बीवी को छोड़ कर पड़ोसन से प्यार – 1

मेरी उम्र 28 साल है और मेरी हाइट 5.6 फीट है। मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और 2.5 इंच मोटा है। दोस्तो, मैं इतना तो कह सकता हूं कि मेरा लंड किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है। मेरे घर में मैं और मेरी बीवी रहते हैं। 

मेरा अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है। मैं चुदाई में बहुत अच्छा परफॉर्म करता हूं और मेरा वीर्य भी बहुत गाढ़ा है। चूंकि मैं काफी समय से अन्तर्वासना से जुड़ा हूं तो मेरे अंदर चुदाई की प्यास तो हमेशा ही लगी रहती है। मेरी इस प्यास के कारण मैंने अपनी पड़ोसन की चुदाई कर डाली जिसकी ये कहानी है। 

हमारी सोसायटी भी काफी बड़ी है। मेरे पड़ोस में राधा नाम की मराठी भाभी रहती थी। उसकी उम्र 35 साल के करीब थी। चूंकि उन दिनों वर्क फ्रॉम होम ही चल रहा था तो मैं घर पर ही रहता था। तो जिस औरत की मैं बात कर रहा हूं मेरी पड़ोसन देखने में बहुत सुंदर थी। 

मेरे घर के सामने ही उनका घर था। उसके पति एक बड़े बिजनेसमैन थे जिनका भारत से बाहर भी आना-जाना लगा रहता था। जहां तक मैंने नोटिस किया था, मैं उसके पति को महीने में बस 4 या 5 दिन ही घर में देख पाता था। 

इसके अलावा मेरी पड़ोसन काम के सिलसिल में घर से बाहर ही रहते थे। पड़ोसी होने के चलते उनके घर में हमारा भी आना जाना होता था। एक बार की बात है कि मेरी बीवी को त्यौहार पर अपने मायके जाना था। 

राधा मेरी बीवी की अच्छी दोस्त थी तो मेरी बीवी उसको मेरे खाने की जिम्मेदारी देकर चली गई। तो उस दिन मेरी पड़ोसन खाना लेकर आई। उस वक्त मैं हॉल में बैठा हुआ टीवी देख रहा था। मेरी पड़ोसन खाना रखने लगी तो मुझे उसके गाउन में से उसके बूब्स की झलक मिल गई। 

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पड़ोसन आयी घर खाना बनाने 

उसने भी मुझे देख लिया कि मैं उसके बूब्स को ताड़ रहा हूं। खाना रखकर मेरी पड़ोसन मुस्कराती हुई वापस चली गई। मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। मैं उसकी चूत की फिराक में बहुत दिनों से था। अब मेरी मुराद शायद पूरी होने को थी। 

चूंकि मैं समझ गया था कि बीवी के आने से पहले मुझे इसकी चूत मारनी होगी तो मैंने अपनी तैयारी शुरू कर दी। मैंने अपनी झांटों का जंगल साफ कर लिया। मैं चूत भी बिना बालों वाली ही पसंद करता हूं क्योंकि उसको चूसने में बहुत मजा आता है। 

अगले दिन मेरी छुट्टी थी और मुझे कुछ काम नहीं था तो मैं कच्छे में पड़ा हुआ ही टीवी देख रहा था। फिर घण्टी बजी और मैंने तौलिया लपेट कर दरवाजा खोला। सामने राधा खड़ी थी, मेरी पड़ोसन बोली- खाना खा लो गणेश! 

मैंने कहा- हां, आप अंदर रख दीजिए प्लीज। मेरी पड़ोसन अंदर आने लगी और मैं उसके पीछे पीछे आ गया। फिर मेरी पड़ोसन रसोई में गई और मेरे लिए पानी का गिलास लाने लगी। मैं भी हाथ धोकर आ रहा था और तौलिया से पौंछते हुए मेरा तौलिया खुलकर नीचे गिर गया। 

मेरी पड़ोसन मेरे सामने ही थी और उसने मुझे फ्रेंची में देख लिया और जोर जोर से हंसने लगी। मैंने भी थोड़ी शर्मिंदगी के साथ मुस्कराते हुए अपना तौलिया संभाला और फिर लपेटने लगा। मेरी पड़ोसन हंसते हुए बोली- तुम अपना लंगोटा संभालो, खाना मैं परोस देती हूं। 

राधा मेरे लिए खाना लगाने लगी। मेरे अंदर हवस पहले से ही जागी हुई थी। मैंने सोचा कि आज इसकी चूत मारने की ट्राई करता हूं वरना फिर तो बीवी लौट आएगी और मौका नहीं मिलेगा। मैं बोला- आप मेरे लिए थोड़े चावल भी बना सकते हो क्या? 

मेरी पड़ोसन बोली- ठीक है, बना देती हूं। फिर मेरी पड़ोसन रसोई में गई और चावल बनाने लगी। मौका देख मैं भी किचन में गया और उसके आस पास कुछ ढूंढने का नाटक करते हुए उसकी गांड पर लंड को टच करवाने लगा। 

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पड़ोसन ककी गांड पर रगड़ा अपना लोडा 

मेरी पड़ोसन भी पलट कर मेरे तौलिये की ओर देख रही थी और फिर से नजर घुमा लेती थी। मैं जानता था कि संभोग की प्यास तो उसके अंदर भी जरूर लगी होगी। तभी मैंने पूछा- भाईसाहब कहीं गए हुए हैं क्या? बहुत दिन से दिखाई नहीं दे रहे। 

मेरी पड़ोसन उदास मन से बोली- उनका तो होना न होना बराबर है, अपने काम से ही फुरसत नहीं है उनको! ये सुनकर मैं उसके पास चला गया और उसके कंधे को सहलाते हुए बोला- कोई बात नहीं, ये भी तो आपका ही घर है, जब मन हो चले आना। 

मेरी पड़ोसन बोली- क्या मतलब? क्या ले लेना? मैंने कहा- व व मेरी पड़ोसन … मेरा मतलब, जब मन करे आकर मन बहला लिया करो। फिर मेरी पड़ोसन हंसकर बोली- आपके पास कोई खिलौना है क्या जिससे मेरा मन बहला दोगे आप? 

और मैं क्या छोटी बच्ची हूं? फिर मैंने उसकी गांड पर लंड छुआते हुए कहा- खिलौना तो है अगर आप खेलना चाहें तो? उसको अपनी गांड पर मेरे खड़े लंड का अहसास हुआ तो मेरी पड़ोसन थोड़ी आगे सरक गई। 

मेरी पड़ोसन बोली- आप अपनी बीवी की गैरमौजूदगी में शरारती हो गए हैं। आप इंतजार करो, मैं चावल लेकर आती हूं। मैंने फिर नमक उठाने के बहाने पूरा लंड उसकी गांड की दरार में फंसा दिया और उसकी कमर को सहला दिया। 

मेरी पड़ोसन एकदम से सिहर गई और उसने पीछे सरकते हुए अपनी गांड को मेरे लंड पर रगड़ दिया। मैंने सोचा कि यही पल है, अब नहीं किया तो फिर नहीं हो पाएगा। मैंने हिम्मत की और उसकी कमर में हाथ डालकर उसकी गांड पर लंड को सटाते हुए उसकी गर्दन पर चूमने लगा।

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