सर्दी की रात में बेहेन के साथ खेला चुदाई का खेल – 1 

मेरी बेहेन मुझसे बड़ी थी और वह मुझसे ज्यादा समझदार भी थी। हम लोग गरीब थे इसलिए हमारे घर में सिर्फ 2 ही कमरे थे जिसमे से एक में मम्मी और पापा सोते थे और दूसरे में मेरी बेहेन और मै। 

मेरी बेहेन मेरे बिस्तर से अलग निचे सोती थी और यह हमेशा से होता आ रहा था। पर इस साल कुछ ज्यादा ही सर्दी पद रही थी और जमीन पर सोने की वजह से मेरी बेहेन की तबियत भी सही नहीं थी। 

उसे देख मुझे भी अछा नहीं लग रहा था पर मेने उसे फिर भी कुछ नहीं कहा। अब रात हो चली थी और हम सब खाना खाकर सोने के लिए  ऊपर अपने कमर की तरफ चल दिए। 

ऊपर आने के बाद मेरी बेहेन थोड़ी देर तक कड़ी रही क्युकी उसे निचे सोने में बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। अब मेने दीदी से कहा की आज वह मेरी जगह पर सो जाये क्युकी आज बाकि दिन से ज्यादा ही सर्दी है। 

अब उन्होंने मुझे मना किआ और कहा की वह  निचे ही सो जाएँगी। मेने अब अपनी बेहेन से ज्यादा नहीं बोला और  बत्ती बंद कर दी। यह  अभी कुछ रात के 12 ही बजे होंगे और मेरी बेहेन अब उठकर बिस्तर पर आ गयी। 

मेरी आंख भी खुल गयी और मै एक कोने में हो गया जिससे उसे थोड़ी जगह मिल जाए। उसके पैर बहुत ठंडे हो रखे थे और जिसे उसने मेरे पेरो पर लगाया और मुझे हसी आए गयी क्युकी अब मुझे भी सर्दी लगने लगी थी। 

हम दोनों दबी आवाज में हस्ते हुए एक ही रजाई में घुस गए। अब मेरी बेहेन जो की मुझसे बड़ी थी उसने मुझसे कहा की मेरी रजाई तो काफी गरम हो रखी है पर उसे अभी भी सर्दी लग रही है। 

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बेहेन चिपक गयी मेरे बदन से

अब उसने मुझे अपनी तरफ खींचते हुए कहा की मै पहले से ही काफी गरम हो रखा हु  और वह मुझसे एकदम चिपक गयी। दीदी के बूब्स मेरी पीठ पर चपके हुए थे जो मुझे महसूस भी हो रहे थे। 

काफी देर तक हम दोनों ने सोने की कोशिश करि पर हम दोनों में से ही किसी को नींद नहीं आ रही थी। मेरी बेहेन मुझसे अब धीमी आवाज में बाते करने लगी और मै भी उसका जवाब देने लगा। 

पर धीरे बोलने की वजह से वह मुझे सुन नहीं पा रही थी और अब परेशान होकर उसने मुझे कहा की मै अपना मुह्ह उसकी तरफ करके ही बात करू। शुरू में मेने कुछ बाटे सोची पर वह मेरी बेहेन थी इसलिए मेने उसकी बात मान ली। 

अब मेने अपने मुह्ह दीदी की तरफ किआ और उससे आते करने लगा। हम दोनों की गरम सांसे एक दूसरे से बाते करते हुए आपस में लड़ रही थी और अचानक मेने देखा की मेरी बेहेन की सांसे अब अचानक तेज होने लगी थी। 

पर हम दोनों बिना सोचे एक दूसरे से  बाते किये ही जा रहे थे। अब मेरी बेहेन ने अपना हाथ अचानक मेरी कमर पर रख दिए और मुझसे कहने लगी की इससे उसके ठन्डे हाथ की थोड़ी सिकाई भी हो जाएगी। 

ऐसा कहने के बाद वह हसने लगी और मै भी इसे हसी में ले गया। अब कुछ ही देर बाद मेरी बेहेन मेरी पीठ पर अपने हाथ घुमाने लग गयी और मेने उसे कहा की वह ऐसा क्यों कर रही है क्युकी मुझसे इससे गुदगुदी हो रही है। 

मेरी बेहेन ने मुझे कहा की इससे कुछ नहीं होता है और यह उसकी आदत है और मै चहु तो उसकी पीठ पर भी हाथ सेक सकता हु। अब मेने फिर से कुछ बाते सोची और फिर मेने अपनी बेहेन की टीशर्ट में हाथ घुसा लिआ। 

अब मेने भी अपने हाथ से अपनी बेहेन की पीठ को सहलाना शुरू कर दिआ और हम दोनों ऐसा करते हुए खूब हस भी रहे थे। रात के 1 बजे हम दोनों बिलकुल भी नींद में नहीं थे और यह सब चलता ही जा रहा था। 

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बेहेन के बदन को सहलाया पूरी तरह 

अब दीदी की पिक्थ पर हाथ फेरते हुए मेरा हाथ उसकी ब्रा पर चला गया और मेने अपना हाथ निचे कर लिआ। ऐसा मेरे हाथ कई बार हुआ और अब मेरी बेहेन ने मुझसे कहा की क्या मुझे उसकी ब्रा से कोई परेशानी हो रही है। 

मेने दीदी से कुछ नहीं कहा और अब दीदी ने कहा की अगर में चहु तो उनकी ब्रा को खोल सकता हु जिससे मुझे परेशानी नहीं होगी। मेने भी अब बिना रुके दीदी की ब्रा का हुक खोल दिआ और अपना हाथ पूरी पीठ पर सहलाने लगा। 

अंदर ही अंदर अब दोनों ही काफी गरम हो  चुके थे और हमारी सांसे भी तेज तेज चल रही थी। अब मेरी बेहेन ने बातो के बिच ही मेरे पजामे में पीछे से हाथ डालना शुरू कर दिआ। 

उसका हाथ मेरी गांड पर बार बार जा रहा था और वह वापस उसे ऊपर कर लेती थी। उसका ऐसा करने से मेने भी अपना हाथ अपनी बेहेन की पजामी में घुसाना चालू कर दिआ। 

हम दोनों एक दूसरे की गांड को अब बिना कुछ कहे प्यार से सहलाये जा रहे थे और मजे ले रहे थे। रजाई में यह खेल बिना रुके आगे बढ़ता ही जा रहा था और एक दूसरे के जिस्म को अब हम दोनों पूरी तरह से सेहला रहे थे। 

सर्दी की रात में बेहेन के साथ खेला चुदाई का खेल – 2

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