भट्टी जैसी भाभी की चुत – 1

आज मैं अपनी पहली चुदाई की कहानी लिख रहा हूँ, चालू भाभी की गरम कहानी में कोई ग़लती हो जाए … तो माफ़ कीजिएगा। मेरी बुआ के बेटे की अभी लॉकडाउन में शादी हुई थी परन्तु मैं लॉकडाउन के कारण शादी में जा नहीं सका था। 

लॉकडाउन खत्म होने बाद मैं बुआ के यहां गया क्योंकि बुआ ने बुलाया था। मुझे उस समय इस बात का गुमान ही नहीं था कि वहां मेरा चुदाई का सपना पूरा होने वाला है। जब मैं घर पहुंचा, तो बुआ और भाभी घर में थीं। 

मैं तो भाभी को देख कर उनको चोदने के बारे में सोचने लगा। भाभी इतनी बला की खूबसूरत थीं कि क्या बताऊं। वो मुझे देख कर शर्मा रही थीं। तभी बुआ ने कहा- ये तेरा देवर है, ऐसे क्यों शर्मा रही है, जा पानी ले आ। 

तेरा देवर दूर से आया है। मैं तो बस भाभी को जाते हुए उनकी गांड देख रहा था। क्या सेक्सी गांड थी भाभी की! तभी बुआ ने पूछा- घर पर सब कैसे हैं? तब मेरा ध्यान वहां से हटा। 

मैंने कहा- बुआ, ठीक है सब! मैं सकपका गया था। इतने में भाभी पानी ले आईं। मैंने पानी लेते वक्त उनका हाथ दबा दिया। वो मुस्कुरा कर चली गईं। मैं समझ गया कि भाभी चालू माल हैं, इनको पटाने में ज्यादा देर नहीं लगेगी। 

रात को खाना खाते टाइम मैं बस उन्हें ही देख रहा था। वो भी मुझे देख कर मुस्कुरा रही थीं। मैंने उनको देख कर आंख मार दी तो वो शर्मा गईं। फिर मैं खाना खाकर छत पर चला गया। उसी समय भाई का फोन आया कि आज वो घर नहीं आ पाएंगे, वो किसी दोस्त की पार्टी में हैं। 

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भाभी के बूब्स पर टिक गयी नजर 

मैं ख़ुशी से झूम उठा और नीचे भाभी को देखने चला गया कि वो क्या कर रही हैं। भाभी रसोई में थीं। मैं वहां जाकर उनसे बातें करने लगा। वो बोलने लगीं- आप शादी में क्यों नहीं आए थे? तो मैंने बताया कि मैं तो आने को बेकरार था भाभी, मगर इस साले लॉकडाउन ने सब काम बिगाड़ दिया था। 

भाभी बोलीं- कोई बात नहीं, अब आ गए हो तो रुक कर जाना। मैंने भी कह दिया- भाई यहां है नहीं मैं क्या करूंगा यहां रुक कर … अकेले में मेरा मन ही लगेगा। कोई साथ तो होना चाहिए, जो मौज मस्ती करवा सके। 

भाभी ने इठला कर कहा- तुम अकेले कहां हो। मैं हूँ न आपको कंपनी देने के लिए। मैंने कहा- वाह … आप जैसी खूबसूरत भाभी साथ होंगी, तो क्या बात है। वो मुस्कुरा दीं। कुछ देर बाद भाभी का रसोई का काम खत्म हो गया। 

तो वो मुझसे बोलीं- चलो हॉल में चलो, वहां चल कर बातें करते हैं। मैं तो बस उनके बूब्स को देखे जा रहा था। वो भी ये समझ रही थीं। उन्होंने मुझे अपने मम्मे ताड़ते हुए देख लिया था। 

हम दोनों बाहर हॉल में आकर सोफे पर बैठ गए और बातें करने लगे। भाभी ने एकदम से पूछा- तुम इतनी देर से क्या देख रहे हो? मैं सकपका गया कि अब तो पकड़ा गया। मैंने कहा- कुछ भी नहीं भाभी। 

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भाभी थी पहले से चुड्डकड 

भाभी ने कहा- सच बताओ क्या देख रहे हो? मैंने कहा- बताऊंगा तो आप बुरा मान जाएंगी! भाभी ने कहा- बोलो तो सही … मैं कुछ नहीं कहूँगी। मैंने भी एकदम से बोल दिया- आपके बूब्स देख रहा था भाभी … सच में आप बहुत सेक्सी माल हो। 

भाभी हंसने लगीं और बोलीं- अच्छा मैं माल लगती हूँ … हांआ।।! मैंने कहा- खाली माल नहीं भाभी … आप कांटा माल हो … सीधे दिल में चुभ गई हो। भाभी- और तुम ये बताने में डर रहे थे! भाभी ने ये कहते हुए अपने मम्मे मेरे सामने तान दिए। 

मैंने सिर्फ उनकी तनी हुई चूचियों को आंखों से चोदा और उनकी तरफ देख एक गहरी आह भरी। मैंने आगे कहा- सच में भाभी बड़ी रसभरी हैं … बड़ा दिल कर रहा है। 

भाभी सिर्फ अपनी चूचियों को मेरे सामने दिखाती रहीं और आगे बोलीं- और क्या अच्छा लगता है आपको मेरे अन्दर! मैंने कहा- भाभी मैं आपकी मटकती गांड भी देख रहा था। भाभी बोलीं- ह्म्म्म …। 

बस देखोगे ही या कुछ आगे भी सोचा है! मैंने कहा- बिना आपकी हरी झंडी के मैं कैसे कुछ कर सकता हूँ भाभी। भाभी- ओके अगर तुम मुझे टच करना चाहो, तो कर सकते हो … मैं कुछ नहीं कहूँगी। 

मैंने सोचा कि ये तो बहुत बड़ी वाली चुड़क्कड़ भाभी है। अब मैंने सीधे भाभी को अपनी बांहों में ले लिया और उनके होंठों पर किस करने लगा। भाभी कटी हुई डाली की तरह मेरे आगोश में आ गिरी थीं। 

उन्होंने एक बार ज़रा सी भी नानुकुर नहीं की। उल्टा वो मेरा साथ देने लगी थीं। मैंने समझ लिया कि भाभी की तरफ से ग्रीन सिग्नल है। मैं उनकी चाहत को समझ कर आगे बढ़ने लगा, उनके पूरे बदन पर किस करने लगा। फिर वो बोलीं- बेडरूम में चलो, इधर तुम्हारी बुआ कभी भी मन्दिर से आ सकती हैं।

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