कैसे करी पड़ोसन की मोटी गांड की चुदाई और दिआ मेरे लंड को सुकून

हमारी बाकि कहानिओ की तरह एक कहानी भी बहुत ही ज्यादा नंगेपन से और हवस से भरी है।  तो यह किश शुरू होता है मेरे घर के साथ वाले भैया की है जिनकी कुछ ही दिन बाद शादी थी। अब मै आपको बता दू की मेरी पड़ोसन अभी भी कुवारी है जिसकी उम्र कम से कम 22 साल की होगी।  दीक्षा के बूब्स बहुत ही मोटे और दिखने में गोल थे जिन्हे देख कोई भी लड़का पागल हो जाए।  कई बार रात में , मै दीक्षा के नाम की मुठ भी मारा करता था।  दीक्षा और मेरी दोस्ती भी कुछ अछि नहीं थी पर हम जब भी हम मिलते थे तो बहुत देर देर तक बाते किआ करते थे। 

दीक्षा दिखने में इतनी अछि नहीं थी पर उसके बूब्स देखते ही किसी के भी मुह्ह में पानी आ सकता था। दीक्षा की गांड भी बाकि लड़कीओ से बहुत अलग थी जो जींस पहनने के बाद और भी ज्यादा टाइट और मोरी दिखाई देती थी। 

दीक्षा की गाड़ और सेक्स भरी बाते 

अब भइया की शादी का दिन नजदीक भी आ रहा था।  मैने भी अब अपने दोस्तों के साथ जाते हुए अपने लिए कपडे ले लिए।  अब शादी का दिन आ गए और उस दिन दीक्षा किसी अप्सरा की तरह लग रही थी जो हम सभी लड़को को अपने हवस के जाल में फ़साने आयी हो। खाना खा लेने के बाद, दीक्षा मेरे पास आकर बेठ गयी और सभी एक दूसरे से बात करने लगे। बात होते होते हम दोनों एक दूसरे से सभी बात कर रहे थे।  अब मैने दीक्षा से उसके बॉयफ्रेंड के बारे में पूछा जिससे वह ज्यादातर समय बात करती रहती थी। 

अब हम दोनों टेबल पर बस अकेले ही बैठे हुए थे और मेने बिना सवाल किये दीक्षा से उसके पहले सेक्स के बारे में पूछ लिआ। दीक्षा इस बात से चौक गयी थी पर कुछ देर बाद यह सब आम बात हो गयी।  दीक्षा ने मुझे बताय की कैसे एक लड़के ने उससे इस्तेमाल किआ और बाद में तड़पने के लिए छोड़ दिआ। अब मैने मौका देखते हुए अब दीक्षा को परपोज़ कर दिआ जिससे वह बहुत खुश सी दिख रही थी। उन्हें यह सब एक मजाक जैसा लग रहा था पर मेरे मन में बस उनकी चुदाई के ही सपने थे। 

अब मैने मजाक करते हुए कहा की अब तो हम बहुत ही अचे दोस्त है तो क्या तुम मुझे अपनी कुछ फोटोस भेज सकती हो।  इसका जवाब देते हुए दीक्षा ने मुझे शाम को पिक्स भेजने को बोल दिआ। अब शाम होते ही मेने दीक्षा दीदी से उनकी फोटोस मांगी और हसने वाले मैसेज करने लगा। कुछ समय बाद दीक्षा दीदी ने मुझे उनकी बहुत सारी फोटोस भेजी जिनमे उन्होंने बस नाम के ही कपडे पहने थे। दीक्षा दीदी की गांड उन फोटोज में बहुत ही मोटी दिख रही थी जिसे देखकर मेरा लंड ही अब खड़ा हो  गया था। उस रात से मेने दीक्षा दीदी को बस दीक्षा बुलाना शुरू कर दिआ और हमारी बाते अब रोज होने लगी। 

हम रोज रात को अपने अपने चुदाई के सपने एक दूसरे को बताया करने लगे। हम दोनों को इस सब में अब मजा आने लगा था।  पर कुछ ही दिन बाद में हवस भरी बातो से ऊब गया और दीक्षा से बाते काम करने लगा। 

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चुदाई के लिए पूछा और दीक्षा को उठा उठा कर चोदा 

अब कुछ दिन बाद दीक्षा ने मुझे मेसेज किआ और मेरे इस बर्ताव का कारण पूछा।  पहले मेने उन्हें ना बताने का नाटक किआ और जैसा मेने सोचा था दीक्षा ने मुझे सब सही से बताने को कहा। अब मैने दीक्षा को बताया की मै बहुत अकेला महसूस करने लगा हु और मुझे उसका साथ चाहिए। ऐसे ही बहुत देर बात करने के बाद मैने दीक्षा से डरते हुए उनकी चुदाई करने के लिए पूछ लिआ। 

दीक्षा दीदी शुरू में तो बहुत शरमाई और मुझे ऐसा ना सोचने के लिए कहा। पर मेरे थोड़ी सी जिद्द करने के बाद दीक्षा ने मुझे जगह बताने के लिए कहा जहा में उनकी चुदाई कर सकू। मैने अपने दोस्त से बात करने के बाद उसका फ्लैट एक दिन के मांग लिआ। अब मैने दीक्षा को फ्लेट पर आने को कहा और दिन के 2 बजे वह फ्लेट पर पहुंच गयी जहा में उनका पहले से ही इन्तजार कर रहा था। फ्लेट पर आते ही दीक्षा ने मुझे कहा की बताओ मुझे यहाँ को बुलाया है। अब मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था कुकी मेने कभी दीक्षा से आमने सामने बाते नहीं करि थी। 

जवाब देते हुए मेने उनसे कहा की मै आपसे बहुत प्यार करता हु और यही बताने के लिए मेने आपको आज यहाँ बुलाया है। 15 मिनट बाते करने के बाद मेने अपना हाथ दीक्षा के हाथो पर रख दिआ और बाते जारी रखी। अब हमारी नजदीकिआ बढ़ती जाने लगी और हम एक दूसरे के बहुत करीब आकर बाते कर रहे थे। मैने बिना कुछ सोचे अब अपने होठ दीक्षा दीदी के होठो से मिला दिए और उन्हें किस करने लगा। दीक्षा बह किस करने में माहिर खिलाडी थी जो मेरे होठो को जोर जोर से चूसे जा रही थी। हम अब बिस्तर पर एक दूसरे को निचे ऊपर करते हुए किस कर रहे थे।  

तभी मेने दीक्षा दीदी के टॉप में हाथ डाला और उनकी ब्रा का हुक पीछे से खोल दिआ। ब्रा से मुझे परेशान होता देख दीक्षा ने अपना टॉप ऊपर करते हुए उतर दिए और अब दीक्षा ऊपर से पूरी नंगी हो गयी थी। दीक्षा दीदी के बूब्स बहुत ही मोठे और रसीले दिख रहे थे उनपे मैने किस करते हुए चुसाई शुरू कर दी। दोनों हाथो से दीक्षा के बूब्स दबाते हुए मै उन्हें चूसे जा रहा था और दीक्षा मेरे बालो में हाथ डालते हुए मुझे उत्तेजित कर रही थी। 

अब थोड़ा निचे सरकते हुए मेने दीक्षा के पैंट का बटन खोलते हुए उसकी पैंट निचे सरका कर उतार दी। उस दिन दीक्षा ने काली रंग की पैंटी पहनी हुई थी जो की दीक्षा के चूत के पानी से भीग चुकी थी। पैंटी उतारकर मैने अब चूत पर अपने होठ रगड़ते हुए मैने उसे चाटना शुरू कर दिआ। दीक्षा बहुत ही उत्तेजित हो चुकी थी और बड़ी बड़ी आहे भर रही थी। मेरा सर पकड़ते हुए दीक्षा मुझसे अपनी चूत की चटाई करवाई जा रही थी।  

दूसरी तरफ मेरा लंड पूरी तरह सख्त हो गया था। अब मैने अपना लोडा दीक्षा के हाथो में दे दिआ और बिस्तर पर लेट गया। एक समझदार लड़की की तरह दीक्षा ने मेरा लोढ़ा अपने मुह्ह में लिआ और तेजी से चूसना शुरू कर दिआ। मेरा लंड अब अपने आखिरी चरम पर पहुंच चूका था और मैने देरी ना करते हुए अपना लंड हाथो में लिआ और दीक्षा दीदी को निचे लिटाते हुए उनकी छूट पर रख दिआ। बिना रेहम करते हुए मेने अपने लोडे पर एक जोर का धक्का लगाया और सीधा दीक्षा की चूत में घुसा दिआ। दीक्षा क चीखे निकलने लगी और वह अब रोने जैसी शक्ल बनाने लगी। 

दीक्षा की हालत अब बुरी हो गयी थी और वह मुझे रुकने के लिए कहने लगी। पर मैने उसकी एक ना सुनी और चूचिया दबाते हुए चुदाई जारी कर दी। दीक्षा अब जोर जोर से अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह नहीं की आवाजे निकलने लगी जिससे मुझे चुदाई में और मजा आने लगा। मै जोर जोर से दीक्षा की चुदाई करे जा रहा था और दीक्षा आहे भरती हुई बिस्तर पर लोटन मार रही थी। मुझे गले लगते हुए दीक्षा ने मेरी पीठ पूरी नाखुनो से नोचनी शुरू कर दी। यह उसकी चुदाई का एक अनोखा मंजर था जो में आज तक नहु भूल पाया हु। ऐसे ही मैने दीक्षा दीदी की चूत बहुत देर तक चोदी। 

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दीदी की गांड मारी और किआ किस्सा पूरा 

पर अभी भी मेरे लंड को सुकून नहीं मिला था और वही दीक्षा भी पूरी तरह हवस में होकर बिस्तर बार मुझसे चुद रही थी।  अब मैने दीक्षा को पलटते हुए उसे उल्टा लिटने को कहा और थोड़ा सा थोड़ उसकी गांड में लगा दिआ। अपन मेने अपना सख्त लंड गांड के छेद पर रखते हुए उसे अंदर घुसाया और थोड़ी तकलीफो के बाद मेरा टोपा दीक्षा की गांड में घुस गया। आगे पीछे करते हुए मेने अब दीक्षा की मोटी गांड चोदनी शुरू कर दी और कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड दीक्षा की गांड में समां गया और हम दोनों अब एक दूसरे को प्यार करते हुए चुदाई के मजे लेने लगे।  

उस दिन मेने और दीक्षा दोनों ने बहुत घंटो चुदाई करि और एक दूसरे को पूरी तरह पस्त कर दिआ। आज भी मै दीक्षा दीदी को अपने घर बुलाता हु और मौका मिलने पर खूब जोरदार चुदाई करता हु। तो यह थी आज की कहानी , हमें कमेंट करके जरूर बताये की आपको यह हवस से भरा हुआ किस्सा कैसा लगा। और भी नंगी कहानिआ पढ़ते रहने के लिए हमसे जुड़े रहे और वेबसाइट पर आते रहे। 

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