पड़ोसन की चुदाई का अलग मजा – 4

उनके चेहरे पर एक अलग ही प्रकार का सुकून था और वो ऐसे मुस्कुरा रही थीं जैसे उनकी मन मांगी मुराद पूरी हो गई हो। जब उन्होंने अपनी चूत का पानी लगा मेरा मुँह देखा तो मेरी तरफ हाथ दिया। 

मैंने जैसे ही उनका हाथ पकड़ा, उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और हम दोनों एक दूसरे में समां गए। हम दोनों ऐसे एक दूसरे को चूम और चाट रहे थे, मानो अलग ही न होना चाहते हों। अब मेरे लौड़े को बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा था। 

मेरा लौड़ा बिल्कुल एक भाले की तरह भाभी की चूत की गहराई में गोते लगाने को तैयार था। भाभी की चूत को चीरने के लिए मैंने उनकी तरफ कामुक निगाहों से देखा तो भाभी भी समझ गईं। 

वो मुझे अपने ऊपर लेकर अपने हाथ से मेरा लंड अपनी चूत के मुहाने पर लगाने लगीं। मैंने भी बिना समय गंवाए दबाव डाल दिया और मेरा लंड सरकते हुए भाभी की चूत में जाने लगा। 

भाभी जैसे किसी अनन्त आनन्द में हों, इस प्रकार अपनी आंखें बंद किए अपने दोनों हाथों से मुझे अपनी तरफ खींच रही थीं। उनकी कामुकता से ऐसे लग रहा था जैसे वो मुझे अपने अन्दर ही समा लेना चाहती हों। 

सास बहु ननद और चुदाई का रिश्ता – 2 

भाभी की चुत में समां गया मेरा लंड 

अब तक मेरा पूरा लंड भाभी की चूत की गहराई को नाप चुका था। मैंने अंतिम सिरे तक लंड को भाभी की चूत में पेल रखा था। भाभी की आंखों में आंसू आ गए थे। वो मीठे दर्द के और ख़ुशी के आंसुओं से मेरे लंड को अपनी चुत में लिए हुई थीं। 

अब देर न करते हुए मैंने जैसे ही पहला झटका मारा, भाभी ने मादक आज में जोर की आह भरी- आह्ह … उह्ह ह्ह … चोद दो मुझे … आंह और जोर लगा कर चोदो … पता नहीं इसने कब से अच्छी तरह से लंड नहीं खाया … अह मेरी चूत बहुत टाइम से भूखी और प्यासी है … तुम आज इसकी भूख और प्यास दोनों मिटाने के बाद ही रुकना जान! 

मैंने भाभी के इस उत्साह को देख कर अपने दोनों हाथों की कोहनियों को नीचे टिका दिया जिससे भाभी और मेरा बदन एक दूसरे से बिल्कुल चिपका हुआ था। हम दोनों पसीने में लथपथ थे, दोनों की सांसें इतनी तेज चल रही थीं कि हम उन्हें सुन सकते थे। 

अब मैं एक शिकारी शेर की तरह भाभी की चुदाई के साथ उनके होंठों को भी चूम रहा था और उनकी गर्दन व मम्मों पर काट रहा था। बीस मिनट की धकापेल के बाद अब मेरा माल निकलने वाला था। मैंने भाभी से कहा- मेरा होने वाला है। 

तभी भाभी ने कहा- हां मेरा भी होने ही वाला है। दोनों एक साथ अपना लावा निकालेंगे। ये सुनकर मैंने और जोर लगाया और झटकों की स्पीड बढ़ा दी। मैं अब थक चुका था पर भाभी मेरा साथ बराबर दे रही थीं इसलिए मैं भी टिका रहा और कुछ झटकों के बाद भाभी अकड़ने लगीं। 

सास बहु ननद और चुदाई का रिश्ता – 1

भाभी की चुत से रसने लगा पानी 

उनकी पकड़ और मजबूत होने लगी। मैं समझ गया कि भाभी को चरम आनन्द की प्राप्ति होने वाली है। मैंने भाभी को एक जोर का चुम्बन दिया और स्पीड बढ़ा दी। जोर के तीन झटकों के साथ हम दोनों ने एक साथ अपना लावा छोड़ दिया। 

उनका लावा इतना गर्म था कि मेरे लंड को महसूस हो रहा था। फिर भी मैं भाभी के ऊपर से अलग नहीं हुआ। उनके ऊपर ही चढ़ा रहा। मैं इतना थक गया था कि मुझसे हिला भी नहीं जा रहा था और इतना कुछ होने के बाद भी मेरी प्यास नहीं बुझी थी। 

इसलिए मैं भाभी के ऊपर चढ़े हुए ही उनको किस कर रहा था। हम एक दूसरे से ऐसे लिपटे हुए थे, जैसे हमारे शरीर एक ही हों। तभी मस्त भाभी ने कहा- कहां से सीखा इतनी अच्छी तरह करना? 

मैंने कहा- कहीं से नहीं सीखा, पर जितने उत्साह से तुम मेरा साथ दे रही थीं, मुझे जोश आता गया और मैं करता गया। भाभी ने मुझे एक जोरदार चुम्बन दिया और कहा- घोड़े जैसी ताकत है तुम्हारे अन्दर … बिल्कुल जान निकल देते हो। 

आज तुमने मुझे बिल्कुल निचोड़ कर रख दिया मेरी जान। उनकी ये बात सुन कर मैंने उन्हें फिर एक बार कसके अपनी बांहों में भर लिया और एक दूसरे को चूमने लगे। रात भर हम दोनों यूं ही नंगे जिस्म एक दूसरे के ऊपर नीचे होते रहे और सुबह होने के पहले भाभी ने अगली रात को घोड़ी बनकर चुदने का प्रस्ताव रख कर मुझे एक जोरदार चुम्बन लिया। इसी के साथ भाभी अलविदा कह कर चली गईं।   

Leave a Comment