पड़ोसन की चुदाई का अलग मजा – 3

उनके अन्दर आते ही मैंने गेट बंद कर लिया और भाभी को अपने करीब खींच कर खूब किस करने लगा। मैं अब अपने आपे से बाहर हो चुका था। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं शेर हूँ और भाभी मेरा शिकार हैं, जिसे मैं बस नौंच नौंच कर खाना चाहता हूँ। 

तभी भाभी बोलीं- आराम से करो और मजा आएगा। मैंने कहा- ठीक है, चॉकलेट खाओगी। वो बोलीं- हां खिलाओ। मैंने उन्हें चॉकलेट दी, तो उन्होंने चॉकलेट फाड़ कर एक बड़ा सा बाइट काटा और बिस्तर पर बैठ गईं। 

मैं उन्हें चॉकलेट खाते हुए देख रहा था। तभी वो बोलीं- खाओगे? मैंने कहा- खिलाओगी तो खा लेंगे। ये सुनते ही उन्होंने अपने चॉकलेट से भरे मुँह से मुझे किस किया और सारा चॉकलेट मेरे मुँह में डाल दिया। 

फिर मैं भाभी पर टूट पड़ा और उन्हें बिस्तर पर पटक कर जोर जोर से किस करने लगा। उनकी साड़ी उनसे अलग कर दी। अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में बिल्कुल काम देवी लग रही थीं। मैंने जैसे ही उनके ब्लाउज के बटन को हाथ लगाया, उन्होंने मेरी शर्ट को ऐसा खींचा कि सारे बटन टूट गए। 

मैं भी अब अधनंगा हो चुका था। मैंने भी वही किया। एक जोर का झटका दे दिया, जिससे उनके ब्लाउज के सारे बटन टूट गए और ब्लाउज खिंच कर अलग हो गया। तुरंत ही दूसरे झपट्टे में मैंने उनका पेटीकोट खोल दिया। 

बेहेन की चुदाई रात के समय – 1

भाभी को कर लिआ पूरा नंगा 

अन्दर भाभी ने लाल ब्रा और काली चड्डी पहन रखी थी। अब मैं खुद को और रोकना भी नहीं चाहता था। मैंने पैंट को खोला और भाभी की ब्रा के ऊपर से ही उनके दूध दबाने लगा। उन्हें जम के किस करने लगा। 

ऐसा करते हुए मेरे हाथ भाभी की ब्रा की हुक तक पहुंच चुके थे। मैंने जैसे ही भाभी की ब्रा खोली, उनके दोनों गुम्बदनुमा दूध मानो किसी कैद से आजाद हो गए। मैंने झट से एक दूध अपने मुँह में लिया और एक को अपने हाथ से जोर जोर से दबाने लगा। 

जब मैंने भाभी का दूध अपने मुँह में लिया तो वो मुझे इतना मुलायम लगा जैसे उनके दूध रूई के बने हों। मैं बहुत ही उत्तेजित होकर जोर जोर से भाभी के दूधों को पी रहा था और दबा रहा था। उनके दूध मुझे बिल्कुल रस मलाई की तरह लग रहे थे। 

उनके बदन से एक अलग ही प्रकार की खुशबू आ रही थी जो मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। मैं भूखे शेर की तरह उनके दूधों को काट और चाट रहा था। 

भाभी भी अपने दोनों हाथों से मेरे सिर को सहलाते हुए कह रही थीं- ओह … ओह … पी लो इन्हें … और जोर से चूसो … इतने जोर से इन्हें किसी ने नहीं पिया। मैं उनकी इन बातों को सुन कर उनकी चूचियों को और ज्यादा जोर से काटने लगा था।  

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भाभी की चुत और मेरे होठो का मिलन

जिससे भाभी की एकदम से सिसकारियां निकली जा रही थीं, मैं अब धीरे धीरे उनके पेट पर किस करने लगा और साथ ही साथ दूध भी दबा रहा था। उसके बाद मैं भाभी की चूत तक पहुंच गया। 

भाभी के दोनों पैरों को मैंने चौड़ा किया तो भाभी के चहरे पर एक अलग ही प्रकार की कामुक उत्तेजक मुस्कुराहट आ गई थी, जैसे वो मुझसे कह रही हों कि खा जाओ इसे भी। मैंने किया भी वही। 

मैं पलंग से नीचे उतर कर घुटनों पर खड़ा हो गया और भाभी को खींच कर पलंग के किनारे कर लिया। मैंने अपना मुँह भाभी की चूत पर रख दिया और अपनी जीभ भाभी की चूत के अन्दर तक डाल कर उनकी चूत को चाटने लगा। 

मैं बिल्कुल अपने होश में नहीं था, मैं कभी चूत को प्यार से काट रहा था, तो कभी जोर जोर से चाट रहा था। भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं। वो अपने दोनों हाथों से मेरे बाल सहला रही थीं। 

और अब अपनी मादक आवाज में कह रही थीं- आह … आह … अह्ह्ह … काटो और जोर से काटो … और अन्दर तक चाटो। मैं भाभी की ये सब बातें सुनकर पूरी तरह मदहोश हो चुका था। 

भाभी की चूत चाटने में मुझे इतना मजा आ रहा था मानो रेगिस्तान के प्यासे को अमृत मिल गया हो। तभी भाभी अचानक से जोर जोर से सांसें लेने लगीं और कहने लगीं- आंह और जोर से अह्ह्ह … अह्ह्ह … मैं गई। 

बस भाभी अपनी मादक सीत्कारों के साथ अपने शरीर को ऐंठने लगीं। उन्होंने जब अपनी चूत का पानी छोड़ा तो ऐसा लग रहा था जैसे कोई ज्वालामुखी फट गया हो और उसका लावा बह रहा हो। भाभी की चूत से एकदम गर्म गर्म लावा बहने लगा था जो कुछ मेरे मुँह पर भी लग गया था। 

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