बीवी की चुदाई की प्यास – 4

अरुणिमा को उनका आना बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था और ये उसके चेहरे पर साफ़ झलक रहा था। गुरबचन जी आगे बढ़ कर अरुणिमा की कमर पकड़ कर खड़े हो गए। 

उन्होंने मुझसे कहा- आज तो दिन भर काम है तुझे, तो मैंने सोचा कि अरुणिमा बोर हो जाएगी इसलिए मैं उसका दिल बहलाने आ गया। मैंने मन ही मन सोचा कि अरुणिमा का दिल बहलाने आए हो या अपनी हवस की आग बुझाने। 

गुरबचन जी के साथ खड़े दोनों आदमियों में से एक ने तुरंत अरुणिमा की चूत पर अपनी हथेली रखी और उसकी चूत में एक उंगली घुसा दी। दूसरे ने अरुणिमा के एक दूध को पकड़ कर जोर से दबा दिया।

गुरबचन जी बोले- अब जा ना … नहीं तो तुझे देर हो जाएगी। बेफिक्र होकर जा, हम तेरे आने तक यही हैं। मैं बाहर आया और पलट कर देखा, तो गुरबचन जी अरुणिमा को लेकर अन्दर बेडरूम के तरफ जा रहे थे। 

वो चिल्ला कर बोले- योगेश जी, दरवाजा बंद करके आइएगा। एक आदमी दरवाजे तक आया और मुझे देख कर मुस्कुरा कर बोला- मस्त रंडी है … आज तो मजा आ जाएगा। ये बोल कर उसने मेरे मुँह पर ही दरवाजा बंद कर दिया। 

इंटरनेट से चुदाई मिलने की ख़ुशी – 1

घर जाके देखा चुदती हुई बीवी को 

अब मेरा रुकने का कोई औचित्य नहीं था। मैं भागा भागा निगम पहुंचा। लगभग साढ़े दस हो रहे थे। निगम का काम अभी चालू हो ही रहा था। बहुत से अधिकारी अभी आए ही नहीं थे। 

इंतज़ार करते करते बारह बज गए। कुछ अधिकारी आए और कुछ नहीं। जिन अधिकारियों से मुझे काम था, मैंने उनसे दस्तखत करवाना चालू किया और काम खत्म होते होते लगभग तीन बज गए। 

फिर मैंने हर एक फाइल को अलग अलग कार्यालय में जमा किया और पावती ले ली। पावती लेकर मैं शमशुद्दीन जी के प्राइवेट ऑफिस के तरफ भागा। वहां उनका पीए उपस्थित नहीं था। 

मैंने उसको फोन किया तो उसने कहा- कुछ देर में आ रहा हूँ। वो पौन घंटा बाद तक आया। उसे पावतियां थमा कर मैं घर को भागा। घर पहुंच कर दरवाजे की बेल बजाई, तो अन्दर से आवाज आई- खुला है आ जाओ। 

मैं धड़कते दिल के साथ ये सोचते हुए अन्दर घुसा कि अरुणिमा किस हालत में मिलेगी। जैसे ही ड्राइंग रूम में पहुंचा तो देखा कि गुरबचन जी नहीं थे, अरुणिमा पूरी नंगी सोफा टेबल पर घोड़ी बनी हुई थी।

मै और मेरी चुत की गर्मी की आग – 1

बीवी बन गयी पूरी रंडी

एक आदमी उसके मुँह को चोद रहा था और दूसरा शायद उसकी गांड मार रहा था। अरुणिमा के पूरे बाल अस्त व्यस्त थे और चूचे मसले जाने की वजह से लाल हो गए थे। 

बाकी बदन पर कहीं कहीं दांत से काटने के निशान थे और कहीं कहीं खरोंचों के निशान भी थे। उसके दोनों चूतड़ भी लाल दिख रहे थे, शायद वाइफ हार्डकोर सेक्स के टाइम उन पर उन सब ने थप्पड़ लगाए होंगे। 

मेरे सामने रहते सब थोड़ा नर्मी से अरुणिमा को चोदते थे और मेरे अनुपस्थिति में सब शायद ज्यादा कामुक और आक्रामक हो जाते थे। उसकी गांड जो आदमी मार रहा था, उसने फिर से उसके चूतड़ पर एक थप्पड़ मारा तो अरुणिमा ने मुँह से लंड निकाल कर कहा- मार क्यों रहे हो, चुदवा तो रही हूँ ना! 

वो गरज कर बोला- साली रंडी, मुझे मत सिखा कि कैसे चोदना है, मेरा जैसे मन करेगा, मैं वैसे चोदूंगा। अरुणिमा ने बहस नहीं की और फिर से दूसरे का लंड चूसना शुरू कर दिया। 

लगभग दस मिनट बाद मेरी वाइफ से हार्डकोर सेक्स करके दोनों एक साथ उसके मुँह और गांड में झड़ गए। दोनों अपने कपड़े पहनने लगे और फिर बाहर निकल गए। मैंने अरुणिमा को सहारा दिया और बाथरूम में ले गया। 

वो काफी देर तक नहाती रही, फिर आकर बेडरूम में सो गई। मैंने रात का खाना बाहर से मंगवा लिया लेकिन अरुणिमा इतनी थकी थी कि उसने उठ कर केवल जूस पिया और दोबारा सो गई। मैं भी उसके बगल में सो गया।

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