रस्ते से पटायी लड़की को खूब चोदा – 1 

अब मैं एक नयी बुर की ठुकाई हिंदी में लिख रहा हूँ। लुत्फ़ लें इस कहानी का! खेती हमारा पारिवारिक काम है। खेत में काम करते रहने की वजह से मेरा शरीर एक खिलाड़ी टाइप का है, मेरी हाइट 5′ 11″ है और लोडा का साइज 7 इंच है। 

बात अभी कुछ दिन पहले की है, मैं रोहतक के बाजार में ऐसे ही बाइक पर फालतू में चक्कर लगा रहा था।  तभी मेरी नज़र एक खूबसूरत सी लड़की पर पड़ी। उसका नाम रचना(बदला हुआ) जो मुझे बाद में पता चला था। 

उसकी हाइट 5′ 4″ होगी और रंग उसका दूध से भी साफ! 32-28-32 का फिगर होगा उसका!  वो एक ऑटो रिक्शा में बैठ कर कहीं जा रही थी।  मैंने उसके आटो के आगे पीछे चक्कर काटने चालू कर दिया।  

करीब 6-7 चक्कर काटने के बाद उसने मुझे देख होगा। फिर तो मेरी 4 बार उससे नजर मिली।  आगे चल कर वह एक पार्क के सामने उतर गयी। वहाँ पर वो किसी आदमी के साथ बाइक पर बैठ कर चली गयी।  

मैंने भी उनके पीछे पीछे चलना शुरू कर दिया।  रचना बार बार मेरी तरफ देख रही थी और धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी।  मैंने सोचा कि मेरा काम बन सकता है। पर आगे चल कर वे पता नहीं किस गली में चले गए औऱ मैं उनसे बिछड़ गया। 

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रचना को पटाने की करि कोशिश

मैंने लगभग 1 घण्टा उस कालोनी में चक्कर लगाए लेकिन मेरे हाथ कुछ नहीं लगा।  घर आकर रात में मैंने उसके नाम की 3 बार बार मुठ मारी और सो गया। रात को सपने में भी मुझे रचना दिखाई दे रही थी। 

अगले दिन उसी टाइम पर मैं उसी पार्क के आगे पहुँच गया जहाँ पर रचना आटो से उतरी थी। वहां कोई नहीं था, न ही वहाँ पर वो अंकल थे जिनके पीछे रचना बैठ कर गयी थी।  मैंने करीब एक घण्टा वहाँ पर इंतज़ार किया होगा लेकिन मुझे वो नहीं मिली। 

तीसरे दिन भी मैं वहाँ पर गया लेकिन कुछ नहीं पता चला।  चौथे दिन मैं फिर से बाजार में ऐसे ही फिर से फालतू में घूम रहा था तो मुझे फिर से रचना दिखाई दी। हमारी फिर से नज़र से नज़र मिली और रचना मुस्कुराने लगी।  

अब मैंने मौका नहीं छोड़ना था। मैंने जल्दी से एक दुकान से पैन पेपर लिया और एक पर्ची पर अपना मोबाईल नम्बर लिख कर जेब में डाल लिया और उसके आटो के पीछे चक्कर लगाने लग गया।  मैंने रचना को पर्ची दिखा दी तो वो हंसने लगी। शायद उसके मन में भी कुछ था। 

आगे चल कर वो उस पार्क से 150 मीटर पीछे ही उत्तर गयी और पैदल ही पार्क की तरफ चलने लगी।  मैंने भी उसके पास बाइक ले जाकर उसके सामने पर्ची कर दी। उसने झट से मेरे हाथ से परची ले ली। फिर वो पार्क के आगे से उस बाइक वाले आदमी के साथ बैठकर चली गयी।  

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लड़की के फोन का किआ इन्तजार हवस के साथ 

मैंने पूरी रात उसके फ़ोन का इंतज़ार किया लेकिन उसका कोई फ़ोन नहीं आया।  फिर मैं उसके नाम की 2 बार मुठ मार कर सो गया।  अगले दो दिन तक उसकी कोई कॉल नहीं आई। अब मैंने भी उम्मीद छोड़ दी थी।  

फिर एक दिन एक अनजान नंबर से कॉल आयी तो मैंने सोचा आ शायद उसी का हो सकता है। और वो उसी का फोन था। हाय हेलो हुआ … थोड़ी से बातचीत हुई।  अब लगभग हर रोज मैसेज पर ओर कॉल पर हमारी बाते हों लग गयी थी।  

बातों ही बातों में गाली वगैरा देना और नॉन वेज चुटकुले शेयर करना अब सामान्य सी बात हो गयी थी।  अब रात को हर रोज की तरह बात करते करते मैं उसको गर्म कर देता था और अपना पानी भी निकल लेता ओर उसका भी निकलवा देता था।  

रचना भी मेरे से उतना ही मिलना चाहती थी जितना मैं उससे!  अब पार्क में मिलना और आपस में चूमाचाटी करना हमारा रोज का काम हो गया था। लेकिन हमें सेक्स का मोक्का नहीं मिल पा रहा था। 

एक बार मेरे घर वाले 3-4 दिन के लिए कहीं बाहर जाने वाले थे तो मैंने दुकान का (सॉरी, मैंने बताया नहीं कि खेती से अलग मेरी सी सी टी वी कैमरों की दुकान और है) बहाना मार कर नहीं गया।  मैंने उसको अपने घर पर आने के लिए मना लिया।  

उसने भी अपनी किसी सहेली की शादी के लिए घर पर बोल दिया और शाम के टाइम ही मेरी बताई जगह पर आ गयी।  उस दिन उसने स्काई ब्लू जीन्स और सफेद टॉप पहना था।  हम दोनों मेरे घर पर आ गए, वो अपने साथ शादी में पहनने वाला लाचा भी लेकर आई थी।  

घर आ कर हम दोनों ने कॉफी बनाई और साथ बैठ कर पीने लगे।  कॉफी पीते पीते मैं उसको छेड़ने लगा तो वो बोली- रुक भी जाओ, सारी रात अपनी ही है। लेकिन मैं नहीं माना और उसको पकड़ कर किस करने लगा।     

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