मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 2

मुझे भी उनके बोबों पर पीठ रगड़ने में मज़ा आने लगा। अब मैं खुद जानबूझकर पीछे खिसकर मामीजी के स्तनों को मेरे जिस्म से रगड़ने लगा। पीठ पर स्तनों की रगड़ से बचने के लिए वो अब पीछे सरकने लगी। 

मगर वो मुझसे ज्यादा बच नहीं सकती थी क्योंकि गड्ढों में बाइक बार बार उछल रही थी। अब मैं बाइक चलाते हुए बीच-बीच में मेरे लंड को मसलने लगा। मामी- लगता है आपको गाड़ी सही तरीके से चलानी नहीं आती? 

मैं मेने कहा मामीजी ऐसी बात नहीं है। बस ये सड़क ही खराब है। मामीजी- लेकिन इस सड़क के चक्कर में मुझे सीट पर बैठना मुश्किल हो रहा है। मैंने चुटकी लेते हुए कहा- मेरा भी तो गाड़ी चलाना मुश्किल हो रहा है। 

आप अपने आप को संभालो, नहीं तो मैं गाड़ी नहीं चला पाऊंगा। आप मेरी बात समझ रही हो ना? मामीजी- हां, मैं आपकी बात समझ रही हूं। लेकिन मैं कैसे क्या करूं? एक ये सड़क इतनी खराब है और ऊपर से अब आप भी पीछे सरकते जा रहे हो। 

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मामी चिपक गयी मेरे जिस्म से

मेने कहा आपको तो पूरा मज़ा आ रहा है। अब मैंने खुलते हुए कहा- मज़ा तो आप दे रही हो। अगर कोई चीज मिल रही हो तो उसे लेना चाहिए। मामीजी- अच्छा जी? अपनी ही रिश्तेदार पर लाइन मार रहे हो? 

मार लो … मार लो … आखिरकार आपके पास मौका है। मैंने मज़ाक में कह- समधन जी … अगर पूरा मौका दो तो गाड़ी यहीं रोक दूं? पास में खेत भी हैं। मामी हंसती हुई बोली- चुप रहो आप तो … और चुपचाप गाड़ी चलाओ। 

मामी ने कहा कोई लड़की नहीं मिली क्या आपको? जो मेरे ऊपर लाइन मार रहे हो? उनसे मैं बोला- नहीं मिली … तभी तो आपके ऊपर लाइन मार रहा हूं। आखिरकार आप हमारी समधन जी हो। 

मामी- रिश्तेदार हूं तो इसका मतलब आप मेरे मजे लोगे? मैं-  जी, अब मैं क्या मज़ा लूंगा? वो तो आप खुद ही दे रही हो। आप अच्छे से बैठो। आपके उनकी (बूब्स की) रगड़ से मुझे दो सौ वाट का करंट लग रहा है। 

मामी- रोहित जी … करंट तो लगेगा ही … सड़क ही ऐसी है। अब आप जानो और आपका करंट … मैं कुछ नहीं कर सकती। आप कहो तो आपको कसकर पकड़ लूं? मैं- आप मुझे कसकर तो पकड़ सकती हो लेकिन सोच लो … फिर मैं आपकी जन्नत की सैर करवाए बिना नहीं मानूंगा। 

मामी- जन्नत की सैर करने के लिए पहले माल सेट करना पड़ता है। तब जन्नत की सैर करने का मौका मिलता है रोहित जी। कोई लड़की पटा लो, फिर खूब जन्नत की सैर करना। उनसे मैं बोला- आपकी बात सही है लेकिन मैं तो कोई आपकी जैसी ही पटाऊंगा जो फुल मज़ा दे। 

मामी- हां, ज़रूर … मेरी जैसी पटा लेना। मैं- आप ही पट जाओ ना समधन जी? इस पर वो जोर जोर से हंसने लगीं। इस तरह से मस्ती मज़ाक करते हुए हम आगे बढ़ते जा रहे थे और मामीजी के मुलायम बोबे मेरी हालत खराब किए जा रहे थे। 

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मामी के बूब्स धसने लगे जिस्म में 

तभी अचानक एक बड़ा गढ्डा आ गया और बाइक गड्डे में से होकर गुजरी। इसी समय मामीजी उछलकर मेरे जिस्म से पूरी तरह से चिपक गई। उनके बोबे मेरी पीठ से सट गए और उनका हाथ सीधा मेरे खड़े हुए लंड पर आकर लगा। 

अब मेरा लंड आंधी से तूफान बन गया। जैसे तैसे करके मैंने गाड़ी को संभाला और गाड़ी चलाने लगा। हम दोनों चुप थे। मामीजी लज्जा से पानी पानी हो चुकी थी। अब मामीजी जान चुकी थी कि उनके स्तनों के घर्षण ने मेरे लन्ड को खड़ा कर दिया है। 

मेरे मन में मामीजी के लिए गलत ख्याल आने लगे और मैं उनकी चूत मारने के बारे में सोचने लगा। तभी मैंने कुछ सोचा और थोड़ी दूर मैंने बाइक को बंद करके रोक दिया। बाइक को रोकते ही मामीजी ने बाइक पर बैठे बैठे ही पूछा- क्या हुआ? 

मैंने कहा  शायद इसके प्लग में थोड़ी सी खराबी आ गई है। हम दोनों नीचे उतरे। मैं उनके बदन को निहारने लगा और देखने लगा कि इस माल में कितना सोना है। 

मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 3 

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