भलाई के बदले मिली चुदाई, आंटी की दिआ चुदाई का तोहफा

यह बात आज से कुछ हफ्ते भर पहले की है और मै यह किस्सा आपको सुनाने जा रहा हु। यु तो मै एक बहुत ही हरामी लड़का हु पर कभी कभी अच्छे काम भी कर लिआ करता हु और इसी की वजह से मुझे चुदाई का मजा भी मिला। तो आये शुरू करते है। 

पिछले हफ्ते मै सुबह सुबह पार्क मै ही घूम रहा था और मै आपको बता दू की मै पुलिस की भर्ती के लिए तैयारी कर रहा हु। पार्क में घूमते हुए आज मुझे काफी देर हो गयी थी और मुझे बहुत पसीना भी आ गया था। 

आज रोज से ज्यादा देर भी हो गयी थी इसलिए शायद उस समय 8:30 बज रहे थे। मै पार्क से निकलने ही वाला था की तभी मेने पार्क के एक कोने में एक आंटी को लेटा हुआ देखा। पहले मुझे लगा की वह थक कर आराम कर होंगी फिर मेरे दिल से एक आवाज आयी और मै उन्हें देखने चला गया। 

आंटी के पास जाकर मेने देखा की वह तो बेहोश हो रखी थी और उनकी आंखे भी बंद हो गयी थी। मै एकदम से बहुत ही ज्यादा घबरा गया और आसपास देखने लगा। मेर चारो तरफ कोई भी नहीं था इसलिए अब सबकुछ मुझे ही करना था। 

मेने आंटी को उठाने के लिए जल्दी से अपनी बॉटल में से थोड़ा था पानी अपने हाथ में लिआ और उनके मुह्ह पर फेका। कुछ देर में आंटी भी होश में आ गयी और मुझसे पूछने लगी की  मै को हु। 

अब मेने उन्हें सबकुछ शुरू से बताया और वह मेरी इस अच्छाई से काफी प्रभावित हो गयी। वह बहुत थी की मेने उनकी मदद करि और वह इस ज़माने में ऐसी चीज किसी से उम्मीद भी नहीं कर सकती। 

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आंटी ने किआ शुक्रिआ एक अलग ही अंदाज में

अब शायद 9 बज चुके थे और मै घर जाने के लिए भी बहुत लेट हो गया था। मेने आंटी से अब विदा लेने की कही तो आंटी ने मुझे रोका और उन्हें उनके घर तक छोड़ने के लिए कहा। 

इतना करने के बाद अब मै उन्हें मना भी नहीं कर सकता था इसलिए मै उन्हें उनके घर लेके चला गया। आंटी का घर पार्क के पास में था जो की दिखने में बहुत बड़ा था और आंटी भी अब मुझे काफी अमीर लग रही थी। 

आंटी के घर में कोई भी नहीं था क्युकी अंकल शायद शहर से ही बाहर गए हुए थे। अब आंटी सोफे पर बैठ गयी और मुझे भी  बैठने को बोला। अब आंटी ने मुझे कहा की जबतक वह मुह्ह हाथ धोके आती है मै पानी पी लू जो मेरे सामने ही रखा था। 

मुझे घर जाने की जल्दी भी हो रही थी पर मुझे अब आंटी के पेसो का लालच आ गया था। मै आराम से वही बैठा हुआ था और अब आंटी कुछ देर बाद सीधा नाहा कर गीले बालो में मेरे पास आकर बैठ गयी। 

आंटी का बदन बहुत अच्छा महक रहा था और अब आंटी ने मुझे शाबाशी देना शुरू किआ और मुझे शुक्रिआ करने लगी। आंटी ने कहा की वह घर में अकेली रहती है और आज मै नहीं होता तो वह शायद हॉस्पिटल पहुंच ही जाती। 

मै सब सुन रहा था और अब आंटी ने मेरे पास आते हुए मुझे आशीर्वाद दिआ और मेरे माथे और गाल पर किस कर दिआ। मै थोड़ा सा गरम हो गया और आंटी को देखने लगा। मै वही बैठा हुआ था की आंटी ने अब मुझ से कहा की मुझे गिफ्ट में क्या चाहिए। 

मेने शुरू में मना किआ पर आंटी के बार बार बोलने पर मेने आंटी से कहा की मुझे उनका आशीर्वाद अच्छे से चाहिए जो अभी उन्होंने मुझे दिआ था। मुझे लगा नहीं था की आंटी मेरा मतलब समझ जाएँगी पर वह एक ही बार में मेरी बात लेके हसने लगी। 

अब आंटी ने कहा की वह तो मुझे मिल ही जायेगा इसके आलावा मुझे और क्या चाहिए।  मेने थोड़े से पैसे मांगे और आंटी ने अब मुझे पांच हजार रुपए दे दिए और मुझे कहा की यह ले लो। 

अब मुझे बस आंटी की लेनी थी जिसके लिए मेने आंटी से कहा की मुझे अभी अब चलना चाहिए। आंटी ने मुझे रोका और कहा की आशीर्वाद लिए बिना ही जा रहे हो क्या। मै अब फिर से वही बेठ गया और अब आंटी कुछ देर बाद मेरे पास आकर बैठ गयी। 

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आंटी से ली तोहफे में चुदाई 

अब आंटी ने शुरू में मेरे गालो पर चुम्बन किआ और रुक गयी और मेने अपनी शक्ल उदास सी कर ली जिसके बाद आंटी ने अब मेरा पूरा चेहरा चुम्बन से भर दिआ और अब आंटी ने मेरे होठो को अपने होठो से मिलाया। 

यह एहसास बहुत अछा था। आंटी के होठ बहुत ही नरम थे जिनसे वह मेरे होठो चूसे जा रही थी और मै भी उनका साथ दे रहा था।  अब थोड़ी देर बाद आंटी मुझे अच्छे से प्यार करने लगी और मेरे कपडे निकालना शुरू कर दिए। 

सोफे पर ही आंटी ने मेरे बदन को चूमते हुए मेरे लंड को पकड़ लिआ और उसे पजामे से निकाल लिआ। आंटी ने मेरा लंड अब खड़ा कर लिआ और उसे चूसते हुए उन्होंने मेर लंड अपने मुह्ह में ले लिए। 

आंटी बहुत ही अच्छे से मेरा लंड चूस रही थी और अब आंटी अपनी मैक्सी में ही मेरी गोद में बैठ गयी। मेरे लंड पर आंटी की गांड रगड़ रही थी और आंटी मुझे चूमे जा रही थी। 

अब आंटी ने अपनी मैक्सी निचे से उठायी और मेरे लंड को अपनी चुत में ले लिआ। आंटी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना था और मेरा लंड सीधा उनकी चुत में घुसता चला गया। 

अब आंटी ने मेरे लंड पर कूदना शुरू कर दिआ और आंटी की चुत में मेरा लंड मस्त अंदर बाहर होता रहा। आंटी को भी मजा आ रहा  था और आंटी जोर जोर से मेरे लंड को अपनी चुत में लिए जा रही थी। 

अब मेरा लंड पानी निकालने वाला था की आंटी ने मेरी और देखा और मेरे लंड से उतरते हुए उसे अपने मुह्ह में लेकर चूसने लगी। एकदम से मेरे लंड से जोर की पिचकारी निकली और आंटी ने मेरा सारा वीर्य पी लिआ। 

उस दिन के बाद आंटी से मेरा अलग ही रिस्ता बन गया और मेने आंटी की चुत चुदाई कई बार करि। 

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