बीवी की चुदाई की प्यास – 1

फ्रेंड्स, मैं स्वप्निल झा आपको अपनी निम्फ़ो बीवी की चुदाई की कहानी मेरी कमसिन बीवी मेरे दोस्तों से चुद गयी सुना रहा था। निम्फो के बारे में आप गूगल कर सकते हैं। 

किसी भी निम्फो लड़की या औरत की चुदाई की प्यास इतनी अधिक बढ़ जाती है कि एक मर्द से उसकी प्यास बुझती ही नहीं है। मेरी चुदाई कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा था कि मेरी बीवी को मेरे चार दोस्तों से चुदे हुए चार दिन हो गए थे। 

इस दौरान मैंने भी उसे नहीं चोदा था। अब आगे यंग वाइफ हार्डकोर सेक्स कहानी: चार दिन तक मेरे उन चारों आकाओं में से किसी का कॉल नहीं आया और ना ही मैंने उनको कॉल किया।

 मैं उनके सामने अपने आपको शर्मिंदा नहीं करना चाहता था। क्योंकि सच तो उन्हें भी पता था कि वो लोग अरुणिमा को हचक चोद गए थे और मैंने कोई बात की, तो वो मुझे नीचा दिखने की कोशिश जरूर करेंगे। 

इसलिए मैंने उनसे दूरी बनाना ही उचित समझा। अरुणिमा चार दिन तक घर में नंगी ही घूमती रही पर मैंने उसकी हालत को समझते हुए उसे परेशान नहीं किया। 

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बीवी को चोदने का नहीं करता था मन

इस दौरान एक दो बार उसने मेरे मुँह में अपनी चूत लगा कर चटवाई और पानी निकलवा कर अलग हो गई। उसकी वासना भड़क उठती थी मगर मैं उसके शरीर की हालत देख कर उसे नहीं चोदता था। 

मुझे क्या मालूम था कि मैं कितना गलत सोच रहा था। मेरी बीवी की चुदास काफी बढ़ने लगी थी और मैं उसे अपनी गलत सोच के कारण चोद नहीं पाया था। चौथे दिन रात में ग्यारह बजे मेरा मूड बन गया और मैंने उसके बदन से खेलना चालू किया। 

उसने भी ज़रा सा नानुकर नहीं किया और मुझे अपने बदन से खेलने देती रही। अभी मैं अपने कपड़े उतार कर फ्री ही हुआ था कि दरवाजे पर घंटी बजी। मैं आने वाले को कोसते हुए उठा और टॉवल लपेट कर दरवाजा खोलने गया। 

दरवाजे पर शमशुद्दीन जी खड़े थे, उन्होंने मुझे चार फाइलें दीं और चैक करने का कहा। उन्होंने कहा कि ये उनके वादे अनुसार चार कामों की फाइलें हैं। मैंने ‘हम्म’ करके फाइल्स ले लीं। 

उन्होंने मुझसे कहा- अभी फाइल चैक कर लो, कुछ और काम निकला, तो सुबह पीए से भिजवा देंगे। मैं बरामदे में बैठ कर फाइल चैक करने लगा। वो भी सामने बैठ गए लेकिन थोड़ी देर बाद वाशरूम की बोले। 

मैंने सर हिला दिया और वो अन्दर चले गए। लगभग बीस मिनट तक जब वो बाहर नहीं आए, तो मैं उनको ढूंढते अन्दर गया। वो टॉयलेट में नहीं थे … ना बाथरूम में! तो मैं ढूंढते ढूंढते बेडरूम में पहुंचा। 

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बीवी की चुदाई करने लगा कोई और

उधर देख कर हक्का बक्का रह गया। शमशुद्दीन नंगे होकर अरुणिमा के मम्मों को मसल रहे थे, अरुणिमा खिलखिला रही थी और शमशुद्दीन जी का लंड अरुणिमा की चूत में फंसा था। 

वो अरुणिमा के दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूस रहे थे। मुझे आया देख कर भड़क कर बोले- साले भड़वे! देख नहीं रहा, मैं तेरी बीवी के साथ बिजी हूँ। बाहर जा और वेट कर! अरुणिमा मुस्कुरा दी और उसने मुझे बाहर जाने का इशारा कर दिया। 

मैं अनमने मन से बाहर आकर सोफे पर बैठ गया। मेरा मन नहीं मान रहा था कि मैं अरुणिमा को अन्दर शमशुद्दीन जी से चुदते हुए छोड़ कर बाहर बैठ कर उनके चुदाई ख़त्म कर आने का इंतज़ार करूं। 

मैंने फिर से उठ कर अन्दर झांका तो देखा कि शमशुद्दीन जी अरुणिमा की जांघें पकड़ कर ताबड़तोड़ उसकी चूत चोद रहे थे। उनकी आंखें बंद थीं और वो मेरी बीवी की टाइट चूत का पूरा मज़ा ले रहे थे। 

मेरा मन उनको रोकने और यहां से चले जाने को बोलने का था पर मेरी बीवी मजे से लंड ले रही थी और उसकी ख़ुशी देख कर मैं चुप रहा। फिर शमशुद्दीन जी की घनिष्ठता विश्वेश्वर जी से थी और मैं विपरीत परिणामों से परहेज कर रहा था। 

सच तो ये था कि इन चारों से मैं सीधे तौर पर उलझना ही नहीं चाहता था इसलिए मन मार कर मैं बाहर आ गया। बीच बीच में मैं अन्दर झांकता था तो कभी वो रुक कर अरुणिमा के निप्पल्स चूस रहे होते, तो कभी उसके होंठों को चूम चूस रहे होते और कभी चूत चोद रहे होते। 

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