सेक्स की एक लम्बी कहानी और वासना – 2

जैसा की अपने पढ़ा मेरे चुदाई के अरमानों को भी मानो उन शब्दों ने कहा हो- सॉरी रॉंग नंबर। मैंने सिगरेट बुझाई, बाइक स्टार्ट करी और अपने घर की तरफ पंहुचा, बाइक पार्किंग में खड़ा कर के लिफ्ट की तरफ जाने लगा। 

जाते जाते मेरे दिमाग में दो बातें थीं कि खाने में क्या बनाना है और दूसरी ये कि मुझे फ़ोन नहीं करना चाहिए था। मैंने लिफ्ट बुलाने का बटन दबाया और नीचे आती हुई लिफ्ट का इंतज़ार करने लगा। 

तब मैंने सोचा कि उसको व्हाट्सप्प में सॉरी लिखूं। जब तक मैंने व्हाट्सप्प खोला, लिफ्ट नीचे आ चुकी थी। मैंने लिफ्ट के अंदर जाते जाते सौम्या का व्हाट्सप्प नंबर खोला और मैं चौंक गया। 

उसने शायद मेरा नंबर सेव कर लिया था, उसकी व्हाट्सप्प प्रोफाइल पिक्चर मैं देख पा रहा था। लिफ्ट बंद हो गयी थी और नेटवर्क भी! मुझे अहसास हुआ कि मैंने अंदर जाकर सातवें माले के लिए बटन नहीं दबाया। 

और फिर पीछे घूम कर लिफ्ट को ऊपर जाने का आदेश दिया। मैं बहुत ही उत्सुक था, खुद को बादशाह मसहूस कर रहा था। दोस्तो, फोटो में उसने सिंगल पीस पहना हुआ था। शरीर को इस तरह मेन्टेन कर रखा था कि अहसास हो गया कि उम्र संख्याओं का खेल है। 

फिर व्हाट्सप्प स्टेटस की कुछ पंक्तियों ने मेरा रास्ता मानो आसान कर दिया। वो पंक्तियाँ थीं का से कहें ये मन की बतियाँ एक आस है उनके पास की! शायद ये उसके अपने लिखे दर्द थे। 

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व्हाट्सप्प पर कर दिआ मैसेज चुदाई के लिए

लिफ्ट सातवें माले में पहुंच गयी थी। मैं वहाँ से चलते चलते मोबाइल के सिग्नल के आने का वेट कर रहा था। मैंने ताला खोला और अपने फ्लैट में दाखिल हुआ। तब तक फ़ोन में नेटवर्क भी आ गए थे। 

घड़ी की तरफ देखा, तब लगभग रात के दस बजने वाले थे। मैंने बैग एक तरफ रखा, कपड़े उतारे और पंखा चालू कर अपने बेड में लेट गया। अब बारी थी उसको सॉरी लिखने की! पर किस तरह? ये समझ नहीं आ रहा था। 

लिखते मिटाते कुछ सोचने की मशक्कत के बाद मैंने लिखा- माफ़ कीजियेगा, आपका नंबर मेरे फ़ोन पर पता नहीं कैसे सेव था। और मैंने आपको सौम्य की बहन सोचकर बात करी। 

इसके बाद भी मैंने लिखा- और आपकी आवाज सच में बहुत सुन्दर है। पर ये मैंने तीन बार लिखा और तीनों बार कुछ सोचकर काट दिया। अंत में मैंने तारीफ़ वाले शब्दों को माफीनामे से काट दिया। 

मैसेज भेजने के बाद मैं कई बार उसकी फोटो को देख रहा था और कई बार ये चेक कर रहा था कि उसने मेरा मैसेज पढ़ा या नहीं। मैं पता नहीं कब बिना खाये ही सो गया। पर लगभग 1 बजे के आस पास मेरी नींद खुली। मुझे प्यास लगी थी। 

मैं किचन की तरफ गया और पानी साथ लेकर दोबारा बिस्तर की तरफ गया। मैंने वक्त देखने के लिए फ़ोन उठाया। मेरे व्हाट्सप्प में नोटिफिकेशन ट्रे में एक मैसेज आया हुआ था। 

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सौम्या भी थी हवस की प्यासी

मेरा ध्यान अचानक से सौम्या को करे मैसेज के रिप्लाई की तरफ गया और मैंने अपना व्हाट्सप्प खोला। पर मुझे निराशा ही हाथ लगी। वो मैसेज मेरी मम्मी का था शुभ रात्रि का फार्वर्डेड! पर एक चीज देखते ही मुझे सकून मिला कि सौम्या ने मेरा मैसेज पढ़ लिया था। 

और जब मैंने उसकी व्हाट्सप्प प्रोफाइल खोली तो पता चला वो अभी ऑनलाइन है। अब मैं इस उधेड़बुन में पड़ गया कि आगे क्या करूँ,किस तरह बात को आगे बढ़ाऊं। मैंने गैलरी से अपनी ही लिखी एक कविता फारवर्ड कर दी। 

कुछ ही पलों में एक मैसेज आया- वाह तो लेखक साहब अभी सोये नहीं? अचानक के इस तरह के मैसेज ने मेरे मन में एक सवाल खड़ा किया कि कहीं कमलेश ने तो नहीं इसे मेरे बारे में बता दिया? क्या पता उसकी बात होती हो? 

मैंने बिना कुछ सोचे एक सवाल के साथ जवाब दिया- नहीं अभी ही उठा था पर आपको कैसे पता कि मैं राइटर हूँ? “जब आपका कॉल आया था तब ट्रू कॉलर में आपका नाम दीपक राइटर लिखा हुआ आया था। 

फिर आपका सॉरी मैसेज देखा, तब सोचा, अभी रात हो गयी है आप सो रहे होंगे। तब रिप्लाई नहीं किया।” उसने लिखा। जिस पर मैंने कहा- अच्छा मैं राइटर हूँ इसलिए आपने मेरा नंबर सेव किया, कुछ लिखवाना है क्या? 

मेरे इस सवाल का जवाब पल भर में आया- हाँ शायद … वरना एक अकेली औरत के पास कितने ऐसे रॉंग नंबर आते हैं आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते। इतना बोलने के बाद मैं उसका रिप्लाई करूँ … इससे पहले उसका मैसेज आ गया- वैसे लिखवाना तो मुझे था, पर एक सवाल है, वैसे मुझे उसका जवाब पता है पर फिर भी सवाल तो है।

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