स्कूल में शुरू कर दिआ चुदाई का खेल – 1

यह हमारे स्कूल के दिनों की बात है जब हमारी उम्र कुछ 18 साल के करीब ही रही होगी। स्कूल के समय में मेरे सभी तरह क दोस्त थे। जहा में लड़को के साथ सारा दिन खेलता रहता था वही लड़कीओ का भी मै खूब दीवाना था। 

यह बात सभी को पता थी की मै बहुत ही बड़ा लड़कीबाज था और लड़कीओ के पीछे और लड़कीआ मेरे पीछे रहा करती थी। पर अब कही ना कही बढ़ती उम्र के साथ मेरे ख्याल भी बढ़ रहे थे। 

मेरे दिमाग में अब ज्यादातर नंगी लड़कीओ की तस्वीरें और उनके चित्र ही घूमते रहते थे। जब भी मै किसी लड़की के पास रहता था मेरे दिमाग में बस यही ख्याल आता रहता था की मै उसकी चुदाई किस तरीके से करू। 

यह उम्र कुछ ऐसी ही थी जब मेरे दिमाग में पढाई की बात तो आती ही नहीं थी। अब ऐसी चीज मेरे साथ काफी लम्बे समय से हो रही थी और मै इस सब से परेशान भी हो गया था। 

अब मेने लड़कीओ को अपने साथ सुलाने के लिए एक प्लान बनाया जहा मेने एक कागज पे यह लिख दिआ की अगर वह अपने जिस्म की गर्मी को मेरे साथ ठंडा करनी चाहती है तो वह कागज पर हां लिख दे और यह सब एक राज रखे। 

ऐसा लिख कर मेने यह कागज एक लड़की के बेंच के निचे रख दिआ। अगले दिन मेने जल्दी स्कूल जाकर कागज देखा तो उस पर उस लड़की ने है में जवाब लिखा हुआ था। अपनी हवस में मारी अपनी बेहेन की चुत – 1

अपनी हवस में मारी अपनी बेहेन की चुत – 2 

चुदाई के खेल में आयी पहली लड़की 

जैसा मेने सोचा था यह उससे भी जल्दी और आसानी से होने लगा था और इस सब के बारे में किसी को पता भी नहीं था और यहाँ तक की वह लड़की भी यह नहीं जानती थी की वह कागज किसने लिखा था। 

अब मेने उस कागज  पर यह लिख के वापस से वही रख दिआ की अगर वह इस सब के लिए राजी है और इस सब को एक राज के जैसे रखेगी तो वह मुझसे मिलने के लिए खली मैदान में आ जाये। 

उस समय खली मैदान बहुत ही ज्यादा खाली रहता था और वह कोई भी आता जाता नहीं था। मै अब खाली मैदान में जाकर छिप गया और कुछ देर बाद वह लड़की भी वह आ गयी और यह देखने लगी की वह कागज किसने लिखा था। 

अब मै जल्द से उसके पास गया और उससे मिला। वह मेरे साथ अनजान सा वेहवार कर रही थी और मेने उससे पूछा की वह यहाँ क्या कर रही है। इसने मुझे कहा की मै उससे इस समय बात ना करू। 

अब मुझे गुस्सा आ गया और मेने उसे कहा की वह जिसे धुंध रही है वह मै ही हु। वह डर गयी और अब मेने उसे कहा की जैसे मेने उससे कहा था वैसे ही यह सब एक राज ही रहेगा और उसे अब मेरे साथ चलना होगा। 

अब मै उसे अपने एक दोस्त के घर ले गया जिसके मम्मी पापा घर पर नहीं थे और मेने उसे एक कमरे में बैठने के लिए कहा। वह डरी हुई कमरे में बैठी थी और मै कुछ देर बाद उसके पास गया। 

गाडी से लड़की पटाके करि चुदाई 

चुदाई का खेल शुरू किआ 

मेने उसे कहा की कुछ भी बोलने से पहले वह जान ले की हम दोनों आज के बाद एक दूसरे के लिए अनजान होंगे और यह सब एक राज की तरह रहेगा जैसे की हम दोनों कभी मिले ही नहीं। 

उसने भी मेरी हां में हां मिला दी और मेने अब उसे कहा की उसे अपनी आँखों पर एक पट्टी बांधनी होगी। पहले वो थोड़ा हिचकिचाई पर फिर वह मान गयी  उसकी आँखों पर एक पट्टी बांध दी। 

अब मेने उसे कहा की आज उसकी हर शारीरिक चाहत को पूरा किआ जायेगा और यह आज के बाद भुला भी दिया जायेगा इसलिए वह इस बारे में मुझसे कुछ भी मांग सकती है और वो भी बिना सोचे। 

इससे पहले वह कुछ बोल पाती मेने उसके होठो पर चुम्बन करना शुरू कर दिआ। वह शुरू में थोड़ा डरते हुए मुझे  किस कर रही थी पर बाद में वह भी मेरे होठो का अच्छे से रसपान करने लग गयी। 

हम दोनों एक दूसरे को काफी देर से किस कर रहे थे और अब मेने उसके बूब्स को भी दबाना  शुरू कर दिआ और वह अब धीमी धीमी आहे भी भरने लग गयी। 

मेने अब उसकी टीशर्ट को ऊपर कर दिआ और उसके बदन को चूमना शुरू हो गया। वह भी मुझे अपने जिस्म को अच्छे से चूमने दे रही थी जिससे वह और भी ज्यादा गरम होती जा रही थी। 

उसके बूब्स की दोनों निप्पलों का रंग काला था जिनको मै अपने होठ से चूसते हुए उसके बूब्स को दबा भी रहा था और वह आह आह करती हुई इस सब का मजा ले रही थी। 

जानिये आगे की कहानी – स्कूल में शुरू कर दिआ चुदाई का खेल – 2

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