बड़े भाई के लंड से चुदाई चुत – 1 

मेरा एक बड़ा भाई जिसका नाम हेमंत है लोग प्यार से उन्हें हेमू कहते हैं … काफी स्मार्ट और हट्टे-कट्टे! एक बार जब भाई गाँव आए हुए थे तो मैं बाथरूम में नहाने गयी और कुण्डी लगाना भूल गयी। 

मैं हमेशा नंगी नहाती हूँ, उस दिन भी नंगी थी। और इतने में अचानक भैया अंदर आ गये; मुझे नंगी देखकर हक्के बक्के रहे गये। मैं शर्म से लाल पीली थी क्यूंकि अभी तक नंगी मुझे मेरे बॉयफ्रेंड ने ही देखा था। 

उस दिन के बाद भैया का नजरिया ही बदल गया। एक दिन मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे फोन करके कहा कि मैं अपनी मम्मी की साड़ी और ब्लाउज पहन कर उनको फोटो भेजूं … और उपर से अपने बूब्स दिखाऊं। तो मैंने मम्मी की साड़ी और बिना ब्रा के ब्लाउज पहन ली। 

उसके बाद मम्मी के कपड़ों में ही बाहर चौक में झाड़ू लगाने लग गयी। जैसे ही मैं झाड़ू मार रही थी, उतने में भाई आ गए और सामने कुर्सी पर बैठ गये। मेरा ब्लाउज ढीला होने के कारण मेरी बड़ी बड़ी चूचियां ऊपर से साफ़ दिखने लग गयी। 

लड़को से गांड मरवाने का शोक – 1

भाई की बिगड़ गयी नजर 

यहाँ तक कि मेरे चुचियों के भूरे रंग के निप्पल भी दिख रहे थे। मैंने तिरछी नजर देखा तो भाई बड़े गौर से देख रहे थे। मैं समझ गयी कि भाई अब मेरी चूत बजाने के लिए उतावले हो रहे हैं। अब वो हर दिन में वासना की नज़र से देखने लग गये। 

मैं सब समझ रही थी … मन तो मेरा भी हो रहा था पर हिम्मत नहीं हुई ना उनकी और न मेरी! अगले दिन भाई शहर चले गये जॉब के लिए! 6 महीने के बाद भाई ने फोन किया और कहा- मैं कल कुछ काम से गाँव वाले बाज़ार आ रहा हूँ, मुझे तुझसे मिलना है। 

हमारे गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर ही बाज़ार है और वहीं मेरा कॉलेज भी। मैं तब बी ए सेकेंड इयर में थी। मैंने कहा- ठीक है भाई! भाई ने कहा- वहीं होटल में कमरा ले लेना। हम वहीं बैठ कर खाना खायेंगे और आराम भी करेंगे। 

मैंने कहा- ठीक है भाई! अगले दिन मैं बाज़ार चली गयी। पहले मैं कॉलेज गयी और उसके बाद आई और होटल में रूम बुक करने गयी। पर मुझे कहीं भी रूम नहीं मिला। मैं दो घंटे तक पूरे बाज़ार में रूम ढूंढती रही पर कहीं नहीं मिला। 

सुबह के 10 चुके थे। इतने में भाई भी आ गये। मैंने भाई से कहा- कहीं भी रूम नहीं मिला। तो भाई ने कहा- कोई बात नहीं। फिर हमने एक दुकान में चाय पी और पकौड़े खाए। उसके बाद हमने बाज़ार में ऐसी जगह तलाशनी शुरू की जहाँ कोई आता जाता ना हो। 

लड़को से गांड मरवाने का शोक – 2

अकेले रहने के लिए ढूंढा कमरा

पर ऐसी जगह कहीं नहीं मिली। फिर भाई की नज़र सामने की पहाड़ी पर पड़ी … वहां से एक रास्ता था जो ऊपर किसी गाँव की तरफ जा रहा था। भाई ने कहा- चल वहां चलते हैं, वहां कोई नहीं आएगा। 

मैं भाई की बातों को समझ चुकी थी कि आज मैं अपने भाई से चुदने वाली हूँ। मेरा भी बहुत मन था अपनी चूत में लंड लेने का; दो महीने से बॉयफ्रेंड नहीं चोदा नहीं था। हम दोनों भाई बहन उस पहाड़ी की तरफ चले गये … वहीं जाकर एक झाड़ी के सहारे बैठ गये। 

झाड़ी भी रास्ते के किनारे थी यानि आने जाने सभी हम साफ़ देख सकते थे। पर क्या करते … और कुछ नहीं था … हम वहीं बैठ गये। मैं उसने दिन हल्के नारंगी का कुर्ता और सफ़ेद रंग का सलवार पहन रखा था और भाई ने नीले रंग की कमीज और नीले रंग की जींस पहनी हुई थी। 

मेरा कुर्ता बहुत टाइट था जिसकी वजह से मेरी चूची उपर से दिख रही थी। बैठे बैठे भाई की नजर मेरी चूची पर पड़ती और बातें करते। अब वो बड़े गौर से देखने लग गये। मैंने कहा- क्या देख रहे हो भाई? 

भाई ने कहा- कुछ नहीं। मैंने कहा- कुछ तो देख रहे हो? तो इस बार भाई ने हिम्मत करके कह ही दिया- तेरे सीने को देख रहा हूँ। मैंने कहा- ऐसा क्या है मेरे सीने में? तो भाई ने कहा- तेरे सीने ने ही तो मुझे पागल बना रखा है। 

मैंने कहा- पर ऐसा क्या है? तो भाई की झिझक अब कम हो चुकी थी, भाई ने कहा- तेरी कोमल और बड़ी बड़ी चूचियां जिनमें मुझे डूब जाने का मन कर रहा है।  

बड़े भाई के लंड से चुदाई चुत – 2 

Leave a Comment