पहाड़ो में चुदाई का मजा – 2

वो मेरे पास आयी और मुझे स्कूटी पे जल्दी से बैठ जाने को कहा। मैं भी चुपचाप बैठ गया। दोस्तो, लड़की आपकी बाइक के पीछे बैठे या आप लड़की की स्कूटी के पीछे, मज़ा दोनों में ही आता है। उसने अपने घर से कुछ दूर मुझे उतरने को कहा। 

उसने कुछ दूर से अपना घर दिखाया और कहा- मेरे पड़ोसी देख लेंगे तो पापा से शिकायत कर देंगे। इसलिए जब कॉल करूं, तब आना, मैं आगे का गेट खुला छोड़ दूंगी। अब तक 1-30 बज चुके थे और सुबह से मैं भूखा था और चूत चोदने की भूख वो अलग लग रही थी। 

खैर 5-7 मिनट बाद उसका कॉल आया- जल्दी से आ जाओ अभी कोई नहीं हैं आस पास! मैं भी बिना देर किये उसके घर में चला गया। दिव्या- अच्छा तुम फ्रेश हो लो, मैं तुम्हे अपने भाई के कुछ कपड़े निकाल देती हो, शायद तुम्हें आ जायेंगे। 

मैं- ठण्ड और भूख से गांड फटी पड़ी हैं और तुम्हे फ्रेश होने की पड़ी है। दिव्या- अच्छा ठीक है, पहले खाना खा लो उसके बाद फ्रेश हो लेना। मैं- ठीक है। उसने मुझे खाना परोसा और मैंने ठूंस ठूंस कर खाया। 

उसके बाद उसने अपने भाई की टी-शर्ट और लोअर निकाल के मुझे दी और कहा- फ्रेश हो लो। मुझे चूत की तलब लगी थी और ये मुझे ठण्ड में फ्रेश होने भेज रही थी। फिर सोचा कि सब्र का फल मीठा होता है।

चुत की खुजली ने दिआ प्यार का दर्द – 1

होठो से मिल गए दोनों के जिस्म 

तो मैं चला गया। जैसे ही मैं फ्रेश होकर बाथरूम से बाहर निकला, अचानक दिव्या आकर मुझसे लिपट गयी और जोर से मुझे अपने गले लगा लिया। उसकी सांसें मुझे गरम महसूस हो रही थी। 

मैंने भी देर ना करते हुए उसके तपते होठों पर अपने होंठ रख दिए और उसके रसीले होंठों को चूसने लगा। वो भी मेरा साथ दे रही थी। अब मेरा एक हाथ उसकी चूचियों की गोलाइयों को नापने लगा, अब मैंने उसके टॉप को कंधों से नीचे सरकाया और उसकी गर्दन और कंधों को चूमने लगा। 

करीब 10 मिनट तक हम दोनों इसी चुम्माचाटी में लगे रहे। मैं जैसे ही उसका टॉप उतारने लगा तो वो मुझे रोकते हुए बोली- यहाँ नहीं, अंदर बेड पर चलते हैं। अब मुझे ध्यान आया कि हम तो बाथरूम के बाहर ही खड़े हैं जो एक कॉमन बाथरूम था। 

मतलब उनके अटैच्ड बाथरूम नहीं थे। अब मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और उसे लेकर बेडरूम में गया, बेड पर लिटा दिया और खुद के उसके ऊपर आ बैठा और उस पर टूट पड़ा। उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी और मुझे लिटाकर मेरे ऊपर आ बैठी। 

मेरी छाती पर वो धीरे धीरे अपने होंठ और जीभ चलाने लगी। उसका ऐसा करना मुझे रोमांचित कर रहा था। मैंने भी उसके टॉप को धीरे से उतार दिया, अंदर उसने रेड ब्रा पहनी हुई थी जो उसकी गोरी और मदमस्त चूचियों को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। 

देर ना करते हुए मैंने उसकी ब्रा का हुक खोल कर उसकी चूचियों को आज़ाद कर दिया जो उसके मेरे ऊपर होने की वजह से मेरे चेहरे से आ टकराये। और मैं बारी बारी उसके दोनों आमों का रसपान करने लगा। 

अब तक मेरा लंड सख्त हो चुका था जो मेरे ऊपर बैठी दिव्या को काफी देर से चुभ रहा था। मैंने उसे लपक के अपने नीचे ले लिया और उसकी चूचियों को चूसने लगा। धीरे धीरे मैं नीचे आया और उसके लोअर को धीरे से उतार दीया। 

चुत की खुजली ने दिआ प्यार का दर्द – 2

पहली चुदाई करके सील तोड़ने का मिला मौका 

अब लाल पेंटी में उसकी चूत मुझे आमंत्रित कर रही थी, उसकी पेंटी उसके कामरस से भीग चुकी थी। मैंने देर ना करते हुए उसे भी उतार फेंका। अचानक पेंटी उतर जाने से दिव्या शर्माने लगी और अपने दोनों हाथों से अपनी बिना बालों वाली चूत छुपाने की कोशिश करने लगी। 

मैंने उसके हाथों को हटाया तो उसने अपना चेहरा दोनों हाथों से छुपा लिया। मेरे सामने वो नंगी पड़ी थी, उसकी गोरी चूत देख कर मुझसे रुका नहीं गया और मैंने अपने होंठ उसकी चूत के होंठों पर रख दिए और चूसने लगा। 

दिव्या जो पहली बार चूत चुसाई का मज़ा ले रही थी। उसकी सिसकारियों से कमरा गूँज उठा। वो सिसकारियां लेते हुए कह रही थी- आह अर्जुन … ऐसे ही करते रहो, मज़ा आ रहा हैं, ऐसा मज़ा कभी नहीं आया। 

आह आअह्ह! उसकी कामवासना इतनी बढ़ गयी थी कि वो अपने हाथों से मेरे मुंह को अपनी चूत पर दबाने लगी और कुछ देर बाद उसने अपना कामरस छोड़ दिया, जो कुछ कसैला और नमकीन था, जिसे मैं आखिरी बूँद तक चाट गया। 

अब मैं उसकी छाती पे आके बैठ गया और उसे अपना लंड चूसने को कहा पर उसने मना कर दिया। मैंने उसे सिर्फ एक बार चूस लेने के लिए कहा पर वो नहीं मानी, कहने लगी- अर्जुन प्लीज, ये मुझसे नहीं होगा। 

मुझे थोड़ा गुस्सा आया पर सोचा चलो पहले सील का उद्घाटन कर दूँ उसके बाद मुखमैथुन भी कर लेगी। फिर मैंने उसके बेड के पास ही पड़ी कोल्ड क्रीम उठायी और अपने लंड और उसकी चूत को चिकना कर लिया। 

वो बोली- जानू, प्लीज धीरे करना, मेरा पहली बार हैं। मैंने कहा- मेरी जान थोड़ा दर्द तो होगा, पर मैं प्यार से करूँगा। अब मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी चूत पे रखा और हल्का सा धक्का लगाया। 

मेरा सुपारा उसकी चूत में फंसा ही था कि उसने मुझे धक्का देकर गिरा दिया और कहने लगी- बहुत दर्द हो रहा हैं, मुझे नहीं करना। मेरा तो दिमाग ख़राब हो गया, पहले लंड नहीं चूसा … अब नखरे कर रही है। 

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