पड़ोसन की चुदाई का अलग मजा – 2 

भाभी को समझ आ गया कि जल्दबाजी में उन्होंने गलती कर दी। थोड़ी देर वो चुप रहीं। मैंने फिर से पूछा- बताओ न … तुम्हें कैसे पता? वो कुछ नहीं बोलीं। अब मैं जिस मौके की तलाश में था, वो आ गया था। मैंने कहा- बताओगी या मैं बता दूँ? 

भाभी बोलीं- क्या बताओगे? मैंने कहा- यही कि तुम कौन हो और कहां रहती हो। ये सुनकर भाभी बोलीं- तुम्हें पता चल गया? मैंने कहा- हां। फिर मैंने पूछा- मुझसे आप क्या चाहती हो भाभी? तो भाभी ने कहा- बहुत सारी ख़ुशी। 

मैंने कहा- वो तो आपका पति देगा। मैं कैसे दे सकता हूँ। वो कुछ नहीं बोलीं। भाभी का पति किसी ट्रांसपोर्ट कम्पनी में रात की शिफ्ट में काम करता था तो वो बच्चे को सुलाने के बाद रात भर अपनी चूत ऐसे ही खुजला कर सो जाती थीं, जिसमें अब और ज्यादा तूफ़ान उठ चुका था। 

मैंने कहा- अगर आपके पति को पता चल गया कि आप बाहर ख़ुशी की तलाश कर रही हो, तब क्या करोगी? भाभी बोलीं- मैं तो नहीं बताऊंगी और वो तो वैसे भी रात भर बाहर रहता है। 

मैंने पूछा- क्या कर सकती हो मेरे लिए? भाभी ने दिल खुश करने वाला जवाब दिया। वो बोलीं- जो तुम बोलोगे वही होगा … जब बोलोगे जैसे चाहोगे, वैसे होगा। बस किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए, बदले में तुम जब जितना चाहो मजे कर सकते हो और मुझे भी मजे दे सकते हो। 

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भाभी ने खुला चुदाई का दिआ प्रस्ताव 

मेरी तो घर बैठे लॉटरी सी लग गई थी। मैंने भाभी से कहा- फिर कब आ रही हो? भाभी ने कहा- आना तो तुम्हें है, पता नहीं कहां चले गए हो। मैंने भाभी से कहा- बस कल का कुछ काम है, परसों शाम तक वापस भोपाल पहुंच जाऊंगा। 

भाभी ने ओके कहा। फिर मैंने कहा- तुम साड़ी में बहुत ही जबरदस्त लगती हो भाभी … कसम से। वो बोलीं- अच्छा तो कभी बोला क्यों नहीं। मैंने कहा- मुझे डर लगता था कि कहीं तुम अपने पति को न बोल दो, पर अब तो तुम खुद मेरे साइड हो, तो क्या डर। 

वो बोलीं- जल्दी आ जाओ, अब और नहीं रहा जा रहा। मैंने कहा- भाभी, तुम तैयारी करके रखो, परसों मिलता हूँ। भाभी बोलीं- क्या तैयारी? मैंने कहा- सब जगह की घास-फूस साफ़ कर लो … अब तो दंगल होगा। 

हां तुम जब मिलो, तो साड़ी पहनना। उन्होंने कहा- ठीक है। फिर मैंने फोन रखा और सो गया। अगले दिन मैंने अपने सारे काम निपटाए और उसके अगले दिन भोपाल के लिए निकल गया। 

रास्ते भर भाभी से फोन पर बातें करता रहा और रात में पति के ऑफिस जाने के बाद अपने बच्चे को सुला कर मेरे रूम पर रात 11 बजे का मिलने का टाइम फिक्स कर लिया। उस वक्त तक सब सो जाते हैं, तो किसी का कोई डर नहीं था। 

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भोपाल पहुंच कर करि भाभी से मुलाकात 

मैं भोपाल में अपने रूम पर पहुंचा तो मेरे नजरें भाभी को ही ढूंढ रही थीं। पर भाभी कहीं नजर नहीं आ रही थीं। थोड़ी देर बाद भाभी काली साड़ी पहने मेरे कमरे की तरफ चली आ रही थीं। 

आज उनकी चाल में कुछ मादकता नजर आ रही थी। भाभी ने साड़ी बिल्कुल नीचे से पहन रखी थी, जिससे उनका पूरा पेट और नाभि बिल्कुल साफ साफ़ दिख रहे थे। 

वे जब मेरे कमरे में आईं तो मैंने गेट बंद किया और बिना कुछ सोचे समझे, बिना कुछ बोले भाभी की कमर में हाथ डाल कर उन्हें अपनी ओर खींच लिया और एक जोरदार किस कर दिया। 

मैं अब अपने ही बस में नहीं था, पर मैं आगे बढ़ता, उससे पहले ही भाभी ने बोला- अभी नहीं, रात में आऊंगी … आराम से करना। पर मुझे अब सब्र नहीं हो रहा था। भाभी वापस चली गईं। मैं रात के 11 बजने का इंतजार कर रहा था। 

आज मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मैं कोई तपस्वी हूँ, जिसकी तपस्या भाभी रुपी मेनका ने भंग कर दी थी। मैंने रात को स्पेशल बनाने के लिए सोचा कि चलो कुछ खाने का इंतजाम कर लिया जाए। 

मैं दुकान पर गया, वहां से कोल्डड्रिंक चिप्स और एक बड़ी वाली डेरी मिल्क चॉकलेट खरीद लाया। मैंने गेट खोल रखा था, थोड़ी देर में मैंने देखा कि उनका पति ऑफिस के लिए निकल रहा था। मैं गेट पर ही खड़ा होकर भाभी का इंतजार करने लगा। पांच मिनट बाद भाभी अपने कमरे का दरवाजा बंद करके मेरे कमरे में आ गईं। 

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