भाभी और देवर की चुदाई का किस्सा – 3 

अब तक आपने पढ़ा था कि भाभी मेरे मोबाइल में गर्म फोटोज देख कर उत्तेजित होने लगी थीं। वो मुझसे पूछ रही थीं कि लॉकडाउन में तुमने अपनी गर्लफ्रेंड के साथ कैसे सेक्स किया था। 

अब मैंने कहा- मुझे तो ज़माना हो गया ऐसा कुछ किए हुए … लेकिन आपको देख कर अब मन हो रहा है कि इस पिच पर मैं भी बैटिंग कर लूं। भाभी बोली- हां मेरा भी मन हो रहा है … मगर मेरे पल्ले एक भौंदू किस्म का देवर पड़ गया है। 

मैं उनका इशारा समझ गया और मैंने कहा- मुझे इजाजत तो मिले तब तो मैं बल्ला लेकर आऊं। भाभी- तुम्हें रोका किसने है? भाभी का खुला इशारा पाते ही मैंने उनके बालों में हाथ डाला और सर अपनी तरफ खींच कर मैंने उनके होंठों को अपने होंठों में ले लिया और उन्हें किस करने लगा। 

किस होते ही भाभी भी मूड में आ गई थीं और वो भी मुझसे पूरी तरह से चिपक कर मुझे किस करने लगी थीं। आग और पेट्रोल का मिलन हो गया था और आग भड़क उठी थी। हम दोनों एक दूसरे को किस करते हुए बिस्तर पर लेट गए। 

अब कभी वो मेरे ऊपर। तो कभी मैं उनके। मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था। तो मैंने अपना हाथ पेटीकोट से उनकी चड्डी में डाल दिया। तब भाभी उठीं और बोलीं- जरा रुको! मैंने कहा- भाभी क्या हुआ? उन्होंने कहा- यार। मुझे डर लगता है कि कोई आ ना जाए। 

अभी तुम घर जाओ। मैंने कहा- भाभी। प्लीज ऐसा मत करो न! उन्होंने मुझसे कहा कि अभी कुछ दिन रुक जाओ और मुझ पर भरोसा रखो। मैं सोच में पड़ गया कि ये क्या हो रहा है। अगले दिन भाभी का मैसेज आया- तुम कितने बजे उठ जाते हो? 

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मैंने कहा- अगर जल्दी सो जाऊं तो 6 बजे तक उठ जाता हूं। भाभी ने कहा- मेरे पति की शिफ्ट फिर से बदलने वाली है … तुम सुबह 5 बजे आ सकते हो क्या? मैंने सोचा कि इतनी सुबह चैटिंग करना तो ठीक है लेकिन चुदाई के लिए 5 बजे घर से कैसे निकलूंगा। 

मैंने पूछा- इतनी सुबह क्यों … भैया तो चार बजे वापस आते हैं न? भाभी बोलीं- अरे यार। दिन में मुझे डर लगता है … उस समय कोई भी आ जा सकता है। इसीलिए। तुम बस सोमवार की सुबह पहुंच पांच बजे आ जाना। 

मैंने घर पर बहाना बना दिया था कि सुबह जॉगिंग के लिए जल्दी चला जाया करूंगा और घर से होने वाली टोका-टाकी वाले सरदर्द का इलाज कर दिया। भाभी से उस दिन की मुलाकात ने मेरे अन्दर की वासना को और भड़का दिया था। 

तीन दिन तक मैं उनको याद करते करते मुठ मारता रहा था । भाभी भी रोज़ वीडियो कॉल पर अपने शरीर का प्रदर्शन कर रही थीं। उनकी आंखों और चूचियों से लेकर चूत और गांड तक सब कुछ मुझे बेचैन कर रहा था। 

रविवार को मैंने सुबह अपने लंड की झांटें साफ़ कीं और रात को मैं जल्दी सो गया। मैं सुबह 4:10 का अलार्म लगा कर सो गया था। उस रात सपने में मुझे भाभी ही दिखाई दे रही थीं। सुबह मैं वक़्त पर उठ गया। 

किसी को बिना जगाए मैं बाहर निकाला और सीधे भाभी को मैसेज किया। भाभी का तुरंत रिप्लाई आ गया- आ जाओ। मैं भाभी के घर के बाहर पहुंचा तो देखा दरवाजा खुला था और भाभी वहीं परदे की आड़ में खड़ी थीं। 

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भाभी के साथ बैडरूम में चुदाई 

मुझे देख कर वो अन्दर चली गईं। मैं अन्दर गयी और दरवाजा बंद कर दिया। मैंने देखा कि भाभी हॉल में गाउन में खड़ी थीं। उनको मैंने पकड़ लिया और अपनी बांहों में भर लिया। भाभी भी मेरे सीने से लता सी लिपट गईं। 

हम दोनों ने दो मिनट किस किया। भाभी अलग होकर बोलीं- तुम बिस्तर पर जाकर बैठो। मैं बाथरूम से आती हूं। मैं जाकर उनके बेड पर लेट गया और भाभी सिर्फ़ एक झीने से पिंक गाउन में बाहर आ गईं। 

गाउन से साफ पता चल रहा था कि उन्होंने ब्रा या पैंटी नहीं पहनी है। भाभी मेरे पास आ गईं और मैं उतावले भाव से उन्हें कहने लगा- भाभी। आप तो आज माल लग रही हो। भैया के तो रोज़ मजे हैं। उन्हें आप जैसे सोनहलुआ का प्रसाद मिलता है। 

ये कह कर मैं भाभी के मम्मों पर हाथ फेरने लगा और हल्का सा दबाने भी लगा। भाभी बेड पर पीठ टिका कर मेरे साथ बैठ गईं। उन्होंने कहा- जरा रुक जाओ। सब्र करो यार। फिर उन्होंने फोन हाथ में ले लिया। 

मैंने पूछा- भाभी अब क्या? तो वो बोलीं- थोड़ा पहले गर्म तो हो जाओ। मैंने देखा कि वो ऑनलाइन पोर्न सर्च करने लगी थीं। भाभी ने एक अच्छी सी इंडियन क्लिप लगा दी और बोलीं- अब लो मेरे इन पपीतों को अपने हाथों में लो। 

भाभी मेरी छाती पर पीठ टिका कर लेट गईं और उन्होंने अपने गाउन के बटन खोल दिए। सामने पोर्न चल रहा था और हम दोनों फिलहाल पोर्न एन्जॉय कर रहे थे। भाभी के दोनों आम मेरे हाथों में थे और मैं अब ज़ोर ज़ोर से उन्हें मसल रहा था। 

मेरा ज़ोर बढ़ता देख कर भाभी बोलीं- अच्छा गर्म करना तो तुम्हें भी बड़े अच्छे से आता है। वो फिल्म देखने लगीं। मेरा कोई जवाब न पाकर वो बोलीं- कहीं बाहर आवाज़ नहीं जा रही है … ऐसे गूंगे बने रहोगे या कुछ बोलोगे भी? 

मैंने कहा- अब तो बस मुझे आपके चूचे मुँह में डाल कर चुप ही हो जाना ठीक लग रहा है। उन्होंने- कहा- अच्छा। तो वैसे ही चुप हो जाओ। भाभी ने मेरा एक हाथ लिया और उनके दूध पर रख दिया। 

मैंने भी उनके मम्मे को मुँह में लिया और अपनी उंगली उनकी चूत में डाल कर चुत गीली कर दी थी। पहले मैंने भाभी की चूत को गाउन के ऊपर से मसलना शुरू किया और भाभी फोन से ध्यान हटा कर मेरा हाथ अपनी चूत पर दबाने लगीं। 

भाभी और देवर की चुदाई का किस्सा – 4

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