शादी में मिली लड़की की भी कर दी चुदाई – 1 

मैं और मेरा एक खास दोस्त जिसका नाम रोहन था, दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे। मेरे दोस्त ने एक गर्लफ्रेंड पटा ली थी। उस लड़की का नाम जैनब था। अब बस मैं ही सिंगल बचा था। 

कभी कभी जब मेरा घर खाली रहता, तो रोहन अपनी जुगाड़ जैनब को मेरे घर लाकर इसके साथ मस्ती करता था। वो अप्रैल का महीना था। उसी दौरान मेरे दोस्त के भाई की शादी तय हो गई। 

एक अच्छा सा होटल देख कर बुक कर दिया गया था। मेहमानों के रहने और खाने का काफी अच्छा इंतजाम किया गया था। मैं भी शादी से एक दिन पहले उस होटल पहुंच गया था। रोहन ने जैनब को भी बुलाया था। 

मैं रोहन के साथ काम में उसको हाथ बंटा रहा था। तभी मुझे एक बहुत ही सेक्सी सी लड़की दिखी जिसने जींस और टी-शर्ट पहनी हुई थी। मैंने उसे एक नजर देखा और इतना ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि ये मेरे किसी काम की हो सकती है। 

मैं बस अपने काम में लगा रहा। अब चूंकि वो लड़की एक माल जैसी थी तो जब भी वो मेरे सामने से निकलती तो मेरी नजरें उस पर टिक जातीं और मैं उसे अपनी आंखों से चोद लेता। 

फिर अचानक से मैंने उस लड़की को देखा तो इस बार वो जैनब के साथ बैठ कर बातें कर रही थी। मेरी खोपड़ी ठनक गई कि इसका उसका क्या गठजोड़ है। थोड़ी देर बाद जब जैनब मुझसे मिली, तब मैंने उससे उस लड़की के बारे में पूछा। 

जैनाब ने बताया कि वो एक पंजाबी कुड़ी है, उसका नाम दिलप्रीत है। 

मेहमानो ने दिखाए सुहाने दिन – 1 

सॉरी बोलने के लिए ढूंढता रह गया

ये भी बताया कि वो उसकी स्कूल की सहेली है। आज इत्तफाक से वो उससे बड़े दिनों बाद मिली है। मैंने हंसते हुए उससे कहा- मेरी अपनी सहेली से बात करा दे। वो बोली- अभी खाना खाते वक्त मेरे साथ बैठ जाना, मैं तेरी बात करा दूंगी। 

मैं भी जल्दी से रूम में जाकर फ्रेश होकर नीचे आ गया और जैनब के साथ बैठ गया। कुछ देर बाद दिलप्रीत भी हमारे साथ आ गई। हम सबने खाना लिया और खाते हुए बातें करने लगे। हॉट कुड़ी दिलप्रीत जितनी सेक्सी थी, उतनी ही सेक्सी उसकी आवाज थी। 

उससे बात करके पता चला कि वो पुणे से एम बी बी एस कर रही है। मेरी नजर बार बार उसके गोल गोल मम्मों पर जा रही थी और उसने मुझे उसके मम्मों घूरते हुए देख लिया था। कुछ देर में हमारा खाना हो गया। वो मुझे कुछ गुस्से में लग रही थी। मैं थोड़ा सहम गया। 

मैंने जैनब को सब बता दिया तो उसने कहा- कोई बात नहीं, कल उसको सॉरी बोल देना। मैं चुपचाप अपने कमरे में आ गया और सो गया। अगले दिन सुबह उठ कर मैं रोहन के साथ ऐसे ही छोटे मोटे कामों में लगा रहा। 

मैंने दिलप्रीत को सुबह सिर्फ एक बार देखा। ऐसे ही शाम हो गई। मैं बस मौका देख रहा था कि कब मुझे वो अकेले में मिले और मैं उसको सॉरी बोल दूँ। फिर मैं भी नहा धोकर अच्छे कपड़े पहन कर नीचे आ गया। 

शाम को सात बजे सब मेहमान नीचे हॉल में प्रोग्राम में शामिल होने आने लगे। मैं दिलप्रीत को ढूंढ रहा था। उसी समय मुझे जैनब दिखी। मैंने उससे पूछा- दिलप्रीत कहां है? 

तो वो बोली- वो अभी तैयार हो रही है और आराम से उसको देखना, पागल मत हो जाना। वो हंसकर चली गई। करीब दस मिनट बाद दिलप्रीत मुझे दिखाई दी। वो पिंक कलर की बैकलैस ड्रेस पहन कर आई थी। 

मेहमानो ने दिखाए सुहाने दिन – 2

होटल के कमरे में बुला लिआ लड़की ने अकेला 

मैं वहीं खड़े खड़े उसको देखने लगा। उसने मुझे देख कर छोटा सा स्माइल दिया और जाकर एक कुर्सी पर जैनब के साथ बैठ गई। मैं थोड़ी देर के लिए दंग रह गया कि इसे अचानक से क्या हो गया। मैं भी हिम्मत करके उसके बाजू में जाकर बैठ गया। 

अगले ही पल मैंने अपनी जेब में रखा हुआ गुलाब का फूल उसकी तरफ बढ़ाते हुए सॉरी बोला। उसने हंसते हुए गुलाब ले लिया। मैं उससे बात करते हुए उसकी तारीफ करने लगा और वो मेरी हर बात पर हंस कर मुझे जवाब देने लगी। 

अब तक उसे भी समझ में आ गया था कि मैं उसे लाइन मार रहा हूँ। थोड़ी देर बाद सब प्रोग्राम में बिजी हो गए थे मगर हम दोनों एक दूसरे को ही देख कर स्माइल कर रहे थे। मैंने उसे इशारे में होटल के बाहर बुलाया और वो आ भी गई। 

बाहर पार्किंग में थोड़ा अंधेरा था तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और प्रपोज कर दिया। उसको स्माइल करता देख मैंने उसको किस कर लिया। वो जल्दी से हट गई और बोलने लगी- इधर कोई देख लेगा। 

मुझे समझ आ गया कि इसको भी चुल्ल हो रही है। तभी उसने मेरा नंबर ले लिया और बोली- मैं फोन करूंगी। इतना कहते हुए वो चली गई। मैं उसकी हिलती हुई गांड देखता रहा। उसने भी पलट कर स्माइल दिया और होटल के अन्दर चली गई। 

मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था ये क्या हुआ, इतनी जल्दी मामला सैट हो गया। उसके जाने एक मिनट बाद मैं भी अन्दर आ गया और इधर उधर घूमते हुए दिलप्रीत को खोजने लगा। करीब ग्यारह बजे दिलप्रीत ने मुझे कॉल किया और उसने मुझे अपने रूम के बाहर आने को कहा। 

मैं सब छोड़ कर भागता हुआ ऊपर चला गया। उसका रूम बाहर से लॉक था। तभी लिफ्ट से दिलप्रीत आई। उसने मुझे देखे बिना अपने रूम का दरवाजा खोला और अन्दर जाकर मुझे अन्दर आने का इशारा कर दिया। मैं भी अन्दर चला गया। उसने दरवाजा बंद करने का कह दिया। मैंने दरवाजा लॉक किया और घूम गया।

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