही थी और मेने पिंकी से कहा की क्यू ना हम दोनों दारू लेके ओयो चले और सब भूलकर बस मस्ती करे। 

शुरू में पिंकी थोड़ी बाते सोचने लगी क्युकी उससे भी यह बात पता थी की ओयो में लोग सिर्फ चुदाई के लिए ही जाते है। पर मेरी दोस्त होने के नाते मेने पिंकी को थोड़ा मनाया और कहाँ की वह अपने सभी दुःख भूलकर वहा मस्त हो जाएगी। अब पिंकी मेरे साथ ओयो जाने के लिए मान गयी थी और हम दोनों ने कुछ दिन के बाद का प्लान फिक्स कर लिआ। 

मेने और पिंकी ने मिलकर घर के पास में ही एक ओयो एक दिन के लिए बुक कर लिआ और दारू लाने का जिम्मा मैने अपने ऊपर ले लिआ। हम दोनों करीब 11 बजे मिले और तबतक में दारू अपने पास ले चूका था। ओयो जाकर हम दोनों ने अपने अपने बैग कोने में रखे और मेने दारू के पेग बनाने शुरू कर दिये। 

अब मैने पिंकी को शुरू में छोटे और हलके पेग देने शुरू किये पर उसने मुझसे सीधा बोतल ली और 5 – 10 घुट भरते हुए काफी दारू पुई गयी। कुछ ही देर में पिंकी पूरे नशे में हो गयी थी और मेरे पास बैठे हुए रो रही थी। पिंकी अपने घर की सारी तकलीफे बता रही थी और काफी देर तक मेरे पास बैठके रोती रही। 

नशे में पिंकी और मेने करि अंधी चुदाई 

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 पिंकी अब अपने बन्दे के बारे में मुझसे बाते कर रही थी और उसके साथ बिठाये हसीन पलो को याद कर रही थी। पिंकी ठीक मेरे दाई तरफ बैठी थी और हसीन बाते करते करते वह मेरे बहुत करीब आ गयी। पिंकी ने एकदम ही मेरे होठो पर चुम्बन कर दिआ और हम दोनों के होठ मिल गए। 

मै भी अब बिस्तर पर लेट गया और काफी देर तक हम दोनों ही एक दूसरे के होठ चूसते रहे। पिंकी और मै दोनों नशे में चूर हो गए थेऔर एक दूसरे को बिना छुए बस किस किये जा रहे थे। मेने अब अपना एक हाथ पिंकी के बूब्स पर रखते हुए दबाना शुरू कर दिआ और पिंकी के मुह्ह से उसकी आहे निकल गयी। 

पिंकी एकदम बहुत ही ज्यादा कामुक हो गयी थी और मुझे अपनी तरफ खींचे जा रही थी। मै भी उसके बूब्स दबाता हुआ उसे किस किये जा रहा था। मैने अब उसके टॉप को थोड़ा सरकाया और उआकी ब्रा में से उसका एक बूब्स बहार निकाल लिआ। पिंकी की निप्पल पूरी तरह कड़ी हो चुकी थी जिसे मेने चूसना शुरू कर दिआ। 

पिंकी कामवासना में लीन मुझसे अपने बूब्स की निप्पल बड़े प्यार से चुसवा रही थी। इस समय पिंकी की आंखे पूरी तरह बंद थी और पिंकी हवस से भरी हुई थी। अब मेने निचे जाते हुए पिंकी की पेंट खोलना शुरू कर दी। पिंकी ने मुझे थोड़ा सा रोका पर मेने पिंकी की पेंट किसी भी तरह उतार दी। अब मेने पिंकी कि काली रंग की पैंटी भी उससे अलग कर दी। 

पिंकी की चूत पूरी तरह से साफ़ थी जिसपे एक भी बाल नहीं था। अब मेने पिंकी की चूत पर अपने होठ रखे और चटाई शुरू कर दी। पिंकी चूत की चटाई से पागल होने लगी और बिस्तर पर लौटने लगी। पिंकी अपनी जांघो से मेरा सर अपनी चूत में घुसाए जा रही थी और मै अपनी जीभ उसकी चूत में फिराए जा रहा था। इतनी देर में मेरा लंड भी पूरी तरह खड़ा हो चूका था जिसे मेने निकलते हुए पिंकी की चूत पे रख दिआ।

पिंकी की चूत की सील पहले ही टूटी हुई थी इसलिए एक ही धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया। इससे पिंकी थोड़ी करहाई और मुझे पीछे धकेलने लगी पर मेने पिंकी के बूब्स को चूसा और उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी। 

काफी देर तक मेने पिंकी को उसी अवस्था में छोड़ा और पिंकी भी नशे की हालत में बस अपनी चुदाई करवाई कराये जा रही थी। पर धीरे धीरे पिंकी का नशा ख़तम होने लगा था और वह होश में भी आ रही थी। अब पिंकी की आंखे खुल चुकी थी और मै उसकी दमदार चुदाई कर रहा था। पिंकी को भी इस सब में मजा आ रहा था इसलिए वह बिना कुछ कहे अपनी चुदाई का आनंद ले रही थी। 

अब मैने पिंकी को बिस्तर की किनारे तक लेकर उसकी टाँगे अपने कंधे पर ली और वापस अपना लंड उसकी चूत में उतार दिआ। पिंकी की चुदाई का किस्सा मेने दुबारा  पिंकी होश में अह्ह्ह अहह करती हुई मुझसे चुदती रही। उस दिन मेने अपनी दारू और ओयो के पूरे पैसे पिंकी  वसूल लिए और पिंकी को भी अपनी चुदाई का मजा आ गया था। 

पर उस दिन के बाद मेने और पिंकी ने ज्यादा बाते करना बंद कर दी और अब वह अपने बॉयफ्रैंड के साथ खुश रहती है। यह बात हमारे दोनों के आलावा कभी किसी को ना पता लगे ऐसी हमने कसम खायी और चुदाई का यह अनमोल पल हम दोनों भूल गए। 

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