फोन से मिला चुदाई का रास्ता – 2

क्योंकि वो और उसका भाई ही घर में रहते हैं। उसका भाई एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था तो वो सुबह 9 बजे ही ऑफिस निकल जाता था और शाम को 5 बजे के बाद आता था। तब मैं उससे मिलने उसके घर चला गया। 

जब मैं पहुंचा तो वो लैग्गी और टीशर्ट पहने हुए थी। वो मेरे लिए पानी लायी, फिर बोली- मैं चाय बनाकर लाती हूँ। हम दोनों साथ में बैठकर चाय पीने लगे। मैं चाय पीते पीते उसे ही देख रहा था। हम दोनों ने चाय ख़त्म की। फिर वो मेरे पास आकर बैठ गयी। मैं उसे किस करने लगा। 

करीब दस मिनट तक किस करने के बाद उसने कहा- बैडरूम में चलते हैं। तो मैं उसे उठाकर उसके बैडरूम तक आ गया। फिर मैंने उसके कपड़े उतार दिये। अब वो मेरे सामने ब्रा और पैंटी में थी। मैंने देर न करते हुए उसकी ब्रा उतार दी। 

मेरी आंखों के सामने उसकी बड़ी बड़ी गोरी गोरी चूचियां सामने उछल रही थी। अब मैं बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों को दबाने और चूसने लगा। वह मदहोश होने लगी। मदहोशी में उसके मुँह से आवाज आने लगी- आऊं उ उ ह … आ ह उ उ। 

फिर धीरे धीर अपने एक हाथ से मैं उसकी चूत को रगड़ने लगा। वो गर्म होने लगी। और फिर मैंने उसकी पैंटी को उतर कर अलग कर दिया। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। पूछने पर बताया कि मेरे आने से पहले ही उसने साफ़ किया है। 

फिर मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में आ गया और अपनी जीभ से उसकी बुर के छेद को चाटने लगा। उसके मुँह से जोर जोर से ‘आह … उह … आह … उह।।’ की आवाज निकल रही थी। थोड़ी देर तक उसकी चूत चाटने के बाद मैं उठ कर बैठ गया और उसे भी उठा कर बैठा दिया। 

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नंगे हो गए तभी के तभी 

फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया। मैंने उसके हाथ में अपना लंड दे दिया। वो उसे अपने हाथों से सहलाने लगी। और फिर मुँह में लेकर चूसने लगी। थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैं अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। 

कुछ देर बाद वो बोली कि अब मैं उसकी चूत में अपना लंड डाल दूँ। जैसे ही मैंने पहली बार लंड डालने की कोशिश की, थोड़ा सा लंड का सुपारा उसकी चूत के अन्दर गया ही था कि वो जोर से चिल्ला दी- मम्मी … आह … उह … उह। 

तब उसने बताया कि उसका पहली बार है। मैंने पास में पड़ी क्रीम की डिब्बी से क्रीम निकली और अपने लंड और उसकी चूत पर लगा दी। और मैं फिर से उसकी चूत में अपना लंड डालने लगा। 

जैसे ही मेरे लंड का सुपारा उसकी चूत के अंदर गया, वो चिल्ला उठी- मम्मी … उह … आह … उह! और कहने लगी- दर्द हो रहा है। फिर मैंने एक जोर का झटका दिया और मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। 

वो फिर से कराह उठी और मुझे अपने ऊपर से नीचे धकेलने लगी। मैं थोड़ी देर उसी तरह रुका रहा और उसे किस करने लगा। फिर जब वो थोड़ा सा शांत हुई तो फिर मैंने एक जोर का झटका दिया। 

मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा अंदर तक घुस गया था। उसकी चूत से खून निकल रहा था। फिर मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। वो उह… अहह… हय… याह… उह … की आवाजें निकल रही थी। 

जब उसको मज़ा आने लगा, तब वह खुद धक्के लगाने लगी। करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। इस बीच वो भी झड़ गयी थी। फिर वो उठने लगी तो उससे उठा नहीं जा रहा था। 

मैंने उसे सहारा देकर उठाया और उसे बाथरूम तक ले गया। हम दोनों ने अपने बदन को साफ किया। थोड़ी देर बाद हम दोनों का मूड फिर बन गया। इस बार हम लोगों ने खूब मज़े लेने की सोची। पहले हम दोनों ने एक दूसरे का चुम्बन करना चालू किया। 

हमने एक दूसरे को करीब 20 मिनट तक होंठों को चूमा। फिर मैंने धीरे धीरे उसकी चुच्चियों को दबाना सुरु किया। वो मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। फिर मैंने उसकी चुच्चियों को एक एक करके पीना शुरु किया। और फिर चुच्चियों को चूसते चूसते उसके पेट पर किस करने लगा।

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चुत को चाटने लगा चुदाई के बाद भी

इससे वो गर्म हो गयी और उह्ह … अह्ह्ह की आवाजें निकालने लगी। फिर हम दोनों एक दूसरे के ऊपर इस तरह लेटे कि मेरा लंड उसके मुँह में और उसकी चूत मेरे मुँह के पास थी। वो मेरा लंड चूसने लगी। मैं उसकी चूत को चाट रहा था। 

बीच बीच में मैं अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डालता तो वो और गर्म हो जाती और मुँह से और तेज से आवाजें आने लगती। फिर कुछ टाइम बाद उसने कहा- अब बर्दाश्त नहीं होता। अपना लंड मेरी चूत में डाल दो। 

मैंने अपनी पोजीशन चेंज की और एक ही झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसके मुँह से चीख निकल गयी। वो अह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाजें बहुत जोर से निकल रही थी। कुछ देर बाद मैंने फिर से धीरे धीरे धक्का लगाना शुरू किया। 

वो ‘उह अह उम्म्ह हाह’ की आवाजें निकाल रही थी। थोड़ी देर बाद वो बोली- और जोर से करो न! फिर मैं और तेज़ी से धक्के लगाने लगा। करीब 20 मिनट की चुदाई में वो झड़ गयी थी। मैं भी उसके साथ ही झड़ा था। अब करीब 4 बज गए थे।

उसके भाई के आने का वक़्त हो गया था। फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और साथ में लायी गर्भ रोकने की दवा उसे खाने के लिए दी और साथ में पेनकिलर भी। हमने एक दूसरे को किस किया। तब मैं उसके घर से निकल गया और मैं वापस आ गया। 

फिर मुझे कुछ महीनों के लिए लखनऊ से बाहर जाना पड़ा। पर हम लोग रोज फ़ोन पर बातें करते रहते थे एक दूसरे से मिलने को बेताब रहते थे। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। हम दोनों फिर कभी नहीं मिल पाए। 

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