रस्ते में मिली लड़की ने दी चुत – 2

तुम्हें मेरी गोद में बैठना होगा। वो एक बार मुस्कुराई और तुरंत मान गई। वो मेरे कड़क लंड पर बैठने को तैयार थी। मैं पीछे को सरक कर बैठ गया और वो मेरे लौड़े पर बैठने ऐसे आ गई मानो आज उसका चुदाई का दिन था। 

उसकी नर्म नर्म गांड मेरे कड़क लंड के ऊपर जम गई। मुझे बेचैनी होने लगी और एक सिगरेट की तलब होने लगी। मैं डेशबोर्ड पर रखी सिगरेट की डिब्बी उठाने लगा। वो बोली- अब सिगरेट पियोगे कि मुझे चलाना सिखाओगे? 

मैंने कुछ नहीं कहा बस उसकी नर्म गांड का अहसास करता रहा। कार की खिड़की का शीशा नीचे करके मैंने सिगरेट सुलगाई और कश लेने लगा। वो कुछ नहीं बोली और मेरे सीने से टिक गई। 

थोड़ी देर बाद मैंने उसको पीठ पर चूमना चालू कर दिया। साइड से उसके मम्मों को छूना और दबाना शुरू कर दिया। वो भी समझ रही थी। उसने मुझसे कहा- लाओ सिगरेट मुझे दे दो और कार चलाना सिखाओ। 

मैंने सिगरेट उसे पकड़ा दी और मुझे चौंकाते हुए उसने खुद सिगरेट पीना शुरू कर दिया। मेरे दोनों हाथ खुले थे तो मैंने उसके दोनों मम्मों पर हाथ जमा दिए और सहलाने लगा। वो आह आह करने लगी। अब मैंने उसके गले और गाल को चूमना शुरू कर दिया। 

वो भी खुश थी क्योंकि वो अपनी कामना पूरी कर रही थी। मैंने उसकी टांगों के बीच में हाथ लगाया, तो उसकी चुत के पास गीला हो गया था। मैंने चुत को रगड़ना चालू कर दिया। वो समझ गई और कसमसा कर बोली- भाईजान ये क्या कर रहे हो? 

बेहेन को चोद कर किआ खुश – 1 

लंड पे बैठाकर पीछे से दबाये चुचे 

मैंने बोला- कुछ नहीं … तुमको मजा दे रहा हूँ। मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया था और उसकी गांड में चुभ रहा था। वो भी गर्माने लगी थी और उसने अपनी गांड को एक दो बार मेरे लंड पर रगड़ कर मुझे हरी झंडी दे दी। 

उसकी गांड के बीच में मेरा लंड अटक गया था। अब मैंने गाड़ी स्टार्ट कर दी और उससे कहा कि तुम बाद स्टेयरिंग पर हाथ रख लो। उसने हाथ में दबी सिगरेट बाहर फैंक दी और अपने हाथ स्टेयरिंग पर जमा दिए। 

अब मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी सलवार के अन्दर डाला और उसकी पैंटी के ऊपर से चूत पर रख दिया, तो वो सीत्कार उठी। अब गाड़ी आगे चलने लगी थी। मैं अपना हाथ उसकी चुत में और ज्यादा रगड़ने लगा। 

मैंने अचानक से अपना हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाला और चूत को टच कर दिया। ये महसूस करते ही उसने अचानक से पैर ब्रेक पर रख दिया और झटके में गाड़ी रुक गई। उस झटके से हम दोनों आगे की ओर झुक गए। मैंने गाड़ी बंद की और झट से उसे पकड़ लिया। 

अब मेरा एक हाथ उसके दाहिने दूध पर था और बांया हाथ उसकी चूत पर। उसकी सांसें ऊपर नीचे होने लगीं। वो चुप बैठी रही। मैंने उसको पीछे से पकड़ कर उसकी पीठ और गर्दन पर गहरा चुम्मा लिया। 

वो कुछ नहीं बोली, उसने सब कुछ होने दिया। मैंने उसके कपड़े के अन्दर हाथ डालना शुरू किया तो वो मदहोश होने लगी। एक तरह से उसने अपने आपको मेरे हवाले कर दिया था। फिर वो मेरी तरफ मुड़ कर गले से लग गई। 

मैंने भी उसे गले से लगाया और उसके होंठ चूसना शुरू कर दिए। वो भी साथ दे रही थी। मैंने हाथ से महसूस किया तो चूत एकदम से रसीली हो गई थी शायद उसने पानी छोड़ दिया था। उसके नर्म नर्म दूध और गर्म गर्म चुत से मुझे मजा आ गया। 

मैंने उसको पीछे वाली सीट पर बैठने को बोला और कार के सभी विंडो को अखबार से कवर कर दिया। वो गाड़ी से उतर कर पीछे कि सीट पर चली गई। मैं भी पीछे चला गया। वो सीट पर लेट गई थी और मैं उसके ऊपर चढ़ गया था। 

बेहेन ने करि मेरे लंड की सवारी – 1

कर की पीछे वाली सेट पर चुत चुदाई

मैंने उसके पूरे जिस्म से एक एक करके सारे कपड़े हटा दिए और उसे बिल्कुल नंगी कर दिया। उसकी चूत पर काले रेशमी बाल थे। मैंने चूत को सहलाया और उसको फिर से गर्म कर दिया। वो आंह आह कर रही थी। 

मैंने एक उंगली उसकी चूत में डाली, तो अतूफ़ा चिल्ला उठी। मैं समझ गया कि लौंडिया सील पैक माल है। मैंने उसकी चूत को चाटना और चूसना शुरू कर दिया। वो एकदम से गर्म हो उठी और अपने दूध दबाने लगी। 

मैं समझ गया कि अब उसे चोदने का सही समय आ गया है। मैंने लंड निकाल कर उसके मुँह में दे दिया। वो थूक लगा कर लंड चूसने लगी। मैं कभी उसका एक दूध चूसता, तो कभी दूसरा। मेरा हाथ उसकी चूत को लगातार रगड़ रहा था। 

थोड़ी देर बाद मैं लंड को चूत में रगड़ने लगा और धीरे से लंड को अन्दर पेल दिया। वो चिल्लाई और उसने खुद ही अपने हाथों से अपना मुँह बंद कर लिया। एक दो पल बाद उसकी बुर से खून आने लगा। 

मैंने कार में रखे टिश्यू पेपर बॉक्स से टिश्यू पेपर निकाल कर उसकी चूत को साफ किया और फिर से चोदने लगा। कुछ देर बाद वो भी साथ देने लगी और मस्त होने लगी- आंह और तेज … और तेज करो मजा आ रहा है भाईजान … और अन्दर डालिए।’ 

दस मिनट की धकापेल के बाद मेरा रस निकलने वाला था। मैंने उससे पूछा- कहां निकालूं? वो बोली- क्या निकालोगे? मतलब वो समझ ही नहीं पाई थी कि मैं क्या पूछ रहा हूँ। 

मैंने बिना कुछ बोले लंड चुत से बाहर खींचा और उसके पेट व चूत के ऊपर पानी छोड़ दिया। मैं झड़ कर रिलैक्स हो गया और सीट पर बैठ गया। मैंने टिश्यू पेपर से उसके पेट को साफ़ करते हुए पूछा- कैसा लगा? वो हंसने लगी और उसने मेरे गाल पर एक किस दे दिया। 

मैंने भी उसे गले से लगा लिया। मैं उसके छोटे छोटे से दूध चूसने लगा, उनके साथ खेलने और सहलाने लगा। वो फिर से गर्म हो गई और बोली- एक बार फिर से करते हैं। मैंने भी ऑफिस फोन किया और आज न आने का कहा। 

अब मैंने उससे कहा कि चलो किसी ढंग कि जगह चलते हैं। तुम्हें जल्दी तो नहीं है? वो बोली- चार बजे तक कोई टेंशन नहीं है। मैंने उसे अपने फ्लैट में ले गया और उस देसी जवानी को नंगी करके पहले उसकी झांटें साफ़ की और साथ में नहाया। 

फिर उसे बिस्तर पर लाकर जबरदस्त चूसा और रगड़ा। उस दिन तीन बजे तक उसे मैंने चार बार रगड़ा और उसे दर्द की गोली खिला कर उसके घर के पास छोड़ आया।

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